सरकार ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं के लिए नई राष्ट्रीय वाणिज्य नीति लाने पर काम कर रही है। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग के संयुक्त सचिव संजीव ने सोमवार को ई–वाणिज्य एवं रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं–एमएमसीजी–विषयक सम्मेलन में यह बात कही। ई–वाणिज्य और खुदरा व्यापारियों के बीच तालमेल का अभाव काफी समय से महसूस किया जा रहा है। कोरोना महामारी के दिनों और उसके उपरांत तो यह कमी बड़़ी शिद्दत से महसूस की गई जब तमाम कारोबारी गतिविधियां शिथिल पड़़ गई थीं। ऑनलाइन खरीदारी का क्रेज उन दिनों तेजी से बढ़ा और खुदरा व्यापारियों की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई। उन्होंने सरकार के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया था। असल बात तो यह है कि ऑनलाइन और खुदरा व्यापारियों की समस्याएं काफी पहले की हैं‚ कोरोना महामारी से पहले से ही ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने से खुदरा कारोबारियों में अपने भविष्य को लेकर चिंता व्याप गई थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि ऐसी नीति लाई जाए जिससे कारोबार के इन दोनों स्वरूपों के बीच तालमेल बने। दोनों क्षेत्र एक दूसरे को खतरे के रूप में न देखें। खुदरा व्यापारियों में अपने भविष्य को लेकर जो चिंता है‚ उसका निराकरण किया जाए। इसके लिए सरकार आकर्षक बीमा योजना लाने की तैयारी में भी है‚ ताकि खुदरा कारोबारियों को राहत मिल सके। भविष्य को लेकर उनकी चिंता भी छटे। गौरतलब है कि भारत का खुदरा व्यापार क्षेत्र काफी बड़़ी संख्या में रोजगार सृजन करता है। एक आकलन के मुताबिक‚ २०३२ तक यह क्षेत्र दो लाख करोड़़ ड़ॉलर का आंकड़़ा छू लेगा। न केवल इतना‚ बल्कि २०३२ तक इस क्षेत्र में असंगठित क्षेत्र का बड़़ा हिस्सा–करीब ८७ प्रतिशत–समाहित होगा। अभी यह क्षेत्र १० प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रहा है। यह वृद्धि दर दुनिया के किसी भी खुदरा बाजार में सबसे ज्यादा है। अलबत्ता‚ यह क्षेत्र खासा बिखरा हुआ है। यह क्षेत्र आधुनिक बुनियादी ढांचे के अभाव और प्रौद्योगिकी के अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल की समस्याओं का भी सामना कर रहा है। ऑनलाइन खरीदारी के प्रति उपभोक्ताओं के बढ़ते क्रेज ने भी इस क्षेत्र की समस्याएं बढ़ा दी हैं। सरकार चाहती है कि दोनों क्षेत्र एक दूसरे के बढते कारोबार से चिंतित होने की बजाय आपसी तालमेल से परस्पर पूरक की स्थिति में आ जाएं। सरकार की ईज ऑफ डू़इग बिजनेस नीति के लिहाज से भी यह जरूरी है।
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