भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया तो दिल्ली प्रदेश ने नवीन जिंदल को निष्कासित कर दिया। कुछ दिन पूर्व तक इसकी आशंका किसी को नहीं थी। लेकिन कानपुर में असामाजिक तत्वों द्वारा जुमे की नमाज के बाद हिंसा व तोड़फोड़ से साफ हो गया की जिहादी तत्व टीवी डिबेट के बयान का मुसलमानों को भड़काने के लिए कर रहे हैं। इसी बीच खाड़ी के कई देशों ने भारतीय राजदूत को तलब कर न केवल नाराजगी प्रकट की बल्कि इसे पैगंबर मोहम्मद का अपमान मानते हुए माफी मांगने की भी बात कर दी। इसमें सरकार व भाजपा नेतृत्व के लिए तत्काल सबसे सुगम रास्ता यही था कि दोनों से मुक्ति पा ली जाए। लेकिन क्या इससे सब कुछ ठीक हो जाएगा ऐसा मान लिया जाएॽ जिन्होंने देश में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा फैलाने की साजिश रची है वह मानेंगे नहीं। ओवैसी ने नूपुर शर्मा के विरु द्ध मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने तक की मांग कर दी है। खाड़ी देशों में भी कुछ ने तो भारत के स्पष्टीकरण को स्वीकार कर लिया है लेकिन सभी ऐसा ही करेंगे इसकी गारंटी नहीं। आखिर पाकिस्तान‚ तुर्की और इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी क्यों शांत हो जाएंगेॽ ये भारत सरकार को इस्लाम विरोधी साबित करने की हरसंभव कुचेष्टा करेंगे। यह भी प्रचारित किया जाएगा कि मोहम्मद साहब का अपमान करने वाले को भारत ने खुला छोड़ रखा है। पार्टी में अनुशासन की कार्यवाही करने का मतलब इस बात की स्वीकृति है कि इन्होंने वाकई गलत किया है। गलत किया है तो उनकी मांगों के अनुसार इन्हें सजा भी मिलनी चाहिए। हालांकि देश में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो मानते हैं कि नूपुर शर्मा ने ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे मोहम्मद साहब का अपमान हो। यानी कट्टरपंथी और भाजपा विरोधी जानबूझकर इसे मोहम्मद साहब का अपमान साबित कर रहे हैं। प्रश्न यही है कि आखिर भारत सरकार इस मामले में कहां तक विरोधी आंतरिक और बाह्य शक्तियों के दबाव में आएगीॽ भारत मुक्त विचार विमर्श का देश है जहां गैर इस्लामी पंथों‚ संप्रदायों एवं मजहबों पर खुली बहस होती है। हिंदू धर्म और देवी–देवताओं को लेकर भी अनेक प्रकार के मत व्यक्त किए जाते हैं किंतु कभी इस तरह की आक्रामकता नहीं देखी गई। इस्लामी देशों में इस तरह की बहस की गुंजाइश नहीं है। भारत उन देशों को समझाये कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस विमर्श में बहुत सारी बातें होती हैं जिन पर हम कार्रवाई नहीं कर सकते।
संसद में पेश होंगे 4 अहम बिल, क्या मोदी संसद में दो तिहाई समर्थन जुटा पाएंगे?……………
पार्लियामेंट के मॉनसून सत्र के आखिरी चार दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस और भाजपा ने अपने सांसदों के लिए सदन...







