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112 साल का हुआ बिहार,बंगाल से 112 साल पहले 22 मार्च को बिहार ओडिसा प्रांत की राजधानी बनी

UB India News by UB India News
March 22, 2024
in खास खबर, बिहार
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112 साल का हुआ बिहार,बंगाल से 112 साल पहले 22 मार्च को बिहार ओडिसा प्रांत की राजधानी बनी
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बिहार की स्थापना के आज 112 साल का हो गए। बंगाल से 112 साल पहले 22 मार्च को बिहार-ओडिसा प्रांत की राजधानी बनी इससे पहले पूर्वजों ने यहां शिक्षण संस्थानों विरासत के रूप में छोड़कर गए। देश का पहला ताम्र डाक टिकट इसी जगह जारी हुआ। संपत्ति का निबंधन स्वर्ण हस्ताक्षर से होने का इसका इतिहास बिहार का रहा है।

देश का पहला ताम्र डाक टिकट इसी धरती पर जारी हुआ। संपत्ति का निबंधन स्वर्ण हस्ताक्षर से होने का गौरवपूर्व इतिहास बिहार का रहा है। इसे आगे भी गढ़ेंगे तब तो आगे बढ़ेंगे। आजादी की लड़ाई में बलिदान देने, किसान आंदोलन और संविधान निर्माण में बिहार का योगदान रहा है। देश के प्रथम राष्ट्रपति बिहार ने देश को दिया।

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लोकसभा चुनाव के कारण इस बार कोई राजकीय कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो रहा है लेकिन बार-बार आपदा से लड़कर खड़ा होने वाला बिहार के लिए 22 मार्च गौरवशाली दिवस के रूप में यादगार है। जो बंगाल से 22 मार्च 1912 को स्वतंत्र बिहार एंड औडिस प्रांत बना।

आज साइकिल से स्कूल आती-जाती बेटियों। गांव और शहरों को संवरती आधी आबादी, सामाजिक कुरीतियों को दूरकर सामाजिक बदलाव के लिए जतन कर रही हैं- बेटियां। कंधे पर बंदूक, कमर में तमंचा और अदालत में कानूनी बहस आज उनका श्रृंगार बन रही हैं।

1942 की अगस्त क्रांति, संविधान निर्माण में सचिदानंद सिन्हा का योगदान

देश को आजाद करने के लिए पटना के स्कूली छात्रों ने शहादत दी। सचिवालय के समक्ष सतपूर्ति बलिदान की स्मृति है। देश का जब संविधान बन रहा था तब सचिदानंद सिन्हा का बड़ा योगदान था। आजादी के बाद देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद अंतिम दिनों में पटना सदकत आश्रम में बिताया।

उनका निजी बैंक खाता आज भी पटना के एक्जीविशन रोड पंजाब नेशनल बैंक में स्मृति के रूप में है। देशरत्न हा राजेंद्र प्रसाद को पटना सिटी नगरपालिका का अध्यक्ष और बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिन्य को उपाध्यक्ष बनने देखा। बापू ने यहां आकर चंपारण आंदोलन को जन्म दिया तो देही स्वामी सहजानंद सरस्वती को बिहटा में आश्रम बनकर जमींदारी प्रथा के खिलाफ किसान आंदोलन खड़ा करते भी देखा है।

बिहार में ही 1954 में जमींदारी उन्मूलन कानून लागू हुआ

देश में बिहार पहला प्रांत है जहां 1954 में जमींदारी उन्मूलन कानून लागू हुआ तो प्रथम मुख्यमंत्री डा. श्रीकृष्ण सिंह ने छुआछूत मिटाने के लिए देवघर मंदिर में वंचित समाज को लेकर पूजा कराई थी।

डा. श्रीकृष्ण सिंह प्रथम मुख्यमंत्री बने और 1957 में पंचायत राज विभाग बनाया। बिहार ने देवघर (तब झारखंड अलग नहीं था) के बाबा बैजनाथ मंदिर में बंचित समाज के लोगों को पूजा कराते श्रीबाबू को देखा है। वे समाज के कमजोर लोगों को मदद की अपेक्ष के साथ पंचायत में मुरित्या की पत्र लिखते थे।

पटना नगर निगम अधिनियम सन 1952 में बन और नियोजित शहर बसाने के लिए पटना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट, पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार और अच्च चितार नगरपालिका अधिनियम 2007 से बदलाव की नई हवा बही। गांव को संवारने में बिहार नगरपालिका अधिनियम 2006 के बाद आधे आबादी की सता में भागीदारी की भी इसने देखा।

यह राज्य की सप्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ट्रेन थी, जहां से एक नया युग शुरू हुआ। आतीत में जाएं ती 1967 में अकाल पड़ा ती घरों में एक शाम चूल्हा जलता था। कुआं पर पानी के लिए भीड़ लगे रहती थी। आज गाँव में हर घर नल का जल है।

दरोगा प्रसाद राय, महामाय प्रसाद सिन्हा, भोला पासवान रास्त्री, कर्पूरी कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्रा, बिंदेश्वरी दुबे भागवत झा आजाद और छोटे सरकार के बाद जैपी आंदोलन ने निकले लालू प्रसाद यादव व राबड़ी देवी को मुखमंत्री पद की शपथ लेते भी देखा।

आज 22 मार्च 2024 को बिहारवासी बिहार दिवस मना रहे हैं. इस मौके पर जानते हैं बिहार के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जहां साल भर देश-दुनिया से लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आइये जानते हैं इन मंदिरों के बारे में-

महाबोधि मंदिर (Mahabodhi Temple): बिहार के गया में स्थित महाबोधि मंदिर खूब प्रसिद्ध है. यह मंदिर निरंजना नदी के तट पर है. इसे बौद्ध धर्म के लोग पवित्र स्थान मानते हैं. साथ ही यहां मुख्य मंदिर के साथ ही बोधि वृक्ष भी है. कहा जाता है कि इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इसलिए इसे बोधि वृक्ष कहा जाता है.

विष्णुपद मंदिर (Vishnupad Temple): बिहार के गया जिले में विष्णुपद मंदिर है. यह मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है. विष्णुपद मंदिर अपने भव्यता और वैभवता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इस मंदिर का निर्माण ठोस चट्टाओं से हुआ है और यहां 40 सेमी लंबे विष्णुजी का पदचिह्न है, जिसमें शंकम, चक्रम और गधम समेत 9 प्रतीक चिह्न निर्मित हैं.

जानकी मंदिर (Janki Mandir): बिहार के सीतामढ़ी को मां सीता का जन्म स्थान कहा जाता है. यहां से लगभग 5 किमी की दूरी पर जानकी मंदिर है. साथ ही यहां जानकी कुंड सरोवर भी है. ऐसा कहा जाता है कि इस सरोवर में स्नान करने से संतान की प्राप्ति होती है.

महावीर मंदिर (Mahavir Mandir): बिहार के पटना में महावीर मंदिर है, जोकि बहुत प्रसिद्ध है. यहां हनुमान जी की मूर्तियां हैं.

मंगला गौरी मंदिर (Mangla Gauri Mandir):  बिहार के गया में मंगला गौरी का प्रसिद्ध मंदिर है. इस मंदिर को 18 शक्तिपीठों में एक माना जाता है. कहा जाता है कि यहां देवी सती के शरीर का एक अंग गिरा था.

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