राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का समापन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जो वक्तव्य दिया वह उनकी वक्तृत्वता‚ वाग्मिता और राष्ट्रीय समस्याओं को लेकर उनकी समझदारी का उत्कृष्ट उदाहरण था। इस ऐतिहासिक भाषण के दौरान भी उनकी शैली वही थी जो उनके सार्वजनिक भाषणों में होती है। उनसे पहले राहुल गांधी ने गौतम अड़ाणी के संदर्भ से प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर लगाए थे और एक के बाद एक ऐसी घटनाओं का उल्लेख किया था‚ जो प्रधानमंत्री मोदी और गौतम अड़ाणी के बीच किसी गहरी दुरभिसंधि की ओर संकेत करती थी। राहुल ने अपने भाषण में उन पर गंभीर आरोप लगाए और अपनी समझ से उन पर गहरे व्यक्तिक वार किए। भले ही राहुल ने अपने किसी भी आरोप की साक्ष्यगत पुष्टि न की हो‚ लेकिन आरोप प्रवाहमय भाषा में बहुत ही ओज से लगाए गए थे। समूचे विपक्ष को लगा कि राहुल ने मोदी को धराशायी कर दिया है और सरकार को ऐसे कठघरे में खड़़ा कर दिया है जिसमें से बाहर निकलना उसके लिए मुश्किल हो जाए। नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने तो यहां तक कह दिया कि राहुल ने पप्पू बनाने वालों को पप्पू बना दिया है। लेकिन जब मोदी ने अपना भाषण शुरू किया तो सबको अपेक्षा थी कि वह राहुल और अड़ाणी पर अपना पक्ष रखेंगे और राहुल के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देंगे लेकिन मोदी ने जो किया वह चौंकाने वाला था। मोदी पर एक व्यक्ति के तौर पर आरोप लगाए गए थे और मोदी ने एक व्यक्ति के तौर पर ही स्वयं को खड़़ा किया‚ आरोपों को पूरी तरह बकवास सिद्ध किया तथा अपने शासनकाल की अपनी उपलब्धियों को सिलसिलेवार गिनाकर‚ जनता के अपार समर्थन को अपनी ढाल बताकर स्वयं को एक विराट व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। मोदी ने जब अपना भाषण समाप्त किया तो समूचा विपक्ष हतप्रभ था। हैरान था कि यह हुआ तो क्या हुआ। मोदी ने उन्हें इस कदर छोटा कर दिया कि विपक्ष की बात का जवाब देना भी उन्होंने उचित नहीं समझा। मोदी अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस और राहुल की बखिया उधेड़़ते रहे लेकिन उन्होंने न राहुल का नाम लिया और न अड़ाणी का नाम लिया। मोदी ने अपने भाषण से विपक्ष को एकदम निराश कर दिया। लेकिन अब देखना यह है कि विपक्ष अड़ाणी और मोदी की साठगांठ के मुर्दा हुए आरोप को कहां तक ढो पाएगा।
‘एथेनॉल पर झूठ फैलाया जा रहा है………………
देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन (Ethanol Blended Fuel) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग...







