लोककतंत्र की अवधारणा को संसद ने संस्थागत स्वरूप दिया और इसे बड़ी स्वीकृति भी मिली। यह स्वीकार्यता आधुनिक लोकतंत्र का यशस्वी सफरनामा है पर इस स्वरूप और सफर को बदलते दौर के विकासवादी तकाजों के बीच दिलचस्प रूप से बदलते हुए देखा–समझा जा सकता है। इस लिहाज से हालिया वर्षों के घटनाक्रम को देखना दिलचस्प होगा। इस लिहाज से पहली अहम तारीख है एक जुलाई‚ २०१७। इस दिन गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का तोहफा देश को देने के लिए ऐतिहासिक रूप से आधी रात को पार्लियामेंट का ज्वाइंट सेशन बुलाया गया। तब इसकी बड़ी तारीफ हुई और जनता के बीच आम राय बनी कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विपक्ष को भी साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ रही है। महिलाओं के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र आयोजित कर प्रदेश की विधानसभा ने पक्ष–विपक्ष की एकजुट राय से उनकी सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़कर कीर्तिमान रच दिया था। अब वही विधानसभा एक बार फिर वन ट्रिलियन इकोनॉमी को लेकर विशेष सत्र का आयोजन करने जा रही है। अभी बता पाना मुश्किल है कि इसके परिणाम क्या होंगे‚ लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि किसी भी राज्य में सुशासन की व्यवस्था का यह स्वरूप उसके आर्थिक–सामाजिक विकास के नये दौर के आगाज का ऐलान करता है। मुख्यमंत्री के तौर पर कई मिथक तोड़ चुके योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री मोदी की तरह ही नये तौर–तरीके आजमाने से कभी पीछे नहीं हटने के लिए जाना जाता है। उनके इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि प्रदेश विधानमंडल की कार्यवाही पूरे देश में नजीर बनती जा रही है। जानकारी के मुताबिक वन ट्रिलियन इकोनॉमी को लेकर ३६ से ४८ घंटे का विशेष सत्र अक्टूबर–नवम्बर में बुलाया जा सकता है। सत्र में पूरा ध्यान प्रदेश को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने संबंधित योजनाओं की चर्चाओं पर दिया जाएगा। इस दौरान पक्ष–विपक्ष यानी सभी सदस्य अपनी बात रखेंगे। किसी खास योजना को लेकर यह अपनी तरह का पहला विशेष सत्र होगा। इस सत्र की वीडियो रिकार्डिंग और दस्तावेज को देश की सभी विधानसभाओं में भेजा जाएगा। इसे सभी जगह संरक्षित भी किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ी तक इस संदेश को प्रसारित किया जा सके।
उत्तर प्रदेश में लगातार इस तरह के प्रयासों से एक तरफ लोकतंत्र को मजबूत बनाने और जनता की बातों को सदन में रखने की परंपरा सुदृढ़ हो रही है‚ वहीं देश की सबसे ज्यादा युवा आबादी वाले प्रदेश की देश की अर्थव्यवस्था में योगदान की प्रतिबद्धता भी नजर आ रही है। यह अन्य राज्यों के लिए नजीर है। उत्तर प्रदेश ने बीते पांच–छह सालों में सुशासन का बेहतर मॉडल पेश किया है। इसमें अपराध पर नकेल के अलावा अर्थव्यवस्था को मजबूती देने संबंधी कार्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिस ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने के लिए पूर्ववर्ती सरकारें जूझती रहीं‚ योगी सरकार ने एक जिला‚ एक उत्पाद योजना के तहत उसे मजबूती दी है। योजना इतनी सफल रही कि बाद में इसे केंद्र सरकार ने भी अपनाया और देशभर में इसे लागू किया। जानकारों की राय है कि दिसम्बर से भारत की मेजबानी में शुरू होने वाले जी–२० सम्मेलन का सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश को ही होने वाला है। पर्यटन से लेकर निवेश तक‚ कई देशों ने प्रदेश का रुख किया है। नवीकरणीय ऊर्जा‚ चिकित्सा शिक्षा‚ अपैरल एंड टेक्सटाइल‚ एग्रो एंड फूड़ प्रोसेसिंग‚ लेदर फुटिवयर में निवेश के लिए यूएई तो आईटी इलेक्ट्रॉनिक्स‚ एग्रो एंड फूड़ प्रोसेसिंग‚ डिफेंस एंड एयरोस्पेस‚ फार्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाइस‚ रिटेल‚ ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स‚ एनर्जी‚ वेंचर कैपिटलिस्ट के लिए अमेरिका‚ कनाडा और ब्राजील जैसे देशों ने निवेश की इच्छा जताई है। ब्रिटेन‚ फ़्रांसस व नीदरलैंड़ ऊर्जा‚ इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग‚ ग्रीन हाउस टेक्नोलॉजी‚ इंफ्रास्ट्रक्चर‚ एग्रो एंड फूड़ प्रोसेसिंग‚ टेक्सटाइल‚ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी‚ कृषि संयंत्र‚ जल प्रबंधन तो थाईलैंड़‚ जापान और दक्षिण कोरिया लॉजिस्टिक्स‚ रीटेल‚ केमिकल्स‚ पर्यटन‚ कृषि संयंत्र‚ आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स‚ इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में पैसा लगाने के लिए उप्र आ रहे हैं।
इससे साबित हो रहा है कि वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनने के यूपी के सपने अब सच होने की ओर अग्रसर हैं। प्रदेश सरकार ने चहुंमुखी विकास के जो कार्य किए हैं‚ डिफेंस एंड एयरोस्पेस‚ एनर्जी‚ ऑटोमोबाइल आदि क्षेत्रों में निवेश के लिए रूस ने दिलचस्पी दिखाई है। स्वीडन‚ बेल्जियम‚ सिंगापुर‚ ऑस्ट्रेलिया‚ मॉरीशस व दक्षिण अमेरिका जैसे देश भी उप्र में पैसा लगाने को तैयार हैं। ऐसे में एक बेहतर नीति बनाना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रदेश सरकार इस सोच के साथ भी आगे बढ़ रही है कि विकास के लिए स्थापित होने वाले मानक सर्वसमावेशी और सर्वस्पर्शी हों। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने विकास की योजना बनाने में विपक्ष की राय को अहमियत दी है। प्रदेश को वन ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने की नीतियों पर चर्चा के लिए विधानसभा के विशेष सत्र का आयोजन सराहनीय पहल कहा जा सकता है‚ जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय पहल है।




