मूख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर शुक्रवार को आयोजित 15 विपक्षी दलों की बैठक से फिलहाल कोई ठोस फलाफल भले ही नहीं निकला पर इस बैठक ने केन्द्र में बैठी नरेन्द्र मोदी सरकार को बेचैन अवश्य कर दिया है। विपक्षी दलों का यह जुटान भाजपा समेत उसके सहयोगी दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन भी है। विपक्षी दलों ने एक साथ मिलकर वर्ष २०२४ के चुनावी महाभारत का शंखनाद कर दिया है।
पूरा शहर पोस्टर व होडि़ग्स से पाट दिया गया था जो चुनाव प्रचार का उद्घोष कर रहे थे। पटना से तो विपक्षी दलों ने अपना सफर शुरू कर दिया है पर इन्हें मुकाम तक पहुंचने के लिए लंबा व दुर्गम सफर तय करना है। कई ऐसे मामले हैं जिन पर विपक्षी दलों को खुद के बीच एका करना बाकी है। मसलन प्रधानमंत्री का चेहरा कौन होगा। हर स्टेट में कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़े़गा। जाहिर है पीएम चेहरा व सीट बंटवारा काफी पेचीदा मामला है। ज्ञात हो कि बिहार में ही एक समय लोकसभा चुनाव में कांग्रेस व राजद के बीच सीट का मामला फंस गया था और कांग्रेस ने अलग राह पकड़़ ली थी। उस समय राजद ने कांग्रेस को मात्र तीन सीटें देने का ऑफर दिया था पर बात नहीं बनी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस)‚ राहुल गांधी (कांग्रेस) व सीताराम येचुरी (माकपा) के बीच सीट बंटवारा सहज नहीं है। बिहार में कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए कम से कम ७ सीटों का दावा कर रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक वह ७ सीटों से कम पर कभी भी समझौता नहीं करेगी। बिहार में कुल ४० सीटें हैं। इन ४० सीटों में माकपा‚ भाकपा व भाकपा माले भी दावे करेंगे। राजद शून्य पर है। १६ सीटों पर जदयू काबिज है। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनड़ीए के साथ थे तो हमेशा बड़े़ भाई की भूमिका में रहे। अब यहां सवाल है कि सीट बंटवारे में कौन बड़े़ भाई की भूमिका में रहेगा। इसी तरह विपक्ष का पीएम चेहरा भी स्पष्ट करना बाकी है। हालांकि आज की बैठक के बाद जुलाई महीने में शिमला में होने वाली बैठक में सारी अनसुलझी बातें सुलझा लेने का दावा किया गया है। अब देखना है कि शिमला की बैठक में विपक्षी दलों की गाड़़ी कितनी आगे बढ़ती है। हो सकता है कांग्रेस अकेले ३५० सीटों पर चुनाव लड़़ने का दावा कर दे। दरअसल पटना की बैठक ने भाजपा की नींद अवश्य उड़़ा दी है। फिलहाल विपक्ष का मैटर भले ही नहीं सुलझे लेकिन इतनी संख्या में विपक्षी नेताओं के जुटान से देश में अलग संदेश गया है। विपक्षी दलों को भी एहसास है कि यदि एक होकर नहीं लड़ें़गे तो मोदी को कभी नहीं हरा सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यदि वर्ष २०२४ में फिर मोदी की सरकार आ गई तो इसके बाद देश में चुनाव ही नहीं होगा। मोदी ही बने रहेंगे।
विपक्ष की एकजुटता बैठक के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने मंत्रिमंड़ल विस्तार की जिम्मेवारी है। समझा जाता है कि शिमला बैठक के पहले मंत्रिमंड़ल का विस्तार हो जाएगा। कांग्रेस अपने दो विधायकों को मंत्री बनाने की बात कह रही है। राजद को भी भागीदारी देनी है। यदि कांग्रेस के मनोकूल बातें नहीं हुईं तो इसका असर शिमला बैठक पर पड़़ सकता है। लिहाजा १५ दलों के इस विपक्ष को कई अग्निपरीक्षाओं से गुजरना है। दिल्ली के मुख्यमंत्री व आप नेता अरिविन्द केजरीवाल की अलग समस्याएं हैं।







