शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा जब बिहार की ४ पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त हस्तियां एक साथ‚ एक मंच पर नजर आईं। बिहार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन ने मधुबनी पेंटिंग और छापा कला में पद्मश्री प्राप्त इन हस्तियों को अंगवस्त्र और मधुबनी पेंटिग की कलाकृतियां भेंट कर सम्मानित किया। पटना के बिहार म्यूजियम में आयोजित कार्यक्रम में उद्योग मंत्री ने पद्मश्री हस्तियों को सम्मानित करते हुए कहा कि ये बिहार के लिए अत्यंत गौरव का और ऐतिहासिक पल है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए भी ये बड सौभाग्य है कि आज एक मंच पर एक साथ चार पद्मश्री हस्तियों को सम्मानित करने का मौका उन्हें मिला है। ॥ उन्होंने कहा कि पद्मश्री दुलारी देवी‚ पद्मश्री बौआ देवी‚ पद्मश्री गोदावरी दत्त और प्रोफेसर श्याम शर्मा ने बिहार के साथ–साथ सभी देशवासियों का मान बढÃाया है। इनकी वजह से बिहार की लोक परंपराओं को‚ लोक कलाकृतियों को अद्भुत ख्याति मिली। उन्होंने कहा कि ये बिहार के लिए गौरव की बात है कि मिथिला कला देश की एकमात्र ज्ञात लोककला शैली है जिसके सर्वाधिक सात कलाकार देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार से सम्मानित हैं। मौका उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान द्वारा प्रकाशित‚ निदेशक और वरिष्ठ कला लेखक अशोक कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक नाज–ए–मिथिला के लोकार्पण का था। इस मौके पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा‚ बीजेपी प्रदेश महिला मोर्चा की अघ्यक्ष लाजवंती झा के साथ बिहार की प्रतिष्ठित मधुबनी पेंटिंग और अन्य लोक कलाकृतियों को आगे बढने वाले कई कलाकार और अन्य लोग मौजूद रहे। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि उनकी हर कोशिश का मकसद बिहार और बिहार की धरोहरों को आने बढना होता है। शाहनवाज हुसैन ने एलान किया कि बिहार की लोक कलाकृतियों के लिए एक संग्रहालय बनेगा जिसके जरिए मधुबनी या मिथिला पेंटिंग से लेकर बिहार की सभी पारंपरिक लोककृतियों को बढवा दिया जाएगा। कहा कि नाज–ए–मिथिला जैसी पुस्तकों की सख्त जरूरत है जिससे कि लोगों को अत्यंत समृद्ध मिथिला चित्रकला के विकास और विस्तार की झलक मिल सके॥।
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