पिछले दिनों देश में मंकीपॉक्स के पहले केस की पुष्टि हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ७५ देशों में इसके ११६३४ से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इस बीच‚ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के लिए आपातकालीन समिति का गठन किया है। मंकीपॉक्स जूनोटिक (एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में फैलने वाली) बीमारी है। यह बीमारी मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमण के कारण होती है‚ जो पॉक्सविरिडाइ फैमिली के ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से आता है। ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस में चेचक (स्मॉलपॉक्स) और काउपॉक्स बीमारी फैलाने वाले वायरस भी आते हैं। १९५८ में रिसर्च के लिए तैयार की गइ बंदरों की बस्तियों में यह वायरस सामने आया था और इससे पॉक्स जैसी बीमारी होना पाया गया था। मंकीपॉक्स से संक्रमित किसी जानवर या इंसान के संपर्क में आने पर कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। यह वायरस टूटी त्वचा‚ सांस और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। छींक या खांसी के दौरान निकलने वाली बड़ी श्वसन बूंदों से इसका प्रसार होता है। इंसानों में मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक जैसे होते हैं। शुरुआत में बुखार‚ सिरदर्द‚ मांसपेशियों और पीठ में दर्द‚ थकावट होती है‚ और तीन दिन में शरीर पर दाने निकलने लगते हैं। मंकीपॉक्स के लक्षण आम तौर पर फ्लू जैसी बीमारी और लिम्फ नोड्स की सूजन से शुरू होते हैं‚ फिर चेहरे और शरीर पर दाने पड़ने लगते हैं। अधिकांश संक्रमण २–४ सप्ताह तक चलता है। इस संक्रमण के लिए कोई विशिष्ट ट्रीटमेंट नहीं है। हालांकि‚ अमेरिका में मंकीपॉक्स और चेचक के खिलाफ एक वैक्सीन को लाइसेंस दिया गया है। मंकीपॉक्स को कई मध्य और पश्चिमी अमेंरीकी देशों कैमरून‚ मध्य अमेरिकी गणराज्य‚ कोटे डी आइवर‚ कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य‚ गैबन‚ लाइबेरिया‚ नाइजीरिया‚ कांगो गणराज्य और सिएरा लियोन में स्थानिक बीमारी के रूप में सूचित किया गया है। हालांकि‚ अमेरिका‚ ब्रिटेन‚ बेल्जियम‚ फ़्रांस‚ जर्मनी‚ इटली‚ नीदरलैंड़‚ पुर्तगाल‚ स्पेन‚ स्वीडन‚ ऑस्ट्रेलिया‚ कनाडा‚ ऑ्ट्रिरया‚ इजराइल और स्विटजरलैंड़ जैसे कुछ देशों में भी मामले सामने आए हैं। मंकीपॉक्स से सबसे ज्यादा प्रभावित ब्रिटेन है। ब्रिटेन में ३०० से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अमेरिका‚ स्पेन‚ कनाडा आदि भी इसकी चपेट में हैं।
दुनिया भर के कई देशों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच अब भारत ने भी इसे लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इनमें इस तरह के प्रत्येक मामले को गंभीरता से लेने को कहा गया है। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के तहत जांच शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। गाइडलाइंस में कहा गया है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति की २१ दिनों तक निगरानी की जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा है कि किसी में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखते हैं‚ तो टेस्टिंग के बाद ही इसे कंफर्म माना जाएगा। मामलों और संक्रमति समूहों और संक्रमण के स्रोतों की पहचान करने के लिए सर्विलांस स्ट्रैटेजी बनाने की बात कही गई है‚ ताकि इसे फैलने से रोका जा सके। ऐसा इसलिए जरूरी बताया गया है ताकि क्लीनिकल केयर प्रदान की जा सके‚ कॉटैक्ट्स की पहचान करके मैनेज किया जा सके। फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को प्रोटेक्ट किया जा सके। ट्रांसमिशन को पहचानते हुए इसे फैलने से रोकने और जरूरी उपाय करने के लिए भी यह जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि फिलहाल वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति घोषित करने की जरूरत नहीं है। इस प्रकोप के कई पहलू ‘असामान्य’ हैं‚ और माना कि मंकीपॉक्स के खतरों पर वर्षों से गौर नहीं किया गया है। हालांकि डब्लूएचओ ने प्रकोप की ‘आपातकालीन प्रकृति’ की तरफ इशारा किया है‚ और कहा है कि इसके प्रसार को नियंत्रित करने के लिए ‘तेजी से कदम उठाने’ की जरूरत है। डब्लूएचओ के अनुसार कुछ नया घटनाक्रम सामने आता है जैसे कि यौनकर्मियों के बीच प्रसार‚ अन्य देशों में या उन देशों में संक्रमण का फैलना जहां पहले से ही मंकीपॉक्स के मामले हैं‚ मामलों की गंभीरता में वृद्धि या प्रसार की बढ़ती दर तो वह फिर से स्थिति का मूल्यांकन करेंगे। चिंता की बात यह है कि यह अधिकतर उन देशों में फैल रही है‚ जहां यह बीमारी आम तौर पर नहीं पाई जाती। मंकीपॉक्स वायरस बच्चों और इम्यूनोसप्रेस्ड व्यक्तियों जैसे गंभीर बीमारी के उच्च जोखिम वाले समूहों में फैलता है‚ तो आगे चलकर विकराल रूप ले सकता है। बच्चों में तो इसके लक्षणों की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है क्योंकि शुरुआती लक्षण चेचक या चिकन पॉक्स के समान होते हैं। आधिकारिक रूप से भारत अभी इस महामारी से अछूता है। फिर भी मंकीपॉक्स को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए।







