पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ आज एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। केस 28वें नंबर पर है। दो जजों की बेंच आज इस मामले में सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सांसद का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट एपी सिंह के अनुसार सोमवार की दोपहर तक सुनवाई हो सकती है।
संभव है कि मामले पर कोर्ट अपना महत्वपूर्ण फैसला दे सकती है। दरअसल, 27 फरवरी को ही इस केस में सुनवाई की तारीख थी। मगर, उस दिन जजों की बेंच बैठी ही नहीं थी। इस कारण सुनवाई के लिए आज यह केस लिस्ट पर आई है। अब सबकी नजर इस महत्वपूर्ण केस की सुनवाई और इस पर आने वाले फैसले पर टिकी है।
गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैया की पत्नी ने आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। पिछली सुनवाई 6 फरवरी को हुई थी, जिसमें आनंद मोहन को अपना पासपोर्ट जमा करने और हर 15 दिन में थाने में हाजिरी लगाने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा था।
दाखिल कर चुकी हैं जॉइंट पिटीशन
आनंद मोहन की रिहाई का विरोध कर रहीं केस की पिटीशनर उमा देवी कृष्णैया ने पिछले साल के सितंबर महीने में ही एक एडिशनल री-ज्वाइंडर पिटीशन फाइल की थी। तब उन्होंने गुजरात के बिलकिस बानो केस का हवाला दिया था। इस पिटीशन के जरिए उन्होंने कहा था कि जिस तरह से बिलकिस बानो केस के अभियुक्तों को आउट ऑफ टर्न जाकर छोड़ा गया, उसी तरह बिहार सरकार ने भी मेरे पति व गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैया की हत्या में शामिल अभियुक्त आनंद मोहन के साथ किया।
राज्य सरकार ने उन्हें रिहा करने के लिए सारे नियम ही बदल दिए थे। सरकार ने आउट ऑफ वे जाकर काम किया है। अपने एडिशनल री ज्वाइंडर पिटीशन के जरिए उमा देवी कृष्णैया ने आनंद मोहन की रिहाई का विरोध तो किया ही था। साथ ही आनंद मोहन के खिलाफ जितने क्रिमिनल केस बिहार के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं, उनकी संख्या और स्थिति बताने की भी अपील की थी। उनका आरोप है कि राज्य सरकार इसे छिपाने में जुटी है।
16 साल जेल में बिताने के बाद 27 अप्रैल को हुई थी आनंद मोहन की रिहाई
दरअसल, IAS अधिकारी व गोपालगंज के पूर्व DM जी कृष्णैया की हत्या मामले में आनंद मोहन करीब 16 साल तक जेल में बंद थे। बिहार सरकार ने 10 अप्रैल को कारा नियमों में बदलाव किया, जिसके बाद आनंद मोहन समेत 26 कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया। 27 अप्रैल 2023 को आनंद मोहन की रिहाई हुई थी।
इसके बाद ही अपने IAS पति को हमेशा के लिए खो चुकी उमा देवी कृष्णैया ने बिहार सरकार के कानून में बदलाव किए जाने और आनंद मोहन की रिहाई के फैसले का विरोध किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
जेल नियम बदला तो बाहर आए आनंद मोहन
अप्रैल 2023 में बिहार सरकार ने जेल नियमों में बदलाव किया और आनंद मोहन को रिहा करने का फैसला लिया गया। सरकार ने इस रिहाई के पीछे का आधार आनंद मोहन के 14 साल सजा काटने को माना था। अब सरकार के इस फैसले का विरोध कृष्णैया परिवार कर रहा है।







