अगले 25 साल में भारत 25 हजार अरब ड़ॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह आकलन लगाया राष्ट्रीय अवसंरचना वित्त पोषण एवं विकास बैंक (एनएबीएफआईड़ी–नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड़ ड़वलपमेंट) के चेयरमैन केवी कामत ने। देश में दीर्घकालीन बुनियादी ढांचे के वित्त पोषण को समर्थन देने और उसके विकास के लिए पिछले साल ही सरकार ने एनएबीएफआईड़ी का गठन किया था। एनएबीएफआईड़ी से संबंधित जरूरी नीतियों और रूपरेखा से जुड़े़ कार्य पूर किए जा चुके हैं‚ और संस्थान ने ऋण मुहैया कराना आरंभ कर दिया है। कामत ने मंगलवार को मॉनिगस्टार निवेश सम्मेलन ने अपना आकलन इस आधार पर जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था ८ से १० प्रतिशत की सालाना दर से आगे बढ़ रही है। इसलिए २५ साल में अर्थव्यवस्था का आकार २५ हजार अरब ड़ॉलर से ज्यादा होने में कोई मुश्किल नहीं है। अर्थव्यवस्था आसानी से इस स्तर पर जा पहंुचेगी। अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को लेकर अलग–अलग आंकड़े़ सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी भी आकलन को लेकर हालांकि दावा तो नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना पक्का है कि आंकड़़ों में ज्यादा अंतर नहीं है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने चालू वित्त वर्ष में ७ प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान जताया है। आर्थिक समीक्षा में भी २०२२–२३ के दौरान वृद्धि दर ८–८.५ प्रतिशत रहने की बात कही गई थी। दरअसल‚ भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारक मजबूत हैं‚ और आर्थिक रफ्तार में जीवंतता है। वह भी तब जब कोरोना महामारी के दुष्प्रभावों से पार पाने के साथ ही अर्थव्यवस्था पर रूस–यूक्रेन युद्ध के कारण पड़़ने वाली प्रभाव भी झटका देने वाले हैं। महामारी ने छोटे उद्यमों और असंगठित क्षेत्र पर खासा विपरीत प्रभाव ड़ाला जिसके कारण लोगों के रोजगार छिने। लेकिन एक किस्म का आत्मविश्वास और माकूल हालात अर्थव्यवस्था का संबल बने रहे। सरकार वित्तीय समावेशन से वित्तीय सशक्तिकरण पर केंद्रित कर रही है। कहना यह कि समावेशीकरण की प्रक्रिया में तेजी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ेगी। गौरतलब है कि समावेश में नवाचार भारत का मंत्र रहा है। जैम त्रयी सार्वजनिक वितरण में क्रांति ला दी है। डि़जिटल भुगतान का चलन बढ़ा है। बड़़ी आबादी को बैंकिंग की परिधि में लाकर भारत ने अजूबा ही साकार कर दिया है। आने वाला समय वित्तीय समावेशन का होगा जिससे अर्थव्यवस्था में स्थितियां और माकूल होंगी।
क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इससे...







