बिहार में राजभवन और शिक्षा विभाग के बीच तनातनी बढ़ गई है। मंगलवार को राजभवन में आयोजित चांसलर्स अवार्ड कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी नहीं गए थे। इस आयोजन में ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह को सर्वश्रेष्ठ कुलपति का चांसलर अवार्ड दिया गया। सुरेंद्र प्रताप पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए शिक्षा मंत्री ने बयान दिया कि चांसलर अवार्ड की स्थापना से लेकर चयन तक में शिक्षा विभाग शामिल नहीं है। शिक्षा मंत्री ने सुरेन्द्र प्रताप सिंह पर लगे आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की।
इसकी खूब चर्चा है कि….
इस तनातनी के बीच मंगलवार की रात कुलाधिपति/राज्यपाल फागू चौहान दिल्ली गए हैं। वे बुधवार यानी आज गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से मिलेंगे। इसकी खूब चर्चा है कि बिहार के विश्वविद्यालय में गड़बड़ियां उजागर होने और राज्य सरकार से तनातनी होने के बाद तो उन्हें बुलाया गया है। चांसलर अवार्ड के बाद यह तनातनी और बढ़ गई है।
शिक्षा मंत्री ने कहा चांसलर्स अवार्ड में सरकार शामिल नहीं
शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि- ‘विभाग या सरकार का कही से चांसलर अवार्ड में संबद्ध नहीं है। एक कुलपति के यहां विजिलेंस का रेड हुआ है, जो बातें कुलपति को लेकर सामने आई हैं, उससे कुलपति नियुक्ति का जो प्राधिकार है उसे सचेत रहना चाहिए। अगर इस तरह के तत्व VC की कुर्सी तक पहुंच जाते हैं तो कुलपति कार्यालय और सरकार की छवि धूमिल होगी। सरकार पूरे मामले में कहीं जुड़ी हुई नहीं होती है, फिर भी अंत में जिम्मेदारी सरकार पर आ जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान होनी चाहिए। ऐसे लोग कुलपति न बन पाएं ऐसी व्यवस्था जरूर होनी चाहिए।’
दो कुलपतियों पर लगे हैं गंभीर आरोप
बता दें कि LNMU के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह पर ज्यादा कीमत पर उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद का आरोप लगा है। दूसरा बड़ा आरोप लगा है कि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद पर। इनके यहां निगरानी की छापेमारी भी पिछले दिनों हुई थी। इन पर लगभग 30 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप है। मगध विश्वविद्यालय के कुलपति ने विभूति नारायण सिंह को प्रभार दिया है और खुद चिकित्सा अवकाश पर चले गए हैं।
विद्यार्थी हमारे राष्ट्र के भविष्यः राज्यपाल
राज्यपाल फागू चौहान ने बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह की मौजूदगी में मंगलवार को राजभवन सचिवालय द्वारा आयोजित पहले चांसलर्स अवार्ड समारोह का दीप प्रज्ज्वलन कर उद्घाटन किया। मौके पर राज्यपाल द्वारा उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार एवं नवाचारी प्रयोग आदि के अनुकूल प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण के निर्माण के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करनेवाले 06 विद्यार्थियों, एक कुलपति, एक प्राचार्य सहित 5 शिक्षकों तथा 2 महाविद्यालयों को पुरस्कृत किया गया। राज्यपाल ने कहा कि मुझे खुशी होगी, जब पुरस्कार विजेताओं की संख्या अत्यधिक होगी।
राजभवन के राजेन्द्र मंडप में आयोजित इस समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि विद्यार्थी हमारे राष्ट्र के भविष्य हैं, इसलिए उनकी बेहतर शिक्षा और उनके जीवन के विषय में सोचना जरूरी है। विद्यार्थी जीवन के शुरुआती दौर में छात्र-छात्राओं की बड़ी-बड़ी कल्पनाएं होती हैं। न्यूटन और आइंस्टीन की तरह खोज करना, देश की सेवा करना, समाज में शिक्षा की अलख जगाना, डॉक्टर बनकर मरीजों की मुफ्त सेवा करना आदि। फिर बाद में सांसारिक चीजों के प्रति उनका आकर्षण बढ़ता है और उन्हें लगता है कि अमुक पेशे में अधिक पैसे हैं तथा उसे अपनाकर अधिकाधिक सुख-सुविधाएं हासिल की जा सकती हैं। इस प्रकार वे स्वकेंद्रित बन जाते हैं और उनकी सारी कल्पनाएं धरी की धरी रह जाती हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आज विद्यार्जन से अधिक महत्वपूर्ण कॅरियर निर्माण हो गया है। इसकी ऊंचाई तक पहुंचने के प्रयास में युवाओं का समाज, परिवार और रिश्तेदारों से दूरी बनती जा रही है। यहं तक कि उनका खुद का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। व्यक्ति चांद पर तो पहुंच गया किन्तु अपने पड़ोसी तक नहीं पहुंच पा रहा है। अपनी ऊंची महत्वाकांक्षाओं के पूरा नहीं होने पर युवाओं का अवसादग्रस्त हो जाना और कभी-कभी उनके द्वारा कोई खतरनाक कदम उठा लेना अत्यन्त दुःखदायी है। उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थियों को ज्ञान-विज्ञान व विवेकसम्मत आचरण में सुशिक्षित होने के अतिरिक्त उनमें सामाजिक, नैतिक, चारित्रिक व मानवीय मूल्यों को धारण करने की पर्याप्त क्षमता का विकास होना अति आवश्यक है।
स्वागत भाषण पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के प्रतिकुलपति प्रो. विभूति नारायण सिंह ने किया। राज्यपाल के सचिव रॉबर्ट एल चोंग्थू सहित कई वीसी, प्रोवीसी, शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।







