उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हुए सुरंग हादसे में फंसे 41 मजूदर दिन-रात उससे बाहर आने की दुआ कर रहे हैं. रेस्क्यू टीमों ने भी अब रफ्तार पकड़ ली है और मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर लाने के लिए काम हो रहा है. सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के रेस्क्यू ऑपरेशन का आज (27 नवंबर) 16वां दिन है. मजदूरों को बाहर निकालने के लिए कुल मिलाकर पांच योजनाओं पर काम किया जा रहा है.
मजदूरों को बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने के लिए रविवार (26 नवंबर) को सुरंग के ऊपर से लंबवत (वर्टिकल) ‘ड्रिलिंग’ शुरू की गई और पहले दिन करीब 20 मीटर खुदाई कर ली गई. ये उन पांच विकल्पों में से एक विकल्प है, जिसके जरिए मजदूरों को सकुशल बाहर लाया जाएगा. रेस्क्यू ऑपरेशन में अब भारतीय सेना भी जुट गई है. ऐसे में आइए इन पांच विकल्पों के बारे में जानते हैं, जिनके जरिए मजदूरों को सुरंग से बाहर लाने की तैयारी हो रही है.
- वर्टिकल एस्केप पैसेज बनाने के लिए 86 मीटर तक ड्रिल किया जाएगा, ताकि मजदूरों तक पहुंचा जा सके. रविवार शाम तक 19.5 मीटर तक खुदाई की गई. राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने बताया है कि अगर कोई परेशानी नहीं होती है, तो गुरुवार तक वर्टिकल ड्रिलिंग का काम पूरा हो जाएगा. एस्केप पैसेज बनाने के लिए ड्रिलिंग करके 700 मिमी पाइप मलबे के अंदर डाले जा रहे हैं. इससे कुछ दूरी पर, इससे पतले 200 मिमी व्यास के पाइप अंदर डाले जा रहे हैं जो 70 मीटर तक पहुंच चुके हैं.
- सुरंग के सिल्क्यारा-छोर से हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग के दौरान मिली असफलताओं के बाद वर्टिकल बोरिंग का ऑप्शन चुना गया था. सिल्क्यारा छोर पर लगभग 60 मीटर का मलबा रास्ते में बाधा बन गया था. हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बड़ी ऑगर ड्रिल शुक्रवार को फंस गई, जिसके वजह से अधिकारियों को 25 टन की मशीन को छोड़ना पड़ा और उन्हें रेस्क्यू के अन्य तरीके खोजने पड़े हैं.
- मजदूरों को बाहर निकालने के लिए एक और संभावित तरीका बगल से ड्रिलिंग करना है. हालांकि, इसके लिए अभी तक जरूरी मशीनरी घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाई है. एनडीएमए सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने कहा कि रविवार रात तक मशीनों को सुरंग हादसे वाली जगह पर पहुंचना था. उनके जरिए ही मजदूरों तक पहुंचने के 17 मीटर के रास्ते को साफ किया जाना था.
- सुरंग के बड़कोट छोर से ब्लास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करके 483 मीटर लंबी बचाव सुरंग बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है. रविवार सुबह तक पांच धमाके 10-12 मीटर के क्षेत्र में हो चुके हैं. हसनैन ने कहा कि बचाव अभियान में तेजी लाने के लिए प्रतिदिन तीन विस्फोट करने की कोशिश की जा रही है.
- अधिकारियों ने कहा कि फंसे हुए मजदूरों के लिए सुरंग के भीतर रोशनी, ऑक्सीजन, भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध हैं. इससे पहले, ऑगर ड्रिलिंग मशीन के खराब होने की वजह से बचाव अभियान रुकने के बाद उन्हें तनाव से राहत पाने के लिए मोबाइल फोन और बोर्ड गेम उपलब्ध कराए गए थे.
कहां तक पहुंचा काम
रात में ऑगर मशीन का पूरा ब्लेड बाहर निकाल लिया गया है. अब जिस वजह से ऑगर मशीन डिस्टर्ब हुई थी उस मेटल को काटकर बाहर किए जाने का काम शुरू होगा. 800 mm का जो पाइप भीतर डाला जा रहा था वो भी टेढ़ा हो गया है. लगभग पौन मीटर के पाइप को काटकर बाहर निकाला जायेगा. इस बाधा को दूर करने के बाद मैनुअल ड्रिलिंग का काम शुरू किया जाएगा. ऊपर हो रही ड्रिलिंग में रात तक लगभग एक मीटर वाले हिस्से में 75 मीटर तक ड्रिलिंग हो चुकी है. मगर इसमें पानी आ जाने के कारण ड्रिलिंग का काम रोक दिया गया है. इसके समानांतर हो रही आठ इंच की ड्रिलिंग लगभग चालीस मीटर तक हो चुकी है. जिस जगह पानी आया है उसका आज परीक्षण किया जाएगा कि आगे की ड्रिलिंग कैसे की जाए. यह भी विचार किया जा रहा है कि आठ इंच वाली ड्रिलिंग को उतनी ही गहराई तक ले जाकर पानी पंप करके बाहर निकाला जाये.
वर्टिकल ड्रिलिंग से मजदूरों तक पहुंचने के लिए चार दिन का लगेगा समय
सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करने के वास्ते रविवार को सुरंग के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू की गयी और अब तक 19.2 मीटर ड्रिलिंग की जा चुकी है. अधिकारियों ने अमेरिकी ऑगर मशीन के टूटने के एक दिन बाद मजदूरों को बाहर निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग शुरू की गयी है. मजदूरों तक पहुंचने के लिए कुल 86 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग की जाएगी और इसमें चार दिन का समय लगेगा.
