बीजेपी के सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे पहलवानों के समर्थन में खाप पंचायतें भी मैदान में आ गई है. गुरुवार को यूपी के मुजफ्फरनगर में महापंचायत हुई, और शुक्रवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में खाप पंचायत हुई. खाप पंचायतों ने ऐलान कर दिया कि अब वो बेटियों के सम्मान की लड़ाई लड़ेंगी, लेकिन ये लड़ाई कैसे आगे बढ़ेगी इसका कोई फैसला नहीं हुआ. किसी को इस बात की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि किसान आंदोलन के नेता पहलवानों के मान सम्मान के लिए मैदान में उतरे हैं. वो तो पहलवानों की परेशानी का फायदा उठाकर मोदी से अपना हिसाब चुकता करना चाहते हैं. खाप महापंचायत में जो लोग आए उनकी इन्टेंशन ठीक हो सकती है. उनकी सहानुभूति पहलवानों के साथ हो सकती है लेकिन ये आंदोलन किस दिशा में जाएगा, ये पंचायतों के कंट्रोल में नहीं है. पहलवानों की मजबूरी भी समझी जा सकती है. वो तो जहां से भी सपोर्ट मिलता है उसे स्वीकार करने के लिए मजबूर हैं, उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं है. ममता बनर्जी भी महिला पहलवानों के साथ खड़ी हो गईं हैं. ममता ने कोलकाता में कैंडल मार्च निकाला. पहलवानों का मसला एक तरह से एंटी मोदी मोर्चा का रूप लेता जा रहा है. यह स्थिति मुख्य आरोपी बृज भूषण शरण सिंह को सबसे ज्यादा सूट करती है. उनके लिए तो बड़ा अच्छा है कि अपने आप को विरोधियों से बचाने के चक्कर में सरकार बृज भूषण शरण सिंह के साथ खड़ी हुई दिखाई दे रही है. बृज भूषण इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं. जो आरोपी है वो सीना चौड़ा करके खड़ा है और जो पीड़िता हैं वो सपोर्ट की तलाश कर रही हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है. यह स्थिति न भारतीय़ कुश्ती के लिए अच्छी है, न ही सरकार की छवि के लिए.
एफसीआरए और कुछ गंभीर सवाल…………..
विदेशी अंशदान को लेकर भारत में बहस नई नहीं है। विदेशी धन सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और धार्मिक गतिविधियों...







