देश में इन दिनों ‘लेटरल एंट्री’ पर बहस छिड़ गई है. एनडीए की सहयोगी एलजेपीआर भी इससे सहमत नहीं है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लेटरल योजना पर कहा कि सरकार के समक्ष, प्रधानमंत्री के समक्ष मैं इस बात को रखूंगा. मैं सरकार का अंग हूं कई ऐसी बातें हैं जो सार्वजनिक तौर पर रखने में मैं समर्थ नहीं हूं. सरकार का अंग होने के नाते सरकार का संरक्षण करने की बड़ी जिम्मेदारी भी मेरे कंधों पर है. अगर कहीं ऐसे विषय है, जहां पर हर असहमति होती है पर असहमति को दर्ज करने के लिए भी सरकार के भीतर मुझे एक मंच मुहैया कराया गया है, जहां पर अक्सर ऐसे विषयों को प्रमुखता से रखने का काम करता हूं.
‘नियुक्ति में आरक्षण के प्रावधानों को देखना ही होगा’
चिराग ने कहा कि मैं एक बात स्पष्ट कर दूं. मैं और मेरी पार्टी पूरी तरीके से इस बात को लेकर समर्पित है कि केंद्र सरकार या किसी भी सरकार के जरिए कोई भी नियुक्ति निकलती है, उसमें आरक्षण के प्रावधानों को देखना ही होगा. कोई ऑप्शन नहीं है जैसा मैंने कहा कि एक सरकारी क्षेत्र ही है जहां पर इसके प्रावधानों को आप लागू कर सकते हैं अगर यहां पर भी लागू नहीं किया जाएगा तो यह बहुत बड़ी चिंता का विषय होगा. तो ऐसी कोई भी सरकारी नौकरी इसमें निकले उसमें इसको इंप्लीमेंट किया जाना चाहिए नहीं किया जाता है तो मेरी आपत्ति रहेगी.
जैसे ही यह लैटरल एंट्री वाला मामला हम लोगों के संज्ञान में आया उसी वक्त से मैं लगातार अलग-अलग जगह पर कंसर्न अथॉरिटीज के सामने इस विषय को रखा. प्रधानमंत्री के समक्ष मैंने इन बातों को प्रमुखता से रखा. उनके संज्ञान में अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़ा वर्ग के लोगों के तमाम चिताओं को मैंने रखने का काम किया. लगभग पिछले डेढ़ दो दिन से लगातार मैं खुद प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क में रहा. उन्होंने इस विषय से जुड़े हुए हर बिंदु पर मुझसे चर्चा की. समय-समय पर जो दस्तावेज हैं, उनको बढ़िया करने की जरूरत पड़ी. पिछले डेढ़ दो दिन में मैंने उनको तैयार कर कर प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ में भी मैं भेजने का काम किया.
अब क्या फैसला होगा वह चर्चा के बाद ही मैं आप लोगों के समक्ष रख सकता हूं. केंद्रीय मंत्री के तौर पर मैं कोई ऐसी बात नहीं बोलूंगा जिसकी जानकारी फिलहाल नहीं है. आधे एक घंटे पहले ही इसको रद्द करने का फैसला हमारी सरकार के जरिए लिया गया है. अब इस पर पुण: चर्चा होगी और चर्चा के बाद जो फैसला लिया जाएगा, वह आप लोगों के साथ साझा किया जाएगा.
वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर क्या?
वहीं, वक्फ बोर्ड संशोधन कानून पर कहा कि मेरी पार्टी ने प्रमुखता से इस बिल को टेबल करने से पहले ही अपना सुझाव सरकार के समक्ष रख दिया था कि इसको कमेटी में भेजा जाएगा तो हम लोग को इसमें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि उसी वक्त जो हमारी चर्चा भी हुई थी सबकी मंशा यही थी कि इसको कमेटी में भेजना चाहिए, ताकि इसको बेहतर मजबूत और सशक्त बनाने के लिए तमाम सुझावों का आदान-प्रदान हो. यह बात सरकार को टेबल करने से पहले ही कम्युनिकेट कर दी गई थी.
वहीं चौकीदार और दफादार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जो नियुक्ति निकल गई थी एक-दो जिलों में इसको अभी होल्ड पर रखा गया है. जैसा मैंने कहा कि मेरी मुख्यमंत्री से इस विषय को लेकर बातचीत हुई थी. लिखित तौर पर भी हम लोगों ने मुख्यमंत्री को संज्ञान में यह विषय दे दिया था. मुझे लगता है यह मामला विचाराधीन है, कोई नई नियुक्ति अभी नहीं हुई है और इस बात को हम लोग सुनिश्चित करेंगे कि जो व्यवस्था चौकीदार और दफादारो को लेकर पहले थी यह वैसे ही चलती रहेगी.







