बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुरक्षा में बड़ी चूक हो गई है। दरअसल ये अचूक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई। सीएम नीतीश कुमार अपने आवास एक अणे मार्ग के पास मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। जहां एक लहरिया कट बाइकर ने उनकी सुरक्षा में सेंध लगा दी। फिलहाल लहरिया कट बाइकर गैंग के सदस्य को पकड़ कर उससे पूछताछ की जा रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुरक्षा में फिर एक बार बड़ी चूक हुई है। नीतीश कुमार सात सर्कुलर रोड पर मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। उसी समय बाइकर्स गैंग का सदस्य सीएम की सुरक्षा तोड़ते हुए उनके बीच आ गए। मुख्यमंत्री ने बचने के लिए फुटपाथ की ओर दौड़ लगा दी।
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा में चूक हुई है। एक साल पहले पटना के बख्तियारपुर में एक कार्यक्रम के दौरान युवक ने पीछे से आकर सीएम को मुक्का जड़ दिया था। वहीं, एक कार्यक्रम में जाते समय पटाखे फोड़े गए थे।
दो बाइकर्स गिरफ्तार
घटना के बाद सुरक्षाकर्मी एक्टिव हो गए। दो बाइकर्स को हिरासत में लिया गया है। पटना एसएसपी सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। बाइकर्स से पूछताछ हो रही है। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर सात सर्कुलर रोड को बंद कर चेकिंग भी की गई।
SSG और SSP की हुई बैठक
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रोजाना मॉर्निंग वॉक पर निकलते हैं। इसी दौरान यह बाइकर्स लहरिया कट स्टाइल में बाइक चलाते हुए एक-एक वहां से गुजर रहे थे। इसी दौरान घटना हुई। इस घटना के बाद सीएम हाउस पर SSG के कमांडेंट और पटना SSP की बैठक हुई है।
तीन स्तर पर होती है सीएम की सुरक्षा
1.रिंग राउंड में होते हैं CM
रिटायर्ड IPS और बिहार के पूर्व DGP अभयानंद बताते हैं कि CM की सुरक्षा के लिए एक बड़ी कड़ी काम करती है। इसमें अफसरों से लेकर कॉन्स्टेबल की बड़ी भूमिका होती है। कई क्रम में सुरक्षा का घेरा होता है। CM काे रिंग राउंड सिक्योरिटी में रखा जाता है। इसमें बिना वर्दी के सशस्त्र पुलिस पदाधिकारियों को रखा जाता है। इसमें काॅन्स्टेबल से लेकर डीएसपी रैंक के अफसर होते हैं। इनकी संख्या 8 से 10 होती है।
रिंग राउंड में CM को घेरने वालों में सभी सादे कपड़ों में होते हैं, इसलिए उनकी रैंक पता नहीं चलती है। सुरक्षा में रिंग राउंड का घेरा बनाने वालों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, वह इतने चौकन्ने होते हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।
2. स्पेशल ब्रांच
इसमें सशस्त्र जवान तैनात होते हैं। जो बिहार के आर्म्ड फोर्स और जिला पुलिस से आते हैं। इसमें जवानों की संख्या तय नहीं होती है। भीड़ और हालात को देखते हुए जवानों की संख्या बढ़ाई और घटाई जाती है।
3.सबसे बाद में होती है जिला पुलिस
तीसरे स्तर पर जिला पुलिस तैनात रहती है। जिला पुलिस तक रिंग राउंड के अंदर नहीं जाती है। रिंग राउंड में प्रवेश करने वालों की भी पहले जांच होती है। इसके लिए सुरक्षा अधिकारी से अनुमति लेनी होती है। CM की सुरक्षा में रिंग राउंड के बाद सुरक्षा का जिम्मा संबंधित जिले की पुलिस का होता है।
पूर्व डीजीपी अभयानंद बताते हैं कि जिला पुलिस के अलावा कारकेट में पायलट के साथ फोर्स होती है। सीएम की यात्रा के दौरान गाड़ी में सीएम के साथ आगे ड्राइवर की बगल की सीट पर एक सुरक्षा कर्मी होता है। जबकि सीएम की गाड़ी के ठीक पीछे रिंग राउंड का विशेष दस्ता होता है, जो सीएम की गाड़ी से उतरते ही मधुमक्खी की तरह घेर लेता है।







