मध्य प्रदेश में भी भारत के दूसरे राज्यों की तरह चुनाव में जाति फैक्टर अहम है. इसी वजह से हर राजनीतिक दल जाति को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाते हैं. यहां आगामी विधानसभा में भी इसका महत्व साफ नजर आ रहा है. सभी दल अलग-अलग जाति वाले वोटरों को साधने में लगे हैं.
लोकनीति के सर्वे के मुताबिक, देश में आज भी 55% वोटर्स उम्मीदवार की जाति देखकर वोट देते हैं. पर मध्य प्रदेश में आकर यह प्रतिशत 65 प्रतिशत हो जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर मध्य प्रदेश में किस जाति के कितने प्रतिशत वोट हैं.
जनरल और ओबीसी की संख्या ज्यादा
मध्य प्रदेश में जनरल कैटेगरी के वोटरों की संख्या करीब 15 प्रतिशत है. राज्य में ओबीसी वोटरों की संख्या करीब 38 प्रतिशत है. आंकड़ों के लिहाज से यह सबसे ज्यादा है. यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. राहुल गांधी ने भी इसी वजह से सत्ता में आने के बाद ओबीसी के लिए सर्वे कराने की बात कही थी. इसके अलावा एससी वोटरों की संख्या 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वोटरों की संख्या 21 पर्सेंट है.
बात मुस्लिम वोटर की करें तो मध्य प्रदेश के 4.94 करोड़ वोटर्स में 7 प्रतिशत (करीब 46 लाख) मुस्लिम वोटर हैं, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ और भोपाल रीजन की 40 सीटों के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. इन इलाकों में राजनीतिक दल इस फैक्टर को ध्यान में रखते हैं और मुस्लिम वोटरों को लुभाने की कोशिश करते हैं.
अन्य धर्म के वोटरों की संख्या 3 पर्सेंट
मुस्लिम से अलग अब दूसरे धर्मों के वोटरों पर नजर डालें तो बुद्ध, क्रिश्चन, सिख और अन्य धर्म के भी वोटर मध्य प्रदेश में हैं. इन सबका वोट करीब तीन प्रतिशत है. कई सीटों पर ये वोट भी नतीजों को प्रभावित करता है.






