कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने UGC के उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) में टीचिंग स्टाफ की भर्ती से जुड़े ड्राफ्ट की गाइडलाइन पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने रविवार (28 जनवरी) को कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों (Higher Education Institution) में SC, ST और OBC के रिजर्वेशन को खत्म किए जाने की साजिश की जा रही है।
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- मोदी सरकार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए केवल दिखावे की राजनीति कर रही है। कुछ वर्ष पहले RSS प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा करने की बात कही थी। अब उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने की साजिश हो रही है। UGC का यह प्रस्ताव मोहन भागवत की मंशा के अनुरूप है और स्पष्ट रूप से दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के साथ अन्याय है।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले दिनों जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न दिए जाने पर राहुल गांधी ने कहा था कि देश को ‘सांकेतिक राजनीति’ नहीं ‘वास्तविक न्याय’ चाहिए। मोदी सरकार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के मामले में सिर्फ ‘सांकेतिक राजनीति’ ही कर रही है।
मोदी सरकार की असली नियत क्या है वो UGC के इस प्रस्ताव से एक बार फिर सामने है। हमारी लड़ाई इसी अन्याय और बाबा साहेब के संविधान पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आरक्षण को खत्म करने वाला यह प्रस्ताव पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

UCG के ड्राफ्ट में क्या है?
दरअसल, उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI) में टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर आरक्षण नीति लागू करने के लिए UCG ने 27 दिसंबर 2023 को गाइडलाइन जारी की थी। इस पर पब्लिक ओपिनियन देने के लिए 28 जनवरी तक का दिया गया था।
ड्राफ्ट की गाइडलाइन में है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में SC, ST और OBC के पर्याप्त उम्मीदवार नहीं होने की स्थिति में सीटों को गैर-आरक्षण की प्रक्रिया का पालन करके डी-रिजर्व किया जा सकता है। इसके बाद इन सीटों को सामान्य वर्ग के लिए खोला जाए।
ड्राफ्ट में आरक्षित रिक्त पदों में कमी और बैकलॉग की भी बात कही गई है और कहा गया है कि विश्वविद्यालयों को जल्द से जल्द दूसरी बार भर्ती बुलाकर रिक्तियों को भरने का प्रयास करना चाहिए।
प्रमोशन के मामले में यदि रिजवर्ड रिक्रूटमेंट के खिलाफ प्रमोशन के लिए पर्याप्त संख्या में SC और ST उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हैं, तो ऐसी रिक्तियों को अनारक्षित किया जा सकता है और अन्य वर्ग के उम्मीदवारों से भरा जा सकता है। डी-रिजर्वेशन के प्रस्ताव पर UCG और शिक्षा मंत्रालय की अथॉरिटी ने सहमति जताई है।