देश 18वीं लोकसभा के निर्धारण के लिए आगे बढ़ रहा है. 19 अप्रैल से सात चरणों में लोकसभा चुनाव 2024 आयोजित किया जा रहा है. 4 जून को जनादेश सामने आएगा. एनडीए ने जहां 400 पार के आंकड़े का दावा किया है वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई भी दावा सामने नहीं आया है. बल्कि कांग्रेस के दिग्गज नेता चुनाव से पहले ही पार्टी से किनारा करते नजर आ रहे हैं. बीते एक दशक से गैर कांग्रेसी पार्टी देश पर शासन कर रही है.
ऐसे में कांग्रेस के लिए यह लोकसभा चुनाव काफी अहम है, लेकिन पार्टी का दशा देखकर लगता नहीं कि उन्हें इस लोकसभा चुनाव में कोई दिशा मिल पाएगी. कांग्रेस का कुनबा बीते एक दशक में लगातार बिखरा है. आइए डालते हैं कांग्रेस के बिखरते कुनबे पर एक नजर.
एक दशक में बिखरा कांग्रेस का कुनबा
बीते दस वर्षों में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए केंद्र की सत्ता पर काबिज है. इस दौरान कांग्रेस मजबूत होने की बजाय लगातार कमजोर हो रही है. बीजेपी लगातार कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दे रही है और कांग्रेस इसी दिशा में आगे बढ़ती नजर भी आ रही है. भले ही कांग्रेस की ओर से भारत जोड़ो यात्राएं की जा रही हैं, लेकिन इसका असर चुनावों के दौरान देखने को नहीं मिल रहा है.
विधानसभा चुनावों से लेकर आम चुनाव तक हर जगह कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक ही साबित हो रहा है.
10 साल में 12 पूर्व सीएम ने छोड़ी कांग्रेस
कांग्रेस का हाथ छोड़ने का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. 2014 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही पार्टी से नेताओं का मोह भंग होना भी शुरू हो गया. कई कद्दावर नेताओं ने पार्टी का हाथ छोड़ना शुरू कर दिया. कांग्रेस के बिखरते कुनबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते 10 वर्षों में पार्टी के 12 पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कांग्रेस छोड़ी.
सबसे पहले 31 जनवरी 2014 में ही लोकसभा रिजल्ट से पहले विजय बहुगुणा ने पार्टी छोड़ी और मई में बीजेपी का दामन थाम लिया. वहीं 16 सितंबर 2016 को पेमा खांडू ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर दिसंबर के महीने में बीजेपी जॉइन कर ली.
इसी साल अजीत जोगी ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया और अपनी नई पार्टी का ऐलान किया. वर्ष 2017 में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कांग्रेस को टाटा कह दिया. इनमें 28 जनवरी को एसएम कृष्ण और 18 जनवरी को एनडी तिवारी शामिल हैं. यह दोनों ही नेता बीजेपी में शामिल हो गए.
2018-20 तक थोड़ी राहत
कांग्रेस के लिए वर्ष 2018 से 2020 तक के तीन वर्ष थोड़े राहत भरे रहे क्योंकि इस दौरान कोई पूर्व सीएम पार्टी छोड़कर नहीं गया. लेकिन इसके बाद 29 सितंबर 2021 को लुइजिन्हो फलेरियो और 2 नवंबर 2021 को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ लिया. इन दोनों के अलावा इसी वर्ष 7 दिसंबर को रवि नाइक भी पार्टी से अलग हो गए.
वहीं वर्ष 2022 में गुलाम नबी आजाद और दिगंबर कामत ने भी कांग्रेस की अपनी लंबी पारी को विराम दे दिया और पार्टी से अलग हो गए. वहीं इस साल यानी 2024 में अशोक चव्हाण ने भी कांग्रेस से अपना दाना-पानी बंद कर बीजेपी का राह पकड़ ली.
इन दिग्गज नेताओं ने भी कांग्रेस को अलविदा कहा
बीते कुछ वर्षों में कई दिग्गज और कद्दावर नेताओं ने कांग्रेस से अपना नाता तोड़ा है. इनमें हिमंत बिस्वा सरमा, चौधरी बीरेंदार सिंह, रंजीत देशमुख, जीके वासन, जयंती नटराजन, रीता बहुगुणा जोशी, एन बीरेन सिंह, शंकर सिंह वाघेला, टॉम वडक्कन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, केपी यादव, प्रियंका चतुर्वेदी, जितिन प्रसाद, मिलिंद देवड़ा, बाबा सिद्दीकी, बसवराज पाटिल जैसे नेता शामिल हैं.







