नये साल में दिल्ली में हुई दरिंदगी से पूरा देश खौफमें है। हादसे के बाद दिल्ली पुलिस पर जांच की अहम जिम्मेदारी पड़ गई है। इस मामले में सही दिशा में जांच ही आरोपियों को सजा दिलवा पाएगी। यदि पुलिस की जांच में कोई भी कोताही बरती गई तो अपराधी छूट सकते हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार यह हादसा केवल एक दुर्घटना का है जो कार चालकों की लापरवाही के कारण हुआ‚ परंतु कानून के जानकारों के अनुसार जिस तरह दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच में कोताही बरत रही है उससे ऐसा प्रतीत होता है कि या तो दिल्ली पुलिस के अधिकारी मौजूदा तथ्यों की अनदेखी कर रहे हैं या उन पर किसी तरह का दबाव है। जिस तरह इस मामले की एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा ३०४‚ ३०४ए‚ २७९ और १२०–बी‚ दर्ज की गई है उससे तो यह लगता है कि दिल्ली पुलिस इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही।
देश भर से ये सवाल उठ रहे हैं कि इस मामले में धारा ३०२ व अन्य धाराएं क्यों नहीं लगाई गईॽ भारतीय दंड संहिता की धारा ३०२ और ३०४ में अंतर देखा जाए तो वो है हत्या करने का इरादा या इस बात का ज्ञान होना कि आरोपी के ऐसे कृत्य से पीडि़त की हत्या भी हो सकती है। धारा ३०४ के तहत यदि आरोपी को इस बात का ज्ञान न हो या उसके पास हत्या का कोई इरादा न हो तो उस आरोपी पर धारा ३०४ के तहत ही मामला दर्ज होता है। इस मामले में इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि आरोपी इतने नासमझ थे कि पीडि़ता को १२ किलोमीटर तक घसीटते रहे। उन्होंने यह सोचा ही नहीं कि ऐसा करने से उसकी मौत भी हो सकती है। अब यदि इरादे की बात करें‚ तो जिस तरह आरोपी पीडि़ता के शव का गाड़ी से अलग होते ही घटनास्थल से भाग गए‚ इस बात की पुष्टि करता है कि उनका इरादा क्या था। यदि इरादा हत्या का नहीं था तो स्कूटर की गाड़ी से टक्कर होने के बाद वे तुरंत वहां से भाग सकते थे। ऐसे में शायद पीडि़ता जीवित होती। आरोपियों पर केवल ‘हिट एंड रन’ का केस बनता‚ जिसे ‘दुर्घटना’ कहा जा सकता था। पर यहां ऐसा नहीं हुआ। इसलिए कानून के जानकारों के अनुसार इस मामले में पुलिस को धारा ३०२ व अन्य धाराओं को भी जोड़ लेना चाहिए। कोर्ट में हत्या को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को इस मामले में या तो सांयोगिक साक्ष्य या कोई चश्मदीद गवाह पेश करना होगा। गौरतलब है कि दीपक दहिया नाम के एक व्यक्ति ने खुद को इस मामले का चश्मदीद बताते हुए पुलिस को इस मामले की सूचना दी। पुलिस को इस बात को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि दीपक कोर्ट में गवाही जरूर दे। यदि दिल्ली पुलिस अपनी साख को बचाना चाहती है तो उसे अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत मामला बनाना होगा जो कोर्ट में टिक सके। पीडि़ता के पोस्टमॉर्टम से पहले ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने मीडिया में बयान दिया कि यह मामला ‘हत्या’ का नहीं बल्कि ‘दुर्घटना’ का है। इसके साथ ही बलात्कार से भी इनकार किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार‚ जिस तरह दिल्ली पुलिस के डीसीपी हरिंदर सिंह ने जल्दबाजी में इस मामले पर मीडिया से बातचीत की है वो सरकारी आचरण व अनुशासन नियमों के अनुसार दंडनीय है। बिना पोस्टमॉर्टम के बयान देना एकतरफा लगता है और मामले की जांच को गलत दिशा में ले जा सकता है। ऐसे मामलों में सही ढंग से की गई शुरुआती जांच ही मामले की सच्चाई उजागर करती है। यदि शुरु आती जांच में ही कोताही बरती जाए तो सच उजागर कैसे होगाॽ मिसाल के तौर पर एक तथ्य यह भी सामने आया है कि स्कूटर पर पीडि़ता के साथ एक अन्य लड़की भी थी। दुर्घटना होने पर उसे भी मामूली चोट आई और वो घटनास्थल से घर चली गई। ये बात गले नहीं उतरती। ये लड़की मीडिया में ऐसे बयान दे रही है जिसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम से नहीं हो रही। या तो पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट झूठी है या वो लड़की झूठ बोल रही है। ऐसे कई पहलू हैं जिन पर दिल्ली पुलिस को गंभीरता से जांच करनी चाहिए। इस मामले के चश्मदीद दीपक दहिया द्वारा २० बार पीसीआर को फोन करने पर भी पुलिस द्वारा फुर्ती नहीं दिखाई गई। इसके पीछे क्या कारण थाॽ
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच क्यों नहीं हुईॽ पांचों आरोपी के अनुसार वे दिल्ली से सटे मुरथल से आ रहे थे‚ क्या किसी भी टोल से इस बात की पुष्टि हुई हैॽ महिला अपराध व अन्य संगीन अपराधों की जांच में कोताही को लेकर भारतीय दंड संहिता में धारा १६६–ए को जोड़ा गया था। इस धारा के अनुसार‚ यदि कोई पुलिस अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी किसी मामले की जांच को ऐसे ढंग से करेगा‚ जिसका जांच पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है‚ तो उस अधिकारी को इस धारा के तहत ६ महीने की सजा हो सकती है। क्या दिल्ली पुलिस इस दिशा में कार्रवाई करेगीॽ कंट्रोल रूम में २० बार फोन करने के बावजूद फुर्ती नहीं दिखाना क्या इसके पीछे दिल्ली पुलिस की पीसीआर व्यवस्था में हाल ही में हुए बदलाव‚ संसाधन व पुलिस बल की कमी कारण हैंॽ नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे कई और सवाल हैं‚ जिनका जवाब पुलिस और सरकार को देना होगा।