ड्रोन के जरिए मजदूरों का हाल चाल लिया जाएगा
15 दिन से मजदूर सुरंग के अंदर हैं. वहां उनकी सेहत कैसी है और उनकी मेंटल हेल्थ कैसी है, वह कैसा महसूस कर रहे हैं, इसका पता लगाने के लिए ड्रोन के जरिए मजदूरों से संपर्क किया जाएगा. ड्रोन के जरिए मजदूरों का हाल चाल लिया जाएगा. इस काम के लिए भारतीय सेना ने ड्रोन मैन मिलिंद राज से संपर्क किया है, जो अपनी रोबोटिक्स इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके 41 मजदूरों को निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेंगे. आइए पहले जानते हैं कौन हैं मिलिंद राज और फिर जानेंगे कैसे वह रेस्क्यू ऑपरेशन में काम करेंगे.
कौन हैं ड्रोन मैन मिलिंद राज?
लखनऊ के रहने वाले मिलिंद राज एक रोबोटिक साइंटिस्ट हैं, जो तकनीकी तौर पर भारतीय सेना को मजबूत करने का काम कर रहे हैं. मिलिंद राज का दावा है कि उन्होंने जो ड्रोन बनाए हैं, वे पाकिस्तान और चीन की नापाक साजिशों को चकनाचूर कर देंगे. उनका कहना है कि उनके द्वारा बनाए गए ड्रोन्स का इस्तेमाल भारतीय सेना में किया जा रहा है और वह कई और ऐसे ड्रोन बनाने के लिए काम कर रहे हैं, जो भविष्य में सेना के काम आएंगे. इतना ही नहीं कृषि, मेडिकल सहायता और रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी उनके बनाए ड्रोन काम कर सकते हैं.
उनका कहना है कि 2 से 3 मीटर तक जमीन के अंदर मिट्टी की स्थिति और बीज की वृद्धि का ड्रोन के जरिए पता लगाया जा सकता है. इसके अलावा, अगर कोई हादसा हो जाए तो एंबुलेंस की तुलना में ड्रोन से जल्दी घायलों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सकती है और रेलवे ट्रैक पर पहले से ही ड्रोन को लगाकर मॉनिटरिंग की जा सकती है. अगर ट्रैक पर कोई दिक्कत है तो उसका पहले ही पता कर रेल हादसों को रोका जा सकता है.
कैसे मिला ड्रोन मैन का टाइटल?
विज्ञान के क्षेत्र में मिलिंद राज को उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए बहुत तारीफें मिलती हैं. उनके इन कामों से पूर्व राष्ट्रपति और साइंटिस्ट एपीजे अब्दुल कलाम भी काफी प्रभावित थे. उन्होंने ही मिलिंद राज को ‘ड्रोन मैन ऑफ इंडिया’ का टाइटल दिया था. फरवरी 2023 में लखनऊ में हुए इनवेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलिंद राज को खूब वाहवाही मिली थी.
सुरंग से 41 मजदूरों को निकालने में कैसे काम करेंगे ड्रोन?
मिलिंद राज ने बताया कि मजदूरों को इंटरनेट जैसे सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि वह अपने घरवालों से संपर्क कर सकें क्योंकि ऐसी स्थिति में उनके लिए यह बहुत जरूरी है. उनके लिए जरूरी है कि उन्हें पता चले कि उनको बाहर निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और वह जल्द ही टनल से बाहर आ जाएंगे. उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे 41 मजदूरों की मेंटल हेल्थ ठीक रहना बहुत जरूरी है. उन्हें न वहां धूप मिल पा रही है और कई तरह की समस्या हैं. ऐसी स्थिति में अगर वह फिजिकली फिट हैं, लेकिन मेंटली ठीक नहीं हैं तो उनके मेंटल वेल बींग पर ध्यान देना जरूरी है.
मिलिंद राज ने बताया, ‘इस रोबोट में हम अल्ट्रा वॉयलेट सिस्टम का भी इस्तेमाल करेंगे क्योंकि जर्म्स को मारने में यह काम आती हैं ताकि मजदूर बीमार न हों और उनकी मानसिक स्थिति ठीक रहे. अगर वो अपनी कोई बात कहना चाहते हैं तो जैसे उदाहरण के तौर पर कोई शख्स लिफ्ट में फंस जाता है तो वह घबरा जाता है और अगर बाहर खड़े आदमी से उसकी बात हो जाए तो वह शांत हो जाता है. ये लोग तो 16 दिन से टनल में फंसे हुए हैं तो ये ड्रोन उनको आश्वासन देगा कि कोई पूरा टाइम बाहर से उन्हें देख रहा है और अगर उनकी सेहत में गिरावट आती है तो पूरे टाइम उनके लिए चिकित्सा रहेगी.
वीडियो कॉल पर घरवालों से बात कर सकेंगे मजदूर
मिलिंद राज ने आगे कहा कि मजदूरों तक सामान पहुंचाने के लिए जो पाइप बनाए गए हैं, उन्हें लाइफ लाइन कहते हैं, जिनके जरिए उन्हें मोबाइल फोन भेजे गए हैं, लेकिन वहां इंटरनेट ही नहीं आता है तो ये सर्विस इंटरनेट भी उन्हें देगा. इस तरह वह अपने रिश्तेदारों और परिजनों को वीडियो कॉल, वॉट्सएप कर सकते हैं, संपर्क में रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि ये मिशन एक तो रूट की वजह से बहुत चैलेंजिंग है, ऊपर से यह एक पहाड़ी इलाका है. पहाड़ी इलाका सेफ नहीं होता है और ये लैंडस्लाइड प्रोन इलाका है.







