इस वक्त पूरे फ्रांस में आग लगी हुई है. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति ने एलान किया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो देश में इमरजेंसी लगाई जा सकती है .एक 17 साल के लड़के की पुलिस की गोली से मौत से नाराज लोग पूरे फ्रांस में सड़कों पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. सरकारी इमारतों, पुलिस थानों और दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है, आग लगाई जा रही है. पेरिस में इस वक्त कर्फ्यू है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कर दिया गया है. इसके बाद भी हालात लगातार और खराब होते जा रहे हैं. ट्रैफिक सिग्नल पर चैकिंग के दौरान दो पुलिस वालों ने एक लड़के पर गोली चला दी थी, जिससे लड़के की मौत हो गई. जैसे ही इस घटना का वीडियो वायरल हुआ नाराज लोगों ने पुलिस के खिलाफ आवाज उठाई. फ्रांस से जो तस्वीरें आई हैं, वो हैरान करने वाली हैं. यूरोप में इस तरह के हालात पिछले कई दशकों में नहीं देखे गए. हालांकि फायरिंग करने वाले पुलिस अफसरों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है और इस वजह से पुलिस फोर्स में भी नाराजगी है, लेकिन प्रोटेस्ट करने वाले लोगों का कहना है कि सिर्फ पुलिस वालों को जेल भेजने से काम नहीं चलेगा. उनकी शिकायत है कि फ्रांस में पुलिस वाले निरंकुश हो गए हैं. ये मामला नस्लवाद का है. लोगों का इल्जाम है कि पुलिस वालों ने जानबूझ कर एक अफ्रीकी मूल के बच्चे को मार डाला, इसलिए अब सरकार को सख्त संदेश देना होगा, साफ बात करनी होगी. चालीस हजार पुलिस वालों को हालात पर काबू करने के लिए उतारा गया है लेकिन हालात काबू में नही आए हैं. अब तक हुई हिंसा में सौ से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. करीब तीन दर्जन पुलिस वाले बुरी तरह घायल हैं. क़रीब एक हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. पुलिस को दंगा करने वालों पर गोली चलाने का हुक्म दिया गया है.
फ्रांस में इतनी भयंकर हिंसा भड़कने के कई कारण हैं. 2017 में फ़्रांस में एक क़ानून बनाया गया था. इस क़ानून से पुलिस को गोली चलाने के अधिकार में ढील दी गई थी. फ्रांस की मीडिया के मुताबिक़, ये क़ानून पास होने के बाद से फ्रांस में चलती गाड़ियों पर पुलिस के गोली चलाने की घटनाएं बढ़ गई हैं. इस क़ानून के ख़िलाफ़ भी लोगों में ग़ुस्सा है.. इसके अलावा, फ्रांस की इमैन्युअल मैक्रों सरकार के पेंशन सुधार को लेकर भी लोगों में बहुत नाराज़गी है. इसी साल अप्रैल महीने में मैक्रों सरकार ने फ्रांस में रिटायरमेंट की उम्र 62 साल से बढ़ाकर 64 साल करने का एलान किया था. इसके ख़िलाफ़ फ्रांस में कई हफ़्तों तक विरोध प्रदर्शन होते रहे थे. रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने से भी फ्रांस की जनता नाराज़ है. वहीं, यूक्रेन युद्ध की वजह से फ्रांस की जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ी थी. महंगाई की मार ने भी लोगों के ग़ुस्से को भड़का दिया. इसीलिए, जब पेरिस के उपनगरीय इलाके में पुलिस ने एक लड़के को गोली मारी तो फ्रांस की जनता का सब्र टूट गया और भयंकर हिंसा भड़क उठी. बड़ी बात ये है कि फ्रांस में जो हिंसा भड़की उसमें सोशल मीडिया का बड़ा रोल है, इसीलिए प्रेसीडेंट मेक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस को चेतावनी दी है कि वो जल्दी से जल्दी हिंसा के वीडियो हटा लें , वरना उनके खिलाफ एक्शन होगा.







