अमेरिका के दौरे पर गए राहुल गांधी ने अपने पहले ही भाषण में नरेंद्र मोदी को निशाने पर रखा। ये बयान कांग्रेस की नई कम्युनिकेशन स्ट्रैटजी की एक बानगी है, जिसमें मोदी पर सीधा हमला करना तय हुआ है।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने एनालिसिस किया। टॉप लीडरशीप का मानना था कि ‘चाय वाला’ और ‘नीच आदमी’ जैसे कमेंट्स से BJP को फायदा हुआ है। कंक्लूजन निकाला गया कि मोदी पर इस तरह के बयानों से कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हो रहा है। हालांकि, यह बयान मणिशंकर अय्यर का व्यक्तिगत बयान था, न कि कांग्रेस का।
इसके बावजूद राहुल गांधी की राय अलग थी। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी का पहले दिन से मानना था कि किसी को भी प्रधानमंत्री पर हमला करने और उनसे सवाल पूछने से संकोच नहीं करना चाहिए।
कांग्रेस ने मोदी पर हमले की नई स्ट्रैटजी क्यों बनाई?
मोदी सरकार को सत्ता में आए 9 साल हो चुके हैं। कांग्रेस को लगता है कि वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा BJP सरकार से परेशान हैं और वो यह चाहता है कि प्रधानमंत्री से सवाल पूछे जाने चाहिए। कांग्रेस ने इसी वोट बैंक को भुनाने के लिए नई स्ट्रेटेजी बनाई है।
यानी कांग्रेस अब इस नरेटिव को नहीं मानती कि प्रधानमंत्री मोदी पर पर्सनल अटैक से कांग्रेस पार्टी को ही नुकसान होगा। पिछले महीने हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में इन नरेटिव को और बल मिला।
नई स्ट्रैटजी के लिए कर्नाटक चुनाव कैसे मॉडल बना?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान 27 अप्रैल को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘PM मोदी जहरीले सांप की तरह हैं, आप सोच सकते हैं कि यह जहर है या नहीं, यदि आप इसे चाटते हैं, तो आप मारे जाएंगे।’
PM मोदी 29 अप्रैल को कर्नाटक के बीदर जिले के हुमनाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा- ‘किसी ने मेरे खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे इस तरह के अपशब्दों की सूची बनाई और मुझे भेजा। अभी तक कांग्रेस के लोग 91 बार अलग-अलग तरह से मुझे अपशब्द कह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने चौकीदार चोर है अभियान चलाया था, फिर उन्होंने कहा- मोदी चोर है, फिर उन्होंने कहा कि OBC समुदाय चोर है।’
PM मोदी ने खड़गे के बयान को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाने की कोशिश की। इसके बाद प्रियंका गांधी ने 30 अप्रैल को PM मोदी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा- ‘मोदी जी को मेरे भाई से सीखना चाहिए। मेरा भाई कहता है कि मैं देश के लिए गाली क्या, गोली भी खाने को तैयार हूं। PM लिस्ट बनवाते हैं कि उन्हें 91 बार गालियां दी गईं। इन लोगों ने मेरे परिवार को जितनी गालियां दीं, इसकी लिस्ट बनवाएं तो पूरी किताब छपवानी पड़ेगी।’
इस पूरे एपिसोड के बावजूद कांग्रेस को कर्नाटक चुनाव में मजबूत बहुमत मिला। इससे भी कांग्रेस को बल मिला और वो इसे आने वाले चुनावों में भी आजमाना चाहती है।
मोदी के खिलाफ आक्रामक स्ट्रैटजी से कांग्रेस को क्या हासिल होगा?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि कांग्रेस के अंदर ये अंतरद्वंद काफी दिनों से चल रहा था कि PM मोदी पर सीधा हमला करना चाहिए या नहीं। इस बीच दो बड़ी राजनीतिक घटनाएं हुईं…
1. 2022 में हिमाचल विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था कि आप कैंडिडेट को मत देखो, आप मेरे लिए वोट करो। जनता ने वहां पर BJP को नकार दिया। 2023 के कर्नाटक चुनाव में भी प्रतिष्ठा का मुद्दा काम नहीं आया।
2. एक बयान की वजह से राहुल गांधी को 2 साल की सजा हुई और उनकी संसद सदस्यता चली गई। सरकार ने भी कोई रियायत नहीं दी। आनन-फानन में उनकी सदस्यता निलंबित करने वाला आदेश और बंगला खाली करने का नोटिस जारी करवा दिया।
इन दोनों घटनाओं ने कांग्रेस का पर्सपेक्टिव बदला। कांग्रेस को अब लगता है जब भी राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव होता है वहां पर मोदी की छवि सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रधानमंत्री पर हमला करना ही सबसे अच्छी रणनीति होगी। यानी पीएम की इमेज को डेंट करना होगा।
इसी के बरक्स CSDS-Lokniti और मूड ऑफ द नेशन जैसे कुछ सर्वे आए हैं। इनमें भी राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ती दिख रही है। यानी राहुल और कांग्रेस को इस स्ट्रैटजी का फायदा मिल रहा है।
राहुल की बात को पहले के मुकाबले ज्यादा सुना जा रहा
कांग्रेस अब सोची समझी रणनीति के तहत मोदी पर हमला कर रही है। ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी को गुस्सा आया और वो मोदी की आलोचना करने लगे। कांग्रेस चाहती है कि राहुल अब जो भी बोल रहे हैं उसमें निरंतरता दिखाई दे।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभय दुबे बताते हैं कि इसी रणनीति के तहत राहुल अब मोदी की राजनीतिक आलोचना के साथ विदेश नीति, अर्थनीति और जिस तरह से लोकतंत्र चला रहे हैं उस स्तर पर आलोचना कर रहे हैं। राहुल की आलोचना का अब असर भी दिख रहा है।
राहुल की बात को अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग सुन रहे हैं। इसकी वजह यह है कि अब राहुल आलोचनाओं में दम नजर आता है। देखा जाए तो BJP भी राहुल का मजाक उड़ाने के लिए एक खास रणनीति के तहत ही ऐसा करती है।
राहुल गांधी अडाणी के मसले पर मोदी पर आरोप लगा रहे है। उन्हें भ्रष्ट बता रहे हैं। मोदी पलटवार करते हुए कह रहे हैं कि कांग्रेस की 80% सरकार भ्रष्ट थी। हाल ही में राजस्थान की रैली में यह बात कही है।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही कहा था। यानी दोनों पक्ष एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह बहस चल रही है। देश की जनता इसे देख रही है। कर्नाटक में हमने देखा कि जनता ने गैर BJP शक्तियों की बात मानी और BJP की बात नहीं मानी। अब आगे देखते हैं दूसरी जगह क्या होता है।







