मणिपुर हिंसा को लेकर संसद भवन में सर्वदलीय बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर की स्थिति का जायजा लेने के लिए अमित शाह ने ये बैठक बुलाई। सर्वदलीय बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदलों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा और सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास सहित अन्य नेता मौजूद रहे। एनसीपी नेता शरद पवार और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी इस मीटिंग में नहीं आए। शरद पवार ने अपने प्रतिनिधि को इस मीटिंग में भेजा।
भाजपा के साथ अन्य दल भी हुए शामिल
बैठक में शामिल होने वालों में भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह (कांग्रेस), तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, मेघालय के मुख्यमंत्री एवं नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेता कोनराड संगमा, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) नेता एम. थंबी दुरई, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता तिरुचि शिवा, बीजू जनता दल (बीजद) के नेता पिनाकी मिश्रा, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा शामिल हुए।
इस बीच छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी के लोग दावा करते हैं कि हमारे राज्य में सांप्रदायिकता नहीं है। यहां 50 दिनों से मणिपुर जल रहा है लेकिन प्रधानमंत्री के पास समस्या के समाधान के लिए बात करने का समय नहीं है।
इंटरनेट पर 25 जून तक बढ़ाया गया प्रतिबंध
बता दें कि मणिपुर में 3 मई के बाद से अभी भी आगजनी जैसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, इसलिए राज्य सरकार ने शांति बहाल करने और कई महीने से फैली इस हिंसा और अशांति को रोकने के प्रयास में इंटरनेट पर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से पांच दिन और 25 जून तक बढ़ा दिया है। राज्य में जारी अशांति को देखते हुए डेटा सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी इस बैठक (All Party Meeting on Manipur Violence) में भी सांप्रदायिक एजेंडा निकालने से बाज नहीं आए. ओवैसी ने कहा, ‘देश के पीएम कहते हैं कि मुल्क में भेदभाव नहीं होता है. मणिपुर में 300 चर्च को जला दिया गया. वहां के DGP को हटा दिया गया और आप कहते हैं कि भेदभाव नहीं है. मणिपुर भेदभाव की बेहतरीन मिसाल बन चुका है. अगर यह भेदभाव नहीं है तो क्या है.’
सीएम अशोक गहलोत ने साधा निशाना
राजस्थान के सीएम और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी इस सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting on Manipur Violence) को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. सीएम गहलोत ने कहा, ‘मणिपुर में 100 लोग मारे गए और ये लोग (भाजपा) कर्नाटक में प्रचार करते रहे. चुनाव जीतने के लिए किसी ने परवाह नहीं की. जब तक आप समस्या को गंभीरता से नहीं लेंगे और प्रदेश वासियों को संदेश नहीं दोगे कि सरकार गंभीर है, तब तक स्थिति बिगड़ती जाएगी. सरकार में ऐसे लोग हैं, जिन्हें गंभीरता का एहसास नहीं है.’
तीन मई से हो रही हैं हिंसक वारदातें
मेइती को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने की मांग के विरोध में ऑल ट्राइबल्स स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएसयू) द्वारा आयोजित एक रैली के दौरान झड़प के बाद 3 मई को मणिपुर में हिंसा भड़क उठी।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्य में शांति और सद्भाव की अपील करते हुए कहा कि मणिपुर में लोगों के जीवन को तबाह करने वाली अभूतपूर्व हिंसा ने “हमारे देश की अंतरात्मा पर गहरा घाव छोड़ा है”।
राहुल गांधी ने उठाया सवाल
जातीय हिंसा और झड़पों के मद्देनजर मणिपुर में मौजूदा स्थिति पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 24 जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के समय पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह ऐसे समय में बुलाई जा रही है जब प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राज्य अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं, जिससे पता चलता है कि यह बैठक उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है।
राहुल ने ट्वीट किया, ”मणिपुर 50 दिनों से जल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री चुप रहे। सर्वदलीय बैठक हुई।” तब बुलाया गया जब प्रधानमंत्री स्वयं देश में नहीं हैं! जाहिर है, यह बैठक प्रधानमंत्री के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।”
इस बीच, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी गुरुवार को मणिपुर की स्थिति पर चुप्पी को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पिछले 53 दिनों से मणिपुर जल रहा है। पीएम मोदी ने अभी तक एक भी शब्द नहीं बोला है। मणिपुर से एक प्रतिनिधिमंडल वेणुगोपाल ने दावा किया, ”पिछले 10 दिनों से यहां हैं लेकिन पीएम उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं थे।”







