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तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी करुणासागर की राजनीति में प्रवेश…………

UB India News by UB India News
May 8, 2023
in खास खबर, पटना, राजद
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तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी करुणासागर की राजनीति में प्रवेश…………
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बिहार की राजनीति में खाकी वर्दी का इतिहास बहुत अच्छा नहीं रहा है। अपने पुलिसिया रौब में जितना ये सफल रहे राजनीति में वह उतने ही फिसड्डी साबित हुए हैं। खासकर डीजीपी रैंक से आने वाले पुलिस पदाधिकारियों की तो और भी भद पिटती रही। हां, इनमे से कुछ जरूर सफलता की कुछ सीढियां चढ़ीं पर फिर राजनीति के उतार काल में नेपथ्य में चले गए।

बिहार निवासी और तमिलनाडु के पूर्व डीजीपी करुणा सागर ने भी राजनीत के कदमताल में शामिल हो गए हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की मौजूदगी में आरजेडी में शामिल हुए सागर की तमन्ना क्या है या किस जिम्मेदारी के साथ आरजेडी की सदस्यता ली है, इसका खुलासा धीरे धीरे होगा। हां, इतना तो तय है कि आरजेडी के A2Z समीकरण के तुष्टिकरण का एक उदाहरण जरूर बन गए हैं। आरजेडी के अपने नए समीकरण के साथ अब करुणा सागर सियासत के मैदान में अपनी नई पारी शुरू करेंगे। हालंकि, इसके पहले भी कई पुलिस पदाधिकारियों ने राजनीति में शामिल होकर राज्य की सेवा करनी चाही पर कुछ एक को छोड़ दें तो सफलता उनसे दूर रही।

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पूर्व डीजीपी डीपी ओझा
पूर्व डीजीपी डीपी ओझा की शख्सियत तब भी राजनीति से जुड़ी हुई थी जब वह पुलिस सेवा में थे। वैचारिक रूप से वह वाम दल की आइडियोलॉजी के साथ थे। उनकी पुलिसिया शख्सियत को तब काफी नाम मिला जब उन्होंने तत्कालीन राजनीत के सिरमौर लालू प्रसाद के एक नहीं सुनते मो. शहाबुद्दीन के खिलाफ मोर्चा खोला और उनके लिए जेल का दरवाजा खोला। नतीजतन लालू प्रसाद यादव से जो करीबी थी वह भी टूटी और उन्हें लालू प्रसाद का कोपभाजन बनना पड़ा। दो माह पहले ही उन्हें डीजीपी के पद से हटा दिया। उस दौर में लालू यादव रैलियों में कहा करते थे कि हमने डीपी ओझा का बोझा बांध दिया है। ओझा 1967 बैच के आईपीएस थे और 1 फरवरी 2003 को डीजीपी का पदभार ग्रहण किया था। बहरहाल, शहबुद्दीन प्रकरण से चर्चा में आए डीपी ओझा ने महत्वाकांक्षा की उड़ान की डोर थामते बेगुसराय से निर्दलीय चुनाव लड़े और बुरी तरह हारे।

पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा
पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा की लालू प्रसाद से बढ़ी अच्छी पटती थी। बाद में नीतीश कुमार के भी करीब हो गए। 2005 से 2008 तक डीजीपी रहे अवकाश ग्रहण करने के बाद राजनीति की डोर पकड़ी। सबसे पहले उन्होंने आरजेडी की सदस्यता ली। लेकिन यहां की राजनीतिक रास नहीं आई और वह कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। कांग्रेस ने उन्हें नालंदा से लोकसभा चुनाव लड़ाया भी। लेकिन वह तीसरे नंबर पर रहकर कुल 1.27 लाख वोट ही आए। यहां के बाद अब बीजेपी में हैं और नेपथ्य की राजनीति में इंतजाररत हैं।

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे
पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे की राजनीतिक यात्रा तो काफी प्रताड़ना वाली रही। एक बार तो चुनावी जंग में उतरने को लेकर वीआरएस तक ले लिया, लेकिन जब टिकट से वंचित हुए तो काफी मशक्कत के बाद फिर पुलिस सेवा में आए और डीजीपी भी बने। अवकाश प्राप्त के बाद जेडीयू की सदस्यता भी ली। मगर नीतीश कुमार से जब रेस्पॉन्स नहीं मिला तो उन्होंने अपने राजनीतिक कदम की दिशा बीजेपी की तरफ भी बदली। पर यहां भी जब तरजीह नहीं मिली तो एकदम से वैराग्य भाव आ गया। अब तो बतौर प्रवचन देकर लोगों की जिंदगी में खुशियां और उम्मीद भर रहे हैं।

हां, दिल्ली के कमिश्नर रहे निखिल कुमार को जरूर सफलता मिली। इसकी वजह भी थी कि राजनीति उन्हें विरासत में मिली। साल 2004 में वह औरंगवाद से सांसद बने। लेकिन बाद के दो लोकसभा चुनाव 2009 और 2014 वह हार गए। बाद के दिनों में वह नागालैंड और केरल के राज्यपाल जरूर बने।

पुलिस पदाधिकारी रहे ललित विजय सिंह भी राजनीति के अखाड़े में उतरे। साल 2004 में बेगुसराय से जनता दल से लड़े और बाद में जब समाजवादी नेता चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तो ललित विजय सिंह को मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार का पद भी मिला।

सुनील कुमार भी मंत्री बने
डीजीपी पद से अवकाश प्राप्त सुनील कुमार का राजनीतिक सफर ठीक ही रहा। वह रिटायरमेंट के बाद जेडीयू में शामिल हुए। और बाद में बिहार कैबिनेट में शामिल हुए। फिलहाल वह मध निषेध मंत्री हैं। इन्हें भी राजनीति विरासत में मिली। इनके भाई अनिल कुमार जेडीयू से राज्यसभा सदस्य भी रहे।

बहरहाल, एक तरह से देखें तो खाकी वर्दी का राजनीतिक सफर बहुत सफलता भरा नहीं रहा। जहां तक मसौढ़ी के आसपास रहने वाले भूमिहार जाति के करुणासागर की राजनीति पर तो अभी से टिप्पणी होनी शुरू हो गई है। बीजेपी के कई कद्दावर नेता तो यह भी कह रहे हैं कि 2024 की लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी का प्रचार करते नजर आएंगे। ऐसा इसलिए कि उन्हें टिकट तो मिलने नहीं जा रहा है। ऐसे में नाराज करुणासागर को बीजेपी के रुख करने की संभावना प्रबल हो जायेगी।

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