विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मंदी की ओर बढ़ने की आशंकाओं और रूस–यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया भर में भू–राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय उद्योग मंड़ल फिक्की और एशियाई विकास बैंक (एड़ीबी) ने चालू वित्त वर्ष (२०२२–२३) के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को क्रमशः ७.४ प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत और ७.५ से घटाकर ७.२ फीसद कर दिया है। यद्यपि यह चिंता बढ़ाने वाली बात है‚ लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की मानें यह बहुत निराश होने वाली बात नहीं लगता। दास का कहना है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की मुद्राओं की तुलना में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में है। रुपया कुछ दिन पहले ही ८० रुपये प्रति ड़ॉलर के स्तर को पार कर गया था। फिक्की के आर्थिक परिदृश्य सर्वे (जुलाई २०२२) में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुख्य नीतिगत दर रेपो को बढ़ाकर ५.६५ प्रतिशत करेगा जो अभी ४.९ प्रतिशत है। सर्वे जून में किया गया था और इसमें उद्योग‚ बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख अर्थशा्त्रिरयों को शामिल किया गया है। सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष २०२२–२३ में सकल घरेलू उत्पाद (जीड़ीपी) की वृद्धि दर सात प्रतिशत रह सकती है। फिक्की के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था अधिकतम ७.३ प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। वहीं न्यूनतम वृद्धि दर का अनुमान ६.५ प्रतिशत है। दूसरी ओर एशियाई विकास बैंक (एड़ीबी) ने भारत के वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर ७.२ प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल में एड़ीबी ने भारत की जीड़ीपी की वृद्धि दर ७.५ प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। इस वित्तपोषण संस्थान ने बीते वित्त वर्ष २०२१–२२ के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर ८.७ प्रतिशत किया था। एड़ीबी ने २०२२ के लिए एशियाई विकास परिदृश्य को लेकर अपनी पूरक रिपोर्ट में कहा कि भारत पर कोविड़–१९ के नये स्वरूप ओमीक्रोन का असर हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक निरंतर बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिये लगातार नीतिगत दर बढ़ा रहा है‚ लेकिन उसके ऐसा करने की भी सीमाएं हैं। देर–सबेर अर्थव्यवस्था पर असर तो दिखेगा ही।
गृह मंत्री संसद से क्यों भाग रहे हैं?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसून सत्र के...







