भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक सचिव शांतनु भटवाडेकर सहित वैज्ञानिकों की एक टीम ने चंद्रयान-3 मिशन से एक दिन पहले गुरुवार को आंध्र प्रदेश के तिरुपति वेंकटचलपति मंदिर का दौरा किया और प्रार्थना की. मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद इसरो वैज्ञानिकों की टीम ने कहा, ‘यह चंद्रमा पर हमारा मिशन चंद्रयान-3 है. 14 जुलाई को प्रक्षेपण होना है.’
इससे पहले, इसरो ने बुधवार को चंद्रयान-तीन मिशन के लिए ‘मिशन तत्परता समीक्षा’ (एमआरआर) पूरी कर ली. राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक ट्वीट में कहा, ‘(एमआरआर) बोर्ड ने प्रक्षेपण को अधिकृत कर दिया है. उल्टी गिनती गुरुवार दोपहर 1 बजे से शुरू होगी.’ अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस सप्ताह प्रक्षेपित किये जाने वाले चंद्रयान-3 मिशन के लिए संपूर्ण प्रक्षेपण तैयारी और प्रक्रिया का 24 घंटे का ‘प्रक्षेपण पूर्वाभ्यास’ भी किया.
चंद्रयान-3 मिशन का प्रक्षेपण 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा और इसके लैंडर के चंद्रमा की सतह पर 23 या 24 अगस्त को ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने की उम्मीद है. चंद्रयान-3 मिशन सितंबर 2019 में भेजे गए चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जिसके चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने की संपूर्ण क्षमता प्रदर्शित करने की उम्मीद है.
उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने में सफलता नहीं मिल पाई थी और इस लिहाज से चंद्रयान-3 मिशन को भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है. चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान, जिसे एलवीएम-3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) (पहले जीएसएलवी एमके-3 के रूप में जाना जाता था) द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा. यह तीन मॉड्यूल- प्रणोदन, लैंडर और रोवर का एक संयोजन है. रोवर चंद्र सतह का अध्ययन करेगा और यह लैंडर के अंदर लगा है.
चंद्रयान-3 मिशन चंद्र रेजोलिथ के थर्मोफिजिकल गुणों, चंद्र भूकंपीयता, चंद्र सतह प्लाज्मा वातावरण और लैंडर के उतरने के स्थल के आसपास के क्षेत्र में मौलिक संरचना का अध्ययन करने के लिए वैज्ञानिक उपकरण ले जाएगा. इसरो के अधिकारियों के अनुसार, लैंडर और रोवर पर इन वैज्ञानिक उपकरणों का दायरा जहां ‘चंद्रमा के विज्ञान’ थीम में फिट होगा, वहीं एक अन्य प्रायोगिक उपकरण चंद्र कक्षा से पृथ्वी के स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्रिक सिग्नेचर का अध्ययन करेगा, जो ‘चंद्रमा से विज्ञान’ थीम में फिट होगा.
