प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बजट–उपरांत वेबिनार में स्वास्थ्य के मामले में सुधार का जो संकल्प जताया है‚ उसके जरूरी होने पर जितना जोर दें‚ कम है। देश की आबादी के विशाल बहुमत के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी सामान्यतः पहुंच से परे ही बनी हुई हैं। इस मामले में वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए राजधानी में एम्स जैसे संस्थान का एक चक्कर लगाना ही काफी होगा। यहां कॉरिडोरों में ही कंधे छिलने वाली भीड़ दिखाई नहीं देगी‚ बल्कि अस्पतालों के बाहर फुटपाथ पर भी ऐसे परिवारों की भीड़ मिल जाएगी जो देश के विभिन्न हिस्सों से उपचार की उम्मीद में अपने गंभीर रूप से अस्वस्थ परिजनों को लाए हैं और धूप‚ बारिश‚ सर्दी में फुटपाथ पर ही रहकर उनका उपचार करा रहे हैं‚ या उपचार के लिए उनकी पारी का इंतजार ही कर रहे हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति देश के ऐसे सभी प्रमुख सार्वजनिक चिकित्सा संस्थानों की है‚ जो वाकई काम कर रहे हैं। पिछली सदी के आखिरी दशक से लगाकर‚ जीडीपी की ऊँची वृद्धि दर के पूरे तीन दशकों के बाद भी‚ इस तस्वीर में शायद ही कोई बदलाव आया है। उल्टे स्वास्थ्य और चिकित्सा तक पहुंच के मामले में असमानता और भी तेजी से बढ़ी है‚ जो देश में तेजी से बढ़ती असमानता को ही दिखाता है। स्वास्थ्य के मामले में यह असमानता और भी तेजी से बढ़ रही है क्योंकि इस दौरान‚ सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से हाथ खींचे गए हैं और मुख्यतः निजी‚ कॉरपोरेट स्वास्थ्य सुविधाओं को आगे बढ़ाया गया है। नतीजा यह है कि स्वास्थ्य के मामले में इतनी तरक्की तो जरूर हुई है कि साधन संपन्नों को अब उपचार के लिए अमेरिका आदि जाने की जरूरत नहीं रही है‚ उल्टे हमारे यहां स्वास्थ्य पर्यटन का टर्नओवर लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है; लेकिन‚ यह सब स्वास्थ्य तक गरीबों की पहुंच बढ़ाने की बजाय कम ही कर रहा है। दुर्भाग्य से अब भी स्वास्थ्य पर सरकार का ध्यान भले लग रहा हो‚ आवश्यक धन नहीं लग रहा है। ताजा बजट में भी स्वास्थ्य पर कुल ८९‚१५५ करोड़ रुपये के व्यय का ही प्रस्ताव किया गया है‚ जो मुद्रास्फीति को हिसाब में लें तो पिछले साल से गिरावट ही दिखाता है। इस हिसाब से देखें तो २०१७ की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के स्वास्थ्य पर खर्च को २०२५ तक बढ़ाकर जीडीपी का २.५ करने के लक्ष्य का हासिल हो पाना तक मुश्किल है। स्वास्थ्य पर ध्यान के साथ धन भी लगेगा‚ तभी तो भारत स्वस्थ बनेगा।
पीएम मोदी ने गांधी-नेहरू को किया याद,खादी को लेकर कह दी बड़ी बात………………
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने...







