मगध विश्वविद्यालय के कुलपति के भ्रष्टाचार अराजकता एवं अनियमितता के मामले की पुष्टि होने के बावजूद निलंबन एवं गिरफ्तारी नहीं होने तथा राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में व्याप्त अराजकता‚ अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना विश्वविद्यालय एवं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय केसीनेट सदस्य एकजुट दिखे। पटना विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य आशीष सिन्हा एवं विक्की राय ‚ पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य आलोक तिवारी एवं विरेन्द्र कुमार ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि कहा कि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति पर लगातार भ्रष्टाचार‚ अराजकता‚ अनियमितता के आरोप शुरू से लगते रहे हैं। इसी कडी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा पुख्ता सबूत एवं तथ्य देने के बाद राजभवन द्वारा बनाई गई जांच समिति जिसकी अगुवाई ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति कर रहे थे। उनकी जांच समिति ने सभी तथ्यों को दरकिनार करते हुए क्लीन चिट दे दिया। जब स्पेशल विजिलेंस यूनिट द्वारा मगध विश्वविद्यालय के कुलपति के आवास पर छापा मारा गया तो २ करोड राशि बरामदगी के साथ–साथ भ्रष्टाचार‚ अराजकता एवं अनियमितता से संबंधित कई कागजात बरामद हुए। जिस कारण राजभवन द्वारा बनाई गई जांच समिति खुद जांच एवं संदेह के घेरे में खडी हो गयी। इतना सब होने के बावजूद भी मगध विश्वविद्यालय के कुलपति की गिरफ्तारी एवं बर्खास्तगी अभी तक नही हो सकी है। उल्टे उन्हें स्वास्थ्य कारणों से छु^ी पर जाने के लिए अनुमति प्रदान कर दी गई‚ जो गंभीर चिंतनीय विषय है। कुछ इसी प्रकार के हालात बिहार के सभी विश्वविद्यालयों का है। जहां पूर्व से कई जांच अभी तक लंबित हैं। जिन पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई‚ बल्कि दागदार एवं दोषी लोगों को विश्वविद्यालयों के दो–दो‚ तीन–तीन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण पदों पर बिठाने का काम होता आ रहा है। ऐसे ही रहा तो यह छात्र आंदोलन आम जनमानस के आंदोलन के रास्ते पर जा सकता है॥। सीनेट सदस्यों ने मगध विश्वविद्यालय के कुलपति को अविलंब पद से मुक्त कर करने ‚ सभी वर्ग की छात्राओं एवं अनुसूचित जाति–जनजाति के छात्रों से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढाई में २०१६ से लिये गए शुल्क की वापसी अनिवार्य हो एवं विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता प्राप्त निजी महाविद्यालय में इस नियम का अनुपालन नहीं होने के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो। सभी विश्वविद्यालयों में संविदा पर तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय संवर्ग में अवैध नियुक्तियां एवं रोस्टर अनुपालन में हुई गडबडी को ठीक करते हुए दोषियों पर कार्रवाई तथा महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय द्वारा बिना टेंडर किये हुए कार्यों को तुरंत रोक लगाते हुए दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। सभी विश्वविद्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं घोर अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच उच्च न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में करवाई जाए। सीनेट–सिंडिकेट की नियमित बैठकें नियमानुसार सुनिश्चित हो।
बिहार में कहीं भी हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ नहीं होगी दंडात्मक कार्रवाई
बिहार सरकार ने ऐलान किया है कि वह 26 जुलाई को शाम 6:00 बजे से पहले बिहार में कहीं भी...







