हमारा चन्द्रयान-3 चांद के और करीब पहुंच गया। मून मिशन पर निकले चन्द्रयान ने आखिरी चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। वैज्ञानिकों ने चन्द्रयान के प्रोपल्सन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल को अलग कर दिया। अब सिर्फ चांद पर तिंरगे के पहुंचने का इंतजार है। हालांकि इसमें छह दिन का वक्त और लगेगा। अभी लैंडर मॉड्यूल चांद से तीस किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगाएगा और 23 अगस्त को लैंडर चांद पर उतरेगा। ISRO के वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होगी। विक्रम लैंडर की चांद पर सॉफ्ट और सेफ लैंडिंग होगी। पिछली बार जो कमियां रह गईं थीं, उन्हें पूरी तरह से दुरूस्त कर दिया गया है। इसलिए इस बार किसी तरह की अनहोनी की गुंजाइश न के बराबर है। हालांकि कुछ लोग कह सकते हैं कि पिछली बार चन्द्रयान 2 भी इस चरण तक पूरी तरह ठीक था, इसलिए अभी से बहुत ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक चंद्रयान 3 के जो फ्लाइट पैरामीटर्स हैं, जिस तरह से कमांड पर एक्शन सौ परशेंट एक्यूरेसी के साथ हो रहा है, जो ऑर्बिटल मूवमेंट है, जो स्पीड है, उस गति पर वैज्ञानिकों का जिस तरह का नियंत्रण है, उसके बाद पूरे यकीन के साथ कहा जा सकता है कि 23 अगस्त को भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश हो जाएगा। ये बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। अन्तरिक्ष विज्ञान में हमारे वैज्ञानिकों का लोहा पूरी दुनिया मानती है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली समेत दुनिया के पचास से ज्यादा देशों के उपग्रह भारत से अंतरिक्ष में छोड़े जाते हैं। दुनिया हमारे रॉकेट्स पर भरोसा करती है। लेकिन इसके बाद भी आजादी के 75 साल के बाद भी भारत चांद तक नहीं पहुंच पाया। लेकिन अब आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर चन्द्रयान 3 के जरिए ये कमी भी पूरी हो जाएगी। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया का चौथा देश होगा जिसका झंडा चांद पर पहुंचेगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत पहला देश होगा। इसलिए ये उपलब्धि और ज्यादा बड़ी हो जाती है। हालांकि इसरो के वैज्ञानिक ने कहा है कि अगर इस बार चन्द्रयान-3 के इंजन भी फेल जाते हैं, तो भी लैंडिंग सुनिश्चित होगी, सफल होगी। मुझे तो तो पूरा यकीन है कि हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत जरूर कामयाब होगी और पूरे देश को इस मिशन की सफलता के लिए कामना करनी चाहिए।
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