वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ न लड़ने का ऐलान किया है। बाइडन ने डेमोक्रेट पार्टी से उम्मीदवारी के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के नाम का समर्थन किया है। हालांकि अंतिम निर्णय 19-22 अगस्त को शिकागो में डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में लिया जाएगा। कमला हैरिस की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। लेकिन फिर भी डेमोक्रेटिक पार्टी के एक और कार्यकाल के लिए भारत में कम उत्सुकता देखने को मिलती है। जो बाइडन के कार्यकाल में रक्षा समेत उभरती हुई टेक्नोलॉजी में भारत-अमेरिका ‘व्यापक रणनीतिक वैश्विक साझेदारी’ काफी आगे बढ़ी है। लेकिन बाइडन प्रशासन की मानवाधिकार के मुद्दों पर दबाव बनाने की रणनीति द्विपक्षीय संबंधों की सतह पर घर्षण का कारण रहा है।
स्पुतनिक इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में एक थिंक टैंक के प्रमुख के हवाले से कहा कि चुनौतियों के बावजूद भारत के लिए रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप ज्यादा फायदेमंद होंगे। एक्सपर्ट ने कहा, ‘ट्रंप का राष्ट्रपति बनना भी भारत के लिए चुनौतियों का एक सेट लाएगा। खासकर व्यापार के क्षेत्र में। वह अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देंगे और विदेशी आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि बाइडन प्रशासन ने भारत की चिंताओं पर ध्यान दिए बिना मानवाधिकारों के मुद्दे को दबाव डालने वाले एक उपकरण की तरह इस्तेमाल किया।
बाइडन से अलग नहीं होगी नीति
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक सितंबर 2021 में वॉशिंगटन में अपनी संक्षिप्त मीटिंग के दौरान मानवाधिकार के सवाल पर हैरिस ने मोदी पर दबाव डाला था। थिंक टैंक प्रमुख ने कहा कि भले ही कमला हैरिस की जड़ें भारत से जुड़ी हों। लेकिन भारत को यह विश्वास है कि कई मुद्दों पर वह बाइडन से बहुत अलग नहीं होंगी। ऐसे मुद्दे जिन्हें भारत घरेलू मामलों में हस्तक्षेप समझता है। उदाहरण के तौर पर लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर अमेरिकी विदेश विभाग ने टिप्पणी की थी, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। इसके अलावा बाइडन प्रशासन लगातार मोदी सरकार पर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाता रहा है।
ट्रंप को हराना होगा मुश्किल
उन्होंने आगे कहा कि भारत पर लगातार अमेरिकी दबाव का सबसे बड़ा उदाहरण खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जो भारत का एक नामित आतंकी है। अमेरिका ने पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप भारत के अधिकारियों पर लगा है। एक्सपर्ट ने कहा कि पन्नू जैसे आतंकी भारतीय पीएम और भारत के खिलाफ बयान देते हैं। लेकिन अमेरिका इस पर कुछ नहीं कहता, बल्कि बाइडन इन्हें बचाते हैं। इस बीच बकनेल विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर झिकुन झू का कहना है कि अगर कमला हैरिस डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बन भी जाती हैं तो भी उनके लिए ट्रंप को हराना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि हैरिस की विदेश नीति का रुख अनिश्चित है। बाइडन प्रशासन के दौरान प्रमुख विदेश नीति के निर्णयों में उनकी भूमिका बेहद कम रही है।







