पटना हाईकोर्ट ने राजीव नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नेपाली नगर में प्रशासन द्वारा वहां निर्मित मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर सोमवार को अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी।
न्यायाधीश संदीप कुमार ने स्थानीय लोगों की ओर से दायर की गयी याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए पटना के जिलाधिकारी को राजीव नगर इलाके के नेपाली नगर में बुलडोजर चला कर घरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई तत्काल रोकने और इस मामले में गिरफ्तार किये गये लोगों को रिहा करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश संदीप कुमार ने लोगों के वर्षों से बने घरों को उजाड़ने पर आश्चर्य भी जताया है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने जिलाधिकारी चंद्रशेखर को भी तलब किया। इस मामले में ६ जुलाई को सुनवाई होगी। इससे पूर्व याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार और आवास बोर्ड ने गैरकानूनी तरीके से सैंकड़ों मकानों को तोड़ दिया है। याचिका में कहा गया कि यह कार्रवाई दीघा लैंड सेटलमेंट एक्ट के तहत नहीं की गई है‚ जबकि यह एक्ट इसी के लिए बनाया गया है। उधर‚ मंगलवार को दूसरे दिन भी राजीव नगर के नेपाली कॉलोनी में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी रही। पटना प्रशासन १७ जेसीबी लेकर मकानों को ध्वस्त करने पहुंचा था। वहीं दूसरी ओर‚ जन अधिकार पार्टी (जाप) के प्रमुख एवं पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस पर प्रशासन ने उनके खिलाफ धारा १४४ का उल्लंघन और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज किया है। इस मामले में २६ लोगों को गिरफ्तार भी किया है। गिरफ्तार लोगों में दीघा भूमि बचाओ समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ सिंह और सचिव वीरेंद्र सिंह भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ३ जुलाई को जिला प्रशासन ने अवैध रूप से बने मकानों को तोड़़ने की कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान वहां दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गयी। वहां निर्मित मकानों को तोड़ने के विरोध में लोगों ने पथराव किया था‚ जिससे सिटी एसपी समेत कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गये थे।
कोर्ट ने वहां रह रहे किसी भी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही डीएम और हाउसिंग बोर्ड के एमडी को जवाबी हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने पूछा कि जब लोग मकान बना रहे थे तो बोर्ड के अधिकारी कहां थे?
क्या बोर्ड ने किसी अधिकारी को चिन्हित कर कोई कार्रवाई की? मामले पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी। इससे पहले सुबह 7:45 बजे डीएम-एसएसपी पूरे दल-बल के साथ जेसीबी और पोकलेन लेकर 90 फीट रोड में घुसे और कोर्ट के स्टे के पहले दो दिन में 100 से अधिक मकान और बाउंड्री वाॅल ताेड़कर राजीवनगर की 50 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद अतिक्रमणमुक्त कराई गई जमीन की कंटीले तार और पिलर से घेराबंदी कराने और बोर्ड लगाने के लिए जिला प्रशासन ने आवास बोर्ड के एमडी को पत्र भी लिखा है। दरअसल प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन को प्लान ही इस तरह से किया था कि जब तक लोग कोर्ट से आदेश लाएंगे तब तक उनका ऑपरेशन पूरा हो चुका होगा। हुआ भी ऐसा ही। रविवार को जब कार्रवाई शुरू हुई कोर्ट बंद था। सोमवार सुबह 6 बजे से ही कार्रवाई शुरू की गई। शुरू में पूर्व सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में महिलाओं ने रास्ता रोका, लेकिन फिर लाठीचार्ज कर दलबल के साथ प्रशासन ने करीब सुबह 8 बजे से ही तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। कोर्ट से स्टे आते-आते (शाम साढ़े चार बजे तक) प्रशासन शुरू में तय 40 एकड़ से भी 10 एकड़ अधिक जमीन को अपने कब्जे में ले चुका था।
जिस भूमाफिया ने लोगों को धोखे में रख जमीन बेची, उस पर भी केस
लोगों से झूठे वादे करके अवैध रूप से जमीन बेचने के आरोप में निराला गृह निर्माण समिति के सत्येंद्र राय और उसके बेटे तथा सत्यनारायण सिंह और उसके बेटे सुनील कुमार सिंह पर केस दर्ज किया गया है। सोमवार को महिलाओं ने सबसे पहले रास्ता रोक दिया। कर्पूरी भवन से जाने वाले 90 फीट रोड को पूर्व सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में जाम कर रखा था।
