राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर चर्चा में रहते हैं। और चर्चा का कारण भी खुद बनते हैं। हाल ही में नवादा की जनसभा में आत्म विह्वल हो कर पीएम नरेंद्र मोदी के पैर छूने की कोशिश की। आज सेंट्रल हाल में नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुनने के दौरान दमदार तरीके से डटे रहे अपने आकर्षक संबोधन में पीएम का मान रखा और भावुकता भरे क्षण में एक बार फिर पैर छूने की कोशिश की। नीतीश कुमार का ये बड़प्पन है। वो प्रधानमंत्री को हमेशा अपनी विनम्रता से झुकने को मजबूर कर देते हैं। पीएम मोदी उतनी ही गर्मजोशी से उन्हें उठाकर गले लगाते हैं।
नीतीश का अपना फैसला
दूसरी बार राजद के साथ सरकार बनाने और फिर एनडीए के साथ सरकार बनाने के बीच कई ऐसे भावुक क्षण आए। याद कीजिए मोतिहारी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का संबोधन। जब वहां मौजूद भाजपाइयों के प्रति अद्भुत प्यार उमड़ा और कहते-कहते कह गए आपको हम नहीं भूल सकते। इस क्षण का प्रकटीकरण ही समझे, जब वे अतिरेक भाव के साथ कई बार बोल गए कि एनडीए 4000 पार करेगी। कभी वो ये भी कह बैठे कि अगला मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे। याद कीजिए इस चुनाव के दौरान न जाने कितनी बार कह गए, कुछ दिन के लिए उधर चले गए, अब कभी भी नहीं जायेंगे, हमेशा साथ रहेंगे।
इंडिया गठबंधन से मोह भंग
यह एक दौर था जब पीएम नरेंद्र मोदी से नाराज नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन को खड़ा करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी। लेकिन इंडिया गठबंधन के पहले ही मीटिंग में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने राहुल गांधी को दुल्हा और शेष को बाराती कह कर नीतीश कुमार के मुहिम को झटका दे दिया। फिर राहुल गांधी ने ममता बनर्जी के हवाले से यह कह कर नीतीश कुमार को धोखा दिया कि वे नहीं चाहती हैं कि आपको कन्वीनर बनाया जाय। अंत तो बड़ा ही कड़वा हुआ, जब खड़गे साहब को ममता बनर्जी ने पीएम के रूप में नाम आगे कर दिया और लगे हाथ अरविंद केजरीवाल ने समर्थन भी कर दिया। यानी इंडिया गठबंधन में लालू यादव, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल सब कुछ न कुछ षड्यंत्र रच रहे थे। ऐसे में ससम्मान एनडीए में बतौर सीएम के रूप में नीतीश कुमार की वापसी कहीं न कही नरेंद्र मोदी के प्रति समर्पण का भाव जगा गया।
समय को पहचानते हैं नीतीश
अगर वर्ष 2024 लोकसभा की बात करें तो उन्हें इस बात का एहसास तो हो गया होगा कि भाजपा के साथ रहने के कारण 16 में से 12 लोकसभा सीट जीत पाए। इंडिया गठबंधन के साथ रहते तो जिस तरह से लालू प्रसाद 23 लोकसभा सीट लड़ कर 4 पर जीते। उसी अनुपात में वे भी जीतते। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव नीतीश कुमार अकेले लड़ कर देख चुके हैं। केवल दो लोकसभा सीटें जीती। एक पूर्णिया से संतोष कुशवाहा और दूसरा नालंदा से कौशलेंद्र। लेकिन इस दो सीट वाली जदयू को भाजपा नेतृत्व ने नरेंद्र मोदी के कहने पर अपनी पांच सीटिंग छोड़ कर 16 लोकसभा सीट पर लड़ने का आमंत्रण दिया। वर्ष 2020 के विधानसभा में 43 विधायक रहने के बाद भी उन्हें सीएम पद दे कर सम्मान किया। और तो और लोकसभा परिणाम आने के बाद भाजपा नेतृत्व ने वर्ष 2025 विधानसभा चुनाव का सीएम चेहरा भी घोषित कर दिया।
कई मसलों का समाधान भी यहां है
नीतीश कुमार लगातार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा हेतु प्रयासरत रहे। कई कार्यक्रम चलाए। यह उम्मीद केंद्र सरकार से कर सकते हैं। और यह कोशिश भी होगी। पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की इच्छा भी यहीं पूरी होगी। एक समाजवादी नेता के कारण जातीय जनगणना और जनसंख्या के अनुसार आरक्षण की उम्मीद भी इसी एनडीए की सरकार से। सो, भावुक होने की कम वजहें नहीं है।







