त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार को समाप्त हो गया। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 16 फरवरी को होगा और मतों की गिनती दो मार्च को होगी। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर 60 में से 36 सीटें हासिल की थी। बीजेपी ने आईपीएफटी के साथ गठबंधन में 44 सीटों के साथ सरकार बनाई थी। आईपीएफटी को 8 सीटें मिली थीं। गठबंधन को मिली 44 सीटों में से 33 सीटों पर 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। इस बार 16 फरवरी को राज्य में होने जा रहे विधानसभा चुनाव बहुकोणीय मुकाबले के चलते बहुत ही रोचक हो गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी गित्ते किरणकुमार दिनकरराव ने जानकारी देते हुए बताया कि विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान कानून व्यवस्था से जुड़े किसी बड़े मुद्दे के बिना मंगलवार शाम चार बजे समाप्त हो गया। चुनाव तंत्र 16 फरवरी को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 3,328 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें से 1,100 संवेदनशील हैं और 28 को अति संवेदनशील के रूप में वर्गीकृत किया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी गीते किरणकुमार दिनकरराव ने कहा कि 16 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में 31 महिलाओं सहित कुल 259 उम्मीदवार मैदान में हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में 24 महिलाओं सहित 297 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।
महीने भर के अभियान के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा और एक दर्जन केंद्रीय मंत्रियों ने भाजपा के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया। बीजेपी ने मतदाताओं को लुभाने के लिए ‘विजय संकल्प यात्रा’, रैलियों और रोड शो का आयोजन किया। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, वरिष्ठ नेता प्रकाश करात, बृंदा करात और मोहम्मद सलीम, पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार तथा पार्टी के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी ने पार्टी के पक्ष में प्रचार किया। कांग्रेस नेताओं-अधीर चौधरी, दीपा दासमुंशी और एआईसीसी महासचिव अजय कुमार ने अपनी पार्टी के लिए प्रचार किया, लेकिन न तो राहुल गांधी और न ही प्रियंका गांधी वाद्रा ने चुनाव प्रचार के लिए राज्य का दौरा किया। पूर्ववर्ती राजपरिवार के सदस्य प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने अकेले ही अपनी टिपरा मोथा पार्टी के लिए प्रचार किया।
कुल 259 उम्मीदवार चुनावी दौड़ में हैं, जिनमें 20 महिलाएं
इस बार विधानसभा चुनाव में कुल 259 उम्मीदवार चुनावी दौड़ में हैं, जिनमें 20 महिलाएं हैं। बीजेपी 55 विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी ने छह सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एक सीट पर दोस्ताना मुकाबला होगा। माकपा 47 सीट पर चुनाव लड़ रही है और इसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस 13 सीट पर चुनाव लड़ रही है। तृणमूल कांग्रेस ने 28 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं और 58 निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी ने सबसे अधिक 12 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में टिपरा मोथा राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है। पार्टी के अध्यक्ष बिजॉय कुमार हरंगखाल ने इसकी जानकारी दी। प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अपनी पैठ बना चुका क्षेत्रीय दल टिपरा मोथा विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में उस दल या गठजोड़ को समर्थन देने के लिये तैयार है। जो भी अलग आदिवासी राज्य बनाने की टिपरा मोथा की मांग का लिखित रूप से और सदन के पटल पर समर्थन करेगा, उसे पार्टी समर्थन कर सकती है।
हरंगखाल ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने गुवाहाटी में चुनाव पूर्व गठबंधन की संभावना पर बैठक की थी, जहां असम के मुख्यमंत्री और भाजपा के दो अन्य नेताओं के साथ उनकी मुलाकात हुयी लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला। उग्रवादियों के मुखिया रह चुके हरंगखाल ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘ऐसा हो सकता है कि हम राज्य में सबसे बड़ी पार्टी हों और चुनाव के बाद के परिदृश्य में, हम (सरकार के गठन में सक्षम किसी भी दल या गठबंधन को) बाहर से समर्थन देने को तैयार हैं, लेकिन एक नये राज्य के निर्माण के लिये आपको लिखित तौर पर और सदन में सहमत होना होगा।’
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उन्होंने कहा, ‘अगर वे (दूसरे दल) सहमत नहीं होते हैं, हम आगे नहीं बढ़ेंगे।’ देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ शांति समझौते पर दस्तखत करने वाले वरिष्ठ आदिवासी नेता ने इंडीजिनियस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ ट्विपरा की स्थापना की थी, जिसका दो साल पहले टिपरा मोथा में विलय हो गया। टिपरा मोथा प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व शाही परिवार के वंशज प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के साथ रणनीति पर चर्चा की गई थी।
उन्होंने कहा कि अगर संवैधानिक गतिरोध पैदा होता है और कोई पार्टी या गठबंधन सरकार के गठन में नाकाम रहता है तो हम राज्यपाल से संपर्क कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे, (बावजूद इसके कि) यह जानते हुये भी कि हो सकता है हम सरकार नहीं चला पाएं क्योंकि वे (दूसरे दल) हमारे खिलाफ एकजुट हो सकते हैं ।’ त्रिपुरा में साठ सदस्यीय विधानसभा के लिये कल 16 फरवरी को मतदान होगा। इसमें से 20 सीट आरक्षित हैं।