मजिस्ट्रेट के आदेश पर महिला पुलिस ने लाठीचार्ज करके रास्ता खाली कराया। पिछले दाे दिनाें में दर्ज चार एफआईआर में पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव समेत 35 लाेगाें काे नामजद किया गया। 550 अज्ञात पर भी केस दर्ज किया गया है। इन अज्ञात में कइयाें का फाेटाे व फुटेज पुलिस व प्रशासन काे मिल गया है, जिसके आधार पर पुलिस उपद्रव करने वालों की पहचान कर रही है।
1024 में से 50 एकड़ पर ही प्रशासन काबिज
राजीव नगर की कुल 1024 एकड़ जमीन विवादित है। इसे आशियाना दीघा रोड के पूरब और पश्चिम दो भागों में बांटा गया है। पूरब की जमीन करीब 624 एकड़ और पश्चिम की करीब 400 एकड़ है। इन 400 एकड़ में से 50 एकड़ पर प्रशासन ने कब्जा जमाया है। 100 एकड़ पर कब्जे की तैयारी थी, लेकिन हाइकोर्ट ने बीच में ही रोक लगा दिया।
मजदूरी करने वाले राजकुमार पंडित लखीसराय जिले के बलीपुर दियर इलाके के रहने वाले हैं। गांव के घर को इन्होंने बेच दिया था। इससे मिले रुपए और कुछ जमा पुंजी को मिलाकर 8 लाख रुपए में 5 धूर जमीन इन्होंने दीघा में बाटा इलाके की रहने वाली किसी सीमा देवी से 2015 खरीदा था। फिर धीरे-धीरे करके कुल 6 लाख रुपए खर्च कर परिवार के रहने लायक घर बनाया। इसमें वो अपनी पत्नी प्रीतम प्रजापति और 4 बच्चों के साथ रहते हैं।
जिला प्रशासन से इन्हें 3 दिनों का वक्त मिला है, अपने ही घर को खाली करने के लिए। घबराया हुआ यह परिवार सबसे पहले सीमा देवी को खोज रहा है। उनके नंबर पर कॉल कर रहा है तो वो फोन भी नहीं उठा रही हैं। इस परिवार को किराए पर अब घर भी नहीं मिल रहा है।
ऐसे ही न जाने सैंकड़ों परिवार हैं जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी से रहने के लिए आशियाना बनाया था। हालांकि अब प्रशासन उसे उजाड़ने में लगा हुआ है। कई परिवार तो अनजाने में ही भू-माफिया के शिकंजे में फंस गए। भास्कर की पड़ताल में ऐसे ही भू-माफिया के साथ-साथ विधायक और अधिकारियों के नेक्सस की बात सामने आई है।

पूर्व दबंग विधायक का चलता है सिंडिकेट
पहचान उजागर नहीं करने के शर्त पर नेपाली नगर के रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि सत्ताधारी दल JDU के एक पूर्व विधायक हैं, जो बेहद दबंग हैं। इनकी छवि साफ-सुथरी नहीं रही है। इनके तीन खास लोग हैं। जिसमें एक यादव, दूसरा दुबे और तीसरा पांडेय है।
इन तीनों के जरिए ही दबंग पूर्व विधायक राजीव नगर में अपना सिंडिकेट चलाते हैं। आवास बोर्ड की सरकारी जमीन को भी इन्होंने अपने सिंडिकेट के जरिए बेचा है। ऐसे लोह जिनके घर टूटे या जिन्हें अपना घर तोड़े जाने का डर सता रहा है, उनमें पूर्व विधायक के लोगों से जमीन खरीदने वाले भी शामिल हैं।
चाचा-भतीजे भी लोगों ने लिया नाम
जिस वक्त नेपाली नगर में लोगों के घरों को तोड़ा जा रहा था, उस बीच कई लोग गुस्से में थे। अपनी पहचान को उजागर न करने की शर्त पर दो लोग सामने आए। उन्होंने बताया कि निराला को-ऑपरेटिव, पीपी को-ऑपरेटिव और जय प्रकाश को-ऑपरेटिव के नाम से हाउसिंग बोर्ड की जमीनों को बेचा गया।
निराला को-ऑपरेटिव के अध्यक्ष सत्यनारायण सिंह हैं। जिनका नाम इस इलाके के सबसे बड़े भू-माफियाओं में आता है। उन लोगों का दावा था कि इन्होंने करीब 20 बीघा सरकारी जमीन को किसानों से खरीदा हुआ बताकर बेच दिया।
दूसरा भू-माफिया नीरज सिंह है, जो सत्यनारायण सिंह का भतीजा है। लेकिन, इनकी आपस में पटती नहीं है। लोग बताते हैं कि नीरज ने भी काफी सारी जमीनों का सौदा किया। उसे अवैध तरीके से बेचा। यही हाल दीघा के नकटा गोप का भी रहा है। यह पहले नीरज सिंह के लिए ही काम किया करता था। बाद में उसने खुद का एक गैंग बना लिया।
जब घर बन रहे थे तो चुप क्यों रहा आवास बोर्ड?
सवालों के घेरे में सबसे अधिक बिहार राज्य आवास बोर्ड ही है। जब भू-माफिया उनकी जमीनों को अपना बता बेच रहे थे तो उस वक्त आवास बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें क्यों नहीं रोका? ये चाहते तो आम लोगों को ठगी का शिकार होने से बचा सकते थे। मगर, ऐसा किया नहीं। सूत्र तो बताते हैं के बोर्ड के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भू माफियाओं के साथ मिली भगत रही है।
कई बार अपने खेल में इन लोगों ने राजीव नगर थाना को भी शामिल किया। आरोप यह भी है कि इन लोगों ने घर बनाने के दौरान भी लोगों से अवैध रुपयों की वसूली की। अब सोमवार की शाम पटना हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के नाम पर जिला प्रशासन के घर तोड़ने के अभियान पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। इस पर अब 6 जुलाई को सुनवाई होगी।






