ADVERTISEMENT
Sunday, August 2, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

दंगो पर तब और अब की मिडिया रिपोर्टिंग………..

UB India News by UB India News
April 2, 2023
in खास खबर, मीडिया
0
दंगो पर तब और अब की मिडिया रिपोर्टिंग………..
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

आजादी के बाद बने दूसरे प्रेस कमीशन की रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि सांप्रदायिक दंगों की खबर देते वक्त ‘प्रिंट मीडिया’ संलग्न लोगों के जाति‚ धर्म या पहचान के अन्य चिह्नों को स्पष्ट न करे। इसी का असर रहा कि तब के प्रिंट और रेडियो में खबरें इसी रूप में आतीं। दंगों की रपटें ‘संपादित’ होकर कुछ इस तरह छपतीं फलां जगह दो समुदायों के बीच दंगा हो गया‚ इतने मरे इतने घायल हुए। पुलिस ने दफा १४४ लगा दी है। प्रशासन ने शांति कमेटी बना दी है। इलाके में फिलहाल शांति है……

अखबार में छपी खबर लोगों तक एक दो दिन बाद ही पहुंचती। खबर अक्सर ‘डाई’ (बिना फोटो) होती ताकि दंगाइयों के धर्म‚ जाति की ‘पहचान’ न हो और वैसी ‘पहचान’ वाले उत्तेजित न हों! बहुत दिनों तक प्रिंट में इसी तरह की रिपोटे आया करतीं। आप उनको पढते और भूल जाते कि कुछ हुआ भी है। वह एक अमूर्त और संक्षिप्त सी खबर होती। सच पता करने का काम पुलिस का होता जो गोपनीय ही रहता। रिपोर्टर भी इसी तरह की रिपोर्टें भेजते और अगर उसमें कुछ नाम आदि आ जाते तो संपादक उनको हटा देते और उनकी जगह ‘दो समुदाय’ या ‘दो समुदायों के कुछ अराजक तत्व’ छाप दिया जाता।

RELATED POSTS

क्या राजनीतिक दलों के इशारे पर जंतर-मंतर पर हुई हिंसा !

क्यों बौखलाया गया है पाकिस्तान……………….

एक नजर से देखें तो प्रेस कमीशन की ये हिदायतें उस समय के हिसाब से ‘उचित’ नजर आती हैं। अखबार वालों को लगता कि ऐसा करके वे अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका अखबार अपना काम ठीक से कर रहा है। खबर बुलेटिनों के शुरू होने के बाद भी दूरदर्शन की खबरों में इस बात का खास ख्याल रखा जाता रहा कि दंगे की रिपोर्ट ऐसी हो‚ जिसमें दंगाइयों की तस्वीरें बहुत साफ न दिखें। ऐसी खबरों को अक्सर ‘ड्राई’ (बिना फोटो) दिया जाता। तब का मीडिया समझता रहा कि खबर को संपादित करके अपने मीडिया–कर्तव्य को निभा रहा है‚ लेकिन ऐसा करने से भला दंगों की खबरें कहीं रुका करती हैंॽ कहने की जरूरत नहीं कि अपने जैसे ‘कनफुसिया प्रिय’ समाज में ऐसी खबरें अफवाह बनकर दूर–दूर तक पहंुच जाती हैं फिर ये अफवाहें ‘मिथक’ में बदल जाती हैं। अफवाह फैलाने वाले उनको अपने तरीके से बढा–चढाकर बताते हैं और घटित दंगे नये–नये ‘आख्यानों’ (नेरेटिव) का रूप ले लेते हैं जो लोगों के अवचेतन में पैठते रहते हैं। यह सच है कि प्रेस कमीशन ने आजादी के तुरंत बाद की खास स्थितियों को ध्यान में रखकर ही उक्त तरह की ‘खबर नीति’ बनाई थी जो एक समय तक कारगर रही‚ लेकिन आज के ‘रीयल टाइम’ वाले ‘लाइव मल्टी मीडिया’ के दौर में यह नीति बेकार नजर आती है। यह नीति ‘सच को छिपाने’ की नीति पर आधरित थी‚ जिसे खबर निजी चैनलों के आने और खबरों के उनके लाइव कवरेज ने बेकार कर दिया और रही कसर ‘सोशल मीडिया’ के आ जाने ने पूरी कर दी! इसीलिए आज दंगे–फसाद की कोई घटना नहीं छिपती बल्कि वह ‘लाइव लाइव’ नजर आती और ‘आर्काइव्ज’ में जाकर‚ ‘डाटा’ बनकर अमर हो जाती है। आज‚ सैकडों खबर चैनलों के कैमरे किसी भी दंगे‚ आगजनी‚ हिंसा और लूटमार को चौबीस बाई सात हिसाब से रीयल टाइम में प्रसारित करते हैं और उनकी प्रतिक्रिया को भी दिखाते बताते रहते हैं। और जब से जीवन में ‘स्मार्टफोन’ का चलन बढा है तब से हर नागरिक ‘वीडियो रिपोर्टर’ बन गया है।

