हरदा की शहरी सीमा में चल रही पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट से 11 मौतों के लिए फैक्ट्री मालिक के साथ ही सरकारी सिस्टम भी जिम्मेदार है। 2015 में पहली बार इस फैक्ट्री में धमाका हुआ था, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में जुलाई 2021 में कोर्ट ने फैक्ट्री मालिक राजेश अग्रवाल और जमीन के मालिक दिनेश शर्मा को 10 साल की सजा सुनाई थी। डेढ़ महीने बाद ही जेल से छूटने पर राजेश अग्रवाल ने फिर पटाखे बनाने का काम शुरू कर दिया था। प्रशासन हर बार यहां जांच करता तो गड़बड़ी मिलती। लाइसेंस भी सस्पेंड किया, लेकिन फैक्ट्री का काम नहीं रुका।
सरकारी अफसर अग्रवाल बंधुओं के पटाखे के इस अवैध कारोबार को खुली आंखों से देखते रहे, लेकिन किसी की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि फैक्ट्री सील कर सके। सवाल पूछने पर अफसर सिर्फ यही जवाब देते हैं कि हमने रिपोर्ट दे दी थी।
उनके कारोबार का ईकोसिस्टम ऐसा था कि न सिर्फ सरकारी सिस्टम बल्कि आसपास के लोग भी उसके अवैध कारोबार के हिस्सेदार हो गए थे। जितने पटाखे उसकी फैक्ट्री में बनते थे, उससे ज्यादा फैक्ट्री के आसपास रह रहे लोग पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर बनाकर देते थे। यहां आसपास के कमोबेश हर घर में बारूद रखा था। यही वजह थी कि जब फैक्ट्री में आग लगी तो उसकी चिंगारियों से आसपास के घरों में भी विस्फोट शुरू हो गए।
2021 में फैक्ट्री और जमीन मालिक को 10 साल की सजा मिली थी
2015 में इस फैक्ट्री में आग लगने से राकेश और इकबाल नाम के मजदूरों की मौत हो गई थी। कोर्ट में याचिका दायर की गई। कोर्ट ने 2021 में फैसला सुनाते हुए फैक्ट्री मालिक राजेश अग्रवाल और फैक्ट्री के लिए लीज पर जमीन देने वाले दिनेश शर्मा को बराबर दोषी मानते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई थी।
गोदाम और फैक्ट्री में परमिशन से कई गुना ज्यादा बारूद
जुलाई 2021 के कोर्ट के फैसले में जिक्र है कि आरोपी राजेश अग्रवाल को सिर्फ 15 किलो पाउडर की अधिकतम क्षमता स्टोरेज का लाइसेंस मिला था, लेकिन उसके गोदाम और फैक्ट्री में इससे कई गुना ज्यादा बारूद था।
आसपास के लोग बताते हैं कि इसकी फैक्ट्री में ट्रकों से बारूद आता था। यानी साफ है कि महज 15 किलो के विस्फोटक का लाइसेंस लेकर अग्रवाल पूरे सरकारी सिस्टम को अपने इशारे पर चलाता रहा। इस फैसले के बाद भी कई दफा कलेक्टर, ADM और SDM ने इस फैक्ट्री की जांच की, तब भी यहां क्षमता से ज्यादा बारूद का स्टॉक मिला। कुछ दिन के लिए सरकारी कागजों पर लाइसेंस सस्पेंड हुआ, लेकिन काम यहां बराबर चलता रहा।
हरदा के राजस्व अमले के अधिकारी भी मानते हैं कि इस फैक्ट्री में जब भी रेड हुई, यहां गड़बड़ मिली। कागजों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन फैक्ट्री में कभी काम बंद नहीं हुआ।
इस फैसले में कोर्ट ने लिखा है कि ये सही है कि राजेश अग्रवाल को विस्फोटक सामग्री का लाइसेंस दिया गया था, लेकिन जिस मात्रा में पटाखे निर्माण का लाइसेंस था, उससे कई गुना ज्यादा उनके पास स्टॉक न सिर्फ फैक्ट्री में मिला, बल्कि गोदाम में भी भारी मात्रा में स्टॉक मिला।
कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई, डेढ़ महीने में जेल से बाहर आया
इस केस में सरकार की तरफ से वकील प्रवीण सोनी ने पक्ष रखा था। जब हमने सोनी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि 7 जुलाई 2021 को कोर्ट ने आरोपियों को अवैध बारूद रखने के संबंध में दोषी पाया था और उन्हें 10 साल की सजा और 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
कोर्ट के आदेश के बाद अग्रवाल को जेल भेजा गया। वह डेढ़ महीने तक जेल में रहा। इसके बाद जमानत पर बाहर आ गया। उसने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। अभी ये मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
सोनी ने बताया कि इसके बाद सोमेश अग्रवाल के नाम से लाइसेंस लिया और फिर पटाखों का काम शुरू कर दिया। इसके बाद उसका काम कभी बंद नहीं हुआ। वे बताते हैं कि यहां 2015 के बाद 2017 और 2022 में भी हादसे हुए थे। अब तक 10-12 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
