संयुक्त राष्ट्र में इजरायल ने रूस और चीन को खूब खरी-खोटी सुनाई है. दरअसल, इजरायल पर हमास द्वारा किए गए आतंकी हमलों की निंदा करने वाले अमेरिका द्वारा लिखित मसौदा प्रस्ताव दोनों देशों ने वीटो कर दिया था. जिसके बाद इजरायल के राजदूत गिलाद एर्डन ने कहा कि क्या इन देशों को भी नरसंहार का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा, “इजरायल में हम अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं… अगर आपके किसी भी देश में इसी तरह का नरसंहार हुआ, तो मुझे यकीन है कि आप इजरायल की तुलना में कहीं अधिक ताकत के साथ कार्रवाई करेंगे.”
एर्डन ने रूस को कहा, “आपके मन में यह सवाल नहीं होगा कि इस तरह के क्रूर नरसंहार के लिए ऐसे अमानवीय अत्याचार करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान की आवश्यकता है ताकि उनकी आतंकवादी क्षमताओं को खत्म किया जा सके ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे अत्याचार दोबारा कभी नहीं हो सकें.”
रूस और चीन ने अमेरिका के प्रस्ताव को वीटो किया था
TSS की रिपोर्ट के अनुसार, रूस और चीन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका द्वारा लिखित मसौदा प्रस्ताव को वीटो कर दिया था. मसौदा प्रस्ताव में कट्टरपंथी फिलिस्तीनी आंदोलन हमास द्वारा इजरायल पर हमले की निंदा की गई और बंधकों की रिहाई करने का आह्वान किया गया. हालांकि, प्रस्ताव को 10 देशों का समर्थन मिला जबकि TASS के अनुसार, रूस, चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने इसके खिलाफ मतदान किया और दो देश मतदान में शामिल नहीं रहे.
इससे पहले, मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंज़्या ने कहा कि उनका देश अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा, उन्होंने कहा कि उन्हें इसमें कोई मतलब नहीं दिखता क्योंकि दस्तावेज में पार्टियों के बीच तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की कोई मांग नहीं है. एर्डन ने कहा कि वह उन लोगों के फैसले से स्तब्ध हैं जिन्होंने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.
नरसंहार करने वाले आतंकवादियों को फिर से संगठित किया जा रहा
एर्डन ने कहा, “जिन्होंने अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है, उन्होंने दुनिया को दिखाया है कि यह परिषद ISIS जैसे आतंकवादियों की निंदा करने का सबसे बुनियादी कार्य करने में असमर्थ है और इन जघन्य अपराधों के पीड़ितों की आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि नहीं कर सकता है. एर्डन ने आगे कहा कि आज जिस रूसी प्रस्ताव पर मतदान हुआ है, उसमें इजरायल के हाथ बांधने की कोशिश की गई है, “हमें हमारे अस्तित्व के लिए खतरे को खत्म करने से रोका जा रहा है और नरसंहार करने वाले आतंकवादियों को फिर से संगठित होने की अनुमति दी जा रही है ताकि वे हमारा फिर से नरसंहार कर सकें.”
संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी दूत ने कहा, “इजरायल गाजावासियों को युद्ध क्षेत्र में लौटने के लिए क्यों कहेगा? हम जीवन को महत्व देते हैं और हम फिलिस्तीनियों से नहीं लड़ रहे हैं,” इस बीच, रूस के वीटो की निंदा करते हुए एर्डन ने प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए अमेरिका और परिषद के हर दूसरे सदस्य को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, “मैं संयुक्त राज्य अमेरिका और इस परिषद के हर दूसरे सदस्य को धन्यवाद करना चाहूंगा जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया. एक प्रस्ताव के लिए मतदान करना जो स्पष्ट रूप से क्रूर, नरसंहार आतंकवादियों की निंदा करता है, यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र के हॉल में फैले सभी झूठों के बावजूद, अभी भी ऐसे लोग हैं जो स्वतंत्रता और सुरक्षा के मूल्यों के लिए खड़े हैं.
220 से अधिक इजरायली बंधक
एर्डन ने कहा, “हमास ने यहूदियों का सबसे क्रूर नरसंहार किया है. गाजा में फिलिस्तीनी स्थिति के लिए हमास पूरी तरह से जिम्मेदार है. वह मानवता के खिलाफ अपराध कर रहा है.” बता दें कि 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर 5000 से अधिक रॉकेट दागे थे. 220 से अधिक इजरायलियों को बंधक बनाया था.