चांद पर राष्ट्रध्वज लगाने वाला चौथा देश बनेगा भारत
भारत चंद्रमा पर राष्ट्रध्वज पहुंचाने वाला चौथा देश बनेगा ही, चांद के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचने वाला पहला देश भी होगा। यह वही इलाका है जहां चंद्रयान-1 के दौरान मून इंपैक्ट प्रोब छोड़ा था और इसरो ने पानी होने का पता लगाया था। यहीं चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग हुई थी।
इतना अहम है चांद
- चांद के गुरुत्व बल से पृथ्वी धीमी गति से घूमती है। चांद न हो तो पृथ्वी तेजी से घूमेगी, दिन जल्दी बीतेगा। दिन महज छह घंटे का होगा।
- चांद न हो तो हम न चंद्र ग्रहण देख पाएंगे, न ही सूर्य ग्रहण।
- जब पृथ्वी पर चंद्र ग्रहण होता है, तब चांद पर सूर्य ग्रहण होता है।
- धरती से सूर्य-चंद्रमा एक आकार के दिखते हैं। सूर्य की तुलना में पृथ्वी से 400 गुना करीब होने से चंद्रमा सूर्य के बराबर दिखता है।
- धरती से चांद का सिर्फ 55% से 60% हिस्सा ही दिखाई देता है।
- चांद पर अब तक 12 मानव जा चुके हैं। हालांकि, 1972 के बाद पिछले 51 साल से कोई मानव चांद की सतह पर नहीं उतरा।
इस बार लैंडर में चार ही इंजन, पांचवां हटाया
इस बार लैंडर में चारों कोनों पर लगे चार इंजन (थ्रस्टर) तो होंगे, लेकिन पिछली बार बीचोंबीच लगा पांचवां इंजन हटा दिया गया है। इसके अलावा फाइनल लैंडिंग केवल दो इंजन की मदद से ही होगी, ताकि दो इंजन आपातकालीन स्थिति में काम कर सकें।
इसी तरह इस बार ऑर्बिटर नहीं है, लेकिन प्रोपल्शन मॉड्यूल होगा जो लैंडर और रोवर से अलग होने के बाद भी चंद्रमा की परिक्रमा में घूमेगा और चंद्रमा से धरती पर जीवन के लक्षण पहचानने की कोशिश करेगा। भविष्य में इस डेटा का इस्तेमाल अन्य ग्रहों, उपग्रहों और तारों पर जीवन की खोज में हो सकेगा।

चंद्रयान-2 की गलतियों से सीखकर चंद्रयान-3 को बेहतर बनाया
2019 में चंद्रयान-2 की आंशिक सफलता के बाद 4 साल में ISRO ने लगातार ऐसे परीक्षण किए, जिनसे चंद्रयान-3 की हर संभावित खामी से निपटा जा सके। मसलन, फेल होने पर क्या होगा और हल या विकल्प क्या हो सकते हैं। यह जानकारी ISRO के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने दैनिक भास्कर के साथ शेयर की।
उन्होंने बताया कि 2019 में हम सॉफ्ट लैंडिंग में असफल रहे थे। इसकी वजह यह थी कि खोजने के लिए हमारे पास सड़क हादसे की तरह मौके पर पहुंच हालात को जानने या फुटेज देखने का जरिया नहीं था। इसलिए चंद्रयान-2 मिशन के डेटा का विश्लेषण किया और उसके सिमुलेशन से देखा कि क्या गलत हुआ, कहां समस्या थी।
केंद्रीय परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि चंद्रयान-3 दुनिया के लिए नए चंद्रमा के द्वार खोलेगा। मिशन चंद्रयान-3 शुक्रवार को दोपहर 2.35 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने चंद्रमा के विभिन्न पहलुओं पर नई रोशनी डाली थी और पहली बार चंद्रमा की सतह पर पानी की मौजूदगी का सबूत दुनिया के सामने लाया था। एक साक्षात्कार में, डॉ. सिंह ने कहा, चंद्रयान-3 भारत के ‘चंद्रमा की ओर मार्च’ को एक कदम और करीब आने का संकेत देता है और इस तथ्य को भी प्रदर्शित करता है कि भारत अन्य देशों से पीछे नहीं है। डॉ. सिंह ने कहा, “इस मिशन की अनूठी विशेषता यह है कि यह न केवल चंद्रमा से चंद्रमा का निरीक्षण करेगा, बल्कि चंद्रमा से पृथ्वी को भी देखेगा।” इस सरकार के पिछले नौ वर्षों में।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत के चंद्रयान-3 की सफलता न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिशन से मिली महत्वपूर्ण जानकारी भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को विश्व स्तर पर मदद करेगी। चंद्रयान-3 को लॉन्च व्हीकल मार्क-III पर लॉन्च किया जाएगा। लैंडर और रोवर चंद्रमा की सतह पर प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक पेलोड ले जाएंगे।







