कर्नाटक की नव नियुक्त सरकार ने राज्यवासियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य के सभी उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की बिजली मुफ्त दी जाएगी। इसके साथ ही जो लोग किराये के घरों में रह रहे हैं, उन्हें भी 200 यूनिट तक की बिजली के लिए बिल नहीं भरना पड़ेगा।
बेरोजगार छात्रों को बेरोजगारी भाते का ऐलान
वहीं इससे पहले शनिवार 03 जून को कर्नाटक सरकार ने एक आदेश जारी किया, जिसमें स्नातक पास और डिप्लोमाधारियों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही गई है। सरकार के द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि जो भी युवा साल 2023 में पास हुए हैं लेकिन 180 दिनों के भीतर उन्हें रोजगार नहीं मिला है, वे बेरोजगारी लाभ के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह भत्ता अधिकतम 24 महीने या उस समय तक दिया जाएगा जब तक किआवेदक को रोजगार नहीं मिल जाता है। इसके तहत स्नातकों को 3000 हजार रुपए प्रतिमाह और डिप्लोमाधारकों को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे।
इन छात्रों को नहीं मिलगा भत्ता
सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस योजना के तहत चार तरह के छात्रों को लाभ नहीं मिलेगा। वह छात्र जिन्होंने स्वरोजगार के लिए राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं से वित्तीय सहायता ली है। जिन्हें अपरेंटिस भत्ता मिल रहा है या जिन्होंने सरकारी या निजी क्षेत्र में रोजगार पाया है। इसके सतह ही जिन्होंने उच्च पाठ्यक्रमों के लिए एडमिशन लिया है।
सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार के मुफ्त बिजली देने के वादे के बीच घमासान शुरू हो गया है। सरकार ने नागरिकों को 200 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा पूरा कर दिया है। इसका लाभ किराए पर रहनेवाले लोगों को भी मिलेगा। हालांकि घमासान है कर्नाटक में बिजली की कीमतों में बढ़ोत्तरी को लेकर। जून से कर्नाटक में बिजली 2.89 रुपये प्रति यूनिट बढ़ने जा रही है। अगर कर्नाटक के लोग 200 यूनिट स्लैब से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं तो उन्हें इस महीने 2.89 रुपये प्रति यूनिट की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। यह अतिरिक्त लागत ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) है और इसमें अप्रैल से बकाया शामिल है। बिलिंग मुद्दों और समय की कमी के कारण इस जनवरी के लिए FPPCA को मार्च में लागू नहीं किया जा सका।
जून से यही 1.49 रुपये प्रति यूनिट का एफपीपीसीए लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अप्रैल और जून से 70 पैसे + 70 पैसे की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण कुल मूल्य वृद्धि, यदि कोई दी गई 200 इकाइयों को पार करता है, तो यह 2.89 रुपये प्रति यूनिट होगी।
कर्नाटक सरकार के आदेश में क्या
कर्नाटक सरकार ने सोमवार को गृह ज्योति योजना के कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। हर महीने 200 यूनिट से कम बिजली का उपयोग करने वाले सभी घरों को मुफ्त बिजली देने का वादा पूरा हुआ है। सोमवार को पूरे कर्नाटक में बिजली आपूर्ति कंपनियों (एस्कॉम) के जारी किए गए मासिक बिजली बिलों में उल्लेखनीय वृद्धि ने हजारों नागरिकों को हैरान कर दिया। जून के लिए Escoms ने उत्पन्न बिजली बिलों में खपत भार के आधार पर ‘फिक्स्ड चार्ज’ में 50 रुपये से लेकर 75 रुपये तक की तीव्र वृद्धि देखी गई है।
‘मुफ्त बिजली का वादा कर काट रहे जेब’
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिजली दरों में 2.89 रुपये प्रति यूनिट की वृद्धि करने को लेकर भी कांग्रेस सरकार की निंदा की। विरोध प्रदर्शन बेंगलुरु, चिकबल्लापुर, मैसूरु, दावणगेरे और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां परस्पर विरोधी हैं, जहां वह मुफ्त में बिजली दे रही है, वहीं दूसरी ओर उसने बिजली दरों में बढ़ोतरी कर दी है।
सिद्धारमैया ने बीजेपी पर साधा निशाना
वहीं कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने सोमवार को आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में लोगों को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली योजना का दुरुपयोग करने के लिए उकसा रही है। उन्होंने कहा, भाजपा लोगों से बिना किसी संयम के बिजली का उपयोग करने के लिए कह रही है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि योजना का दुरुपयोग न हो और लोगों के बिजली के अंधाधुंध उपयोग पर रोक लगाई जाए।
सिद्धारमैया ने कहा, हमारी सरकार ने गरीबों और मध्यम वर्ग के लाभ के लिए बिजली की मुफ्त आपूर्ति की योजना की घोषणा की है। हमने लोगों को उनके पिछले वर्ष की बिजली की खपत से 10 प्रतिशत ज्यादा उपयोग करने की अनुमति दी है। लोगों ने इस योजना को उत्सव के साथ स्वीकारा है और इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा बीजेपी लोगों को योजना का दुरुपयोग करने के लिए उकसा रही है और बिजली की अंधाधुंध खपत को प्रोत्साहित कर रही है। यह जनविरोधी है। हमें विश्वास है कि राज्य के जागरूक लोग उन्हें इस पहलू में प्रोत्साहित नहीं करेंगे।







