रक्षाक्षेत्र में आत्मनिर्भरता के उदाहरण देश के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ का जलावतरण भारत के लिए अपार गौरव की बात है। इसके जलावतरण ने भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल कर दिया है‚ जो अपने देश में ही ऐसे विशाल युद्धपोतों के निर्माण की क्षमता रखते हैं। अभी तक यह क्षमता सिर्फ अमेरिका‚ रूस‚ फ़्रांस‚ ब्रिटेन और चीन के पास थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कोचीन शिपयार्ड़ लिमिटेड़ (सीएसएल) में इस स्वदेश निर्मित अति विशाल विमानवाहक पोत को नौसेना के बेड़़े में शामिल किया। इसका नाम नौसेना के एक पूर्व पोत ‘विक्रांत’ के नाम पर रखा गया है‚ जिसने १९७१ के भारत–पाकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभायी थी। कुल २६२ मीटर लंबा तथा ६२ मीटर चौड़़ा यह पोत ७५०० समुद्री मील तक की दूरी तय कर सकता है। २०‚००० करोड़़ रुपये की लागत से बना यह विमानवाहक पोत अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह देश में बने ‘एड़वांस्ड़ लाइट हेलीकॉप्टर’ के अलावा मिग–२९ के लड़़ाकू विमान सहित ३० विमान संचालित करने की क्षमता रखता है। विक्रांत २१वीं सदी में भारत के परिश्रम‚ प्रतिभा और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है। यह आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है । विक्रांत जब समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उतरेगा‚ तो उस पर तैनात १७०० नौसैनिकों में अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी। ये नए भारत की बुलंद पहचान बन रही हैं। आईएनएस विक्रांत छत्रपति शिवाजी को समर्पित किया गया है। प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना के नए निशान (ध्वज) का अनावरण भी किया। इसके साथ ही भारत ने अपने औपनिवेशिक अतीत को उतार फेंका है। ९० के दशक में पहली बार भारत सरकार ने देश के अंदर अपने विमानवाहक युद्धपोत निर्माण के कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई और तब फैसला लिया गया था कि इस कार्यक्रम के तहत बनने वाला पहला पोत आईएनएस विक्रांत के प्रति एक श्रद्धांजलि होगा। नये विक्रांत का डे़क १८ मालों का है इसमें १६ बिस्तरों का एक अस्पताल भी है। यह ४५ दिनों तक समुद्र में रह सकता है। पहले से तैनात ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ को एक साथी मिल गया है अब नौसेना भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर एक साथ एक एक युद्धपोत तैनात कर सकती है।
भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश ………………..
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम निर्देश दिया.इस मामले की सुनवाई...







