जदयू और भाजपा के बीच चल रहे द्वंद के बीच अब जेडीयू को बीजेपी ने बड़ा झटका दिया है. मणिपुर में जदयू के पांच विधायक शुक्रवार को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गये. जिससे पार्टी में खलबली मची है. जदयू बिहार के बाद मणिपुर में भी भाजपा का साथ छोड़ने वाली थी लेकिन उससे ठीक पहले बीजेपी ने जेडीयू के अंदर बड़ी सर्जरी कर दी. जिससे जदयू की ही मुश्किलें बढ़ गयी.
मणिपुर में जदयू के पांच विधायक भाजपा में शामिल
मणिपुर में जदयू के पांच विधायक शुक्रवार को सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गये. मणिपुर विधानसभा के सचिव के मेघजीत सिंह द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि अध्यक्ष ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत जदयू के पांच विधायकों के भाजपा में विलय को स्वीकार करते हुए प्रसन्नता जतायी है. जदयू ने इस साल मार्च में विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें से छह ने जीत दर्ज की थी.
सरकार से अलग होने की तैयारी में थी जदयू
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर में जदयू कुछ अलग ही तैयारी कर रही थी. एनडीए का दामन छोड़ने के बाद जदयू अब मणिपुर में भी भाजपा से अलग होने की तैयारी में थी. पूर्वोत्तर राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल जदयू सरकार से समर्थन वापस लेने की तैयारी कर रही थी. मीडिया रिपोर्ट में किये गये जिक्र के अनुसार, मणिपुर जदयू के अध्यक्ष ने इसके संकेत भी दे दिये थे. पटना में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में विधायकों की आलाकमान से मुलाकात की भी तैयारी चल रही थी.
मणिपुर का सियासी समीकरण
जदयू मणिपुर में जहां भाजपा से अलग होकर सरकार में दिये अपना समर्थन वापस लेने की तैयारी में थी वहीं शुक्रवार को बीजेपी ने बड़ी सर्जरी करते हुए जदयू के पांच विधायकों को अपनी पार्टी में मिला लिया. मणिपुर में भाजपा के पास जदयू समेत 55 विधायकों का समर्थन था. जदयू के 6 विधायक इसमें शामिल थे. जेडीयू अगर साथ छोड़ती तो भाजपा के पास कुल 49 विधायकों का समर्थन बचता. लेकिन अब जदयू के पांच विधायक मिलाने से जदयू के अलग होने पर भी 54 विधायक बचेंगे. जिनमें 32 भाजपा के विधायक हैं.
हाल में ही मणिपुर में राज्य पार्टी का मिला था दर्जा
मणिपुर में राज्य पार्टी का दर्जा मिलने की खुशी एक महीने के अंदर में फीकी पड़ गयी और जदयू मणिपुर में अब एक विधायक वाली पार्टी बनकर रह गयी है. लोकसभा व विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए निर्वाचन आयोग ने इलेक्शन सिंबल्स आदेश के प्रावधानों के तहत जदयू को ये दर्जा दिया था.
राष्ट्रीय पार्टी बनने की तैयारी में जदयू
जदयू को चार राज्यों में राज्य पार्टी का दर्जा मिलते ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी इस ओर तैयारी को प्राथमिकता बताते हुए आगे की बात अक्सर करते आए हैं. लेकिन भाजपा लगातार जदयू को डैमेज करती जा रही है. इस ओर जदयू को अब विशेष तौर पर ध्यान देने की जरुरत है.
अरुणाचल प्रदेश में भी जदयू के सभी विधायक भाजपा ने तोड़े
बीजेपी ने मणिपुर से पहले अरुणाचल प्रदेश में भी जदयू खेमे में बड़ी सेंधमारी की थी. 2019 में अरुणाचल विधानसभा चुनाव में जदयू के सात प्रत्याशी जीते थे, जिनमें से छह पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके थे. वहीं पिछले 24 अगस्त को बाकी बचे एकमात्र जदयू विधायक को भी भाजपा ने अपने खेमे में मिला लिया था. जदयू के लिए अब ये बड़ी परेशानी बन चुकी है कि एक तरफ जहां वो बिहार से बाहर अन्य राज्यों में पांव पसारने में जुटी है वहीं भाजपा लगातार उसमें सेंधमारी करती जा रही है. जदयू को राज्यों में संगठन को मजबूती देना होगा.