अफसरों के पास सवालों का कोई जवाब नहीं
संभागीय कमिश्नर पवन शर्मा से हमने सवाल किया कि क्या इस पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस था तो जवाब मिला कि इनके पास 4 लाइसेंस थे। 2 लाइसेंस मैन्यूफैक्चरिंग के केंद्र सरकार के विस्फोटक नियंत्रक से मिले थे। इसके तहत इन्हें सीमित मात्रा में मैन्यूफैक्चरिंग की अनुमति दी। दूसरा- पटाखों के स्टोरेज के 2 लाइसेंस राज्य सरकार से मिले थे। इन्हें कलेक्टर जारी करते हैं।
दो में से एक लाइसेंस पहले ही सस्पेंड हो चुका था। दूसरा लाइसेंस भी अक्टूबर 2023 में सस्पेंड किया जा चुका था। हालांकि, शर्मा इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि बिना लाइसेंस के इस फैक्ट्री में इतना बड़ा कारोबार कैसे चल रहा था।
ADM डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने भास्कर को बताया कि जिस बिल्डिंग में पटाखा फैक्ट्री चल रही थी, इसमें ग्राउंड के अलावा दो फ्लोर थे। इसे पहले भी सील किया गया था। 2023 में यहां GST ने भी छापेमारी की थी। हालांकि, वे भी इस बात का जवाब नहीं दे पाए कि हर स्तर पर गड़बड़ी के बावजूद इस फैक्ट्री में काम कैसे हो रहा था।
2009 में पटाखे की छोटी सी दुकान थी, धीरे-धीरे 5 फैक्ट्रियों का मालिक बना
2009 तक पटाखे की छोटी सी दुकान चलाने वाले राजेश अग्रवाल ने धीरे-धीरे पटाखों की मैन्यूफैक्चरिंग का काम शुरू कर दिया था। एक के बाद एक 5 फैक्ट्रियां खड़ी कर ली थीं। ये फैक्ट्रियां हरदा के आसपास के इलाके में बनी थीं। जिस फैक्ट्री में धमाका हुआ, वह अजनाल नदी किनारे बैरागढ़ बस्ती में है।
राजेश-सोमेश की 5 फैक्ट्रियां, किसी में भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं
सरकारी वकील प्रवीण सोनी कहते हैं कि फैक्ट्री में आग लगने पर सुरक्षा के बंदोबस्त नहीं हैं। मानकों के मुताबिक जिस तरह से बारूद को सुरक्षित रखा जाता है, उसका भी यहां ध्यान नहीं रखा जाता। यहां न आग बुझाने के लिए पानी का इंतजाम था न ही रेत।
इतना ही नहीं लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक पटाखे बनाने के बाद इन्हें आग के अवरोधी डिब्बों में पैक करना जरूरी होता है। लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया था। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को पटाखा निर्माण के काम में नहीं लगाया जा सकता, लेकिन यहां इसका भी उल्लंघन हो रहा था।
ये भी जान लीजिए…इसी फैक्ट्री में कब-कब लगी आग
साल 2015: 2 लोगों की मौत, कोर्ट ने इसी केस में राजेश अग्रवाल को 10 साल की सजा सुनाई।
साल 2018: 3 लोगों की मौत, इसमें क्या हुआ, किसी को नहीं पता।
साल 2022: 3 की मौत, इसमें भी केस की जानकारी अफसरों को नहीं।
फैक्ट्री में धमाके के बाद फरार हो गए थे दोनों भाई, रात में पकड़े गए
भास्कर ने जब राजेश अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल से संपर्क करने की कोशिश की तो पता चला कि उनका हरदा में पुरानी सब्जी मंडी के पास मकान है। यहीं उनकी पटाखे की फुटकर दुकान भी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह 11 बजे पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके के बाद राजेश अग्रवाल और सोमेश अग्रवाल परिवार सहित फरार हो गए हैं।
कमिश्नर पवन शर्मा से जब हमने पूछा कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक होगी? तो जवाब मिला कि फिलहाल जख्मी लोगों जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना ही प्राथमिकता है। हालांकि, आरोपियों को रात में राजगढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया।
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हरदा फैक्ट्री ब्लास्ट; 11 मौत, 217 घायल
मध्यप्रदेश के हरदा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 11 लोगों की मौत हो गई। 217 लोग घायल हो गए, इनमें फैक्ट्री के 51 मजदूर शामिल हैं। 73 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। 38 घायलों को हरदा से रेफर किया गया है। अब तक 95 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। हरदा जिला अस्पताल में भर्ती मजदूर संदीप ने बताया कि हादसे के वक्त फैक्ट्री में 20-25 मजदूर भी थे।