आज स्मार्टफोनों की मेहरबानी से हर घटना लाखों वीडियो रूप धरण कर खबरों का नया घटाटोप बना देती है‚ जिसमें ‘न्यूज’ के साथ ‘फेक न्यूज’ भी आती है‚ लेकिन आज ‘फेक’ को पकडा भी जा सकता है! चौबीस बाई सात के समकालीन टीवी कवरेज और सोशल मीडिया ने आज हर व्यक्ति या समुदाय को एक प्रकार का नया ‘लीलाधर’ (परफार्मर) बना दिया है। वह मीडिया में दिखकर ताकत बटोरने के खेल को खेलता है और इसके लिए वह अपने पहचान के चिह्नों से अपने समुदाय को संबोधित करने वाला एक नया नायक/खलनायक बनने की कोशिश करता है। शायद इसीलिए आज हम दंगा नहीं‚ दंगों की सीरीज देखते हैं। आज की इस लाइव वीडियोबाजी का एक फायदा यह भी है अब सच किसी के छिपाए नहीं छिपता। इसीलिए वीडियो में आए दंगाई चेहरों को पहचानना और दंडित करना अब आसान हो गया है। कहने की जरूरत नहीं कि छिपाने की नीति से बहतर है घटना दिखाना और उसके कर्ताओं को भी दिखाना ता कि वे पकडे जा सकें। हमारा मानना है कि आज के लाइव मीडिया का अगर सही उपयोग किया जाए तो ऐसी घटनाओं के कर्ताओं को एक्सपोज करके उन पर अंकुश भी लगाया जा सकता है!

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे Gen-Z?

क्या राजनीतिक दलों के इशारे पर जंतर-मंतर पर हुई हिंसा !

by UB India News
August 1, 2026
0

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. पुलिस...

क्यों बौखलाया गया है पाकिस्तान……………….

क्यों बौखलाया गया है पाकिस्तान……………….

by UB India News
August 1, 2026
0

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार शाम पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने कायराना हरकत करते हुए दो गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाया....

क्या जमीन पर भी बदलेंगे हालात…………..

क्या जमीन पर भी बदलेंगे हालात…………..

by UB India News
August 1, 2026
0

पीएम नरेंद्र मोदी ने देर रात इंस्टाग्राम पर फिर से वीडियो मेसेज जारी किया. इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर पेपर...

हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं ……………..

हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं ……………..

by UB India News
August 2, 2026
0

जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में सांसद पप्पू यादव के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत सूर्य मैथिल नाम...

रूस के बड़े हमले से दहल उठी यूक्रेन की राजधानी कीव …………

रूस के बड़े हमले से दहल उठी यूक्रेन की राजधानी कीव …………

by UB India News
August 1, 2026
0

रूस ने यूक्रेन राजधानी कीव को निशाना बनाकर रातभर मिसाइलों की बौछार की और ड्रोन से भी हमले किए। इन...

Next Post
भारत–रूस सुरक्षा संधि की ओर!

भारत–रूस सुरक्षा संधि की ओर!

नजीर बनतीं देश की बेटियां….

नजीर बनतीं देश की बेटियां....

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend