बिहार के बगहा में नेपाल के तराई और जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर साफ दिखाई देने लगा है. गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तराई इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे सैकड़ों लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. निचले इलाकों में पानी फैलने से आवागमन ठप पड़ गया है और ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बागमती नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर फिर से बढ़ गया है और यह खतरे के निशान को पार कर गया है। डुब्बा घाट गेज स्टेशन (शिवहर जिले के पिपराही प्रखंड) पर बागमती नदी का खतरे का स्तर 61.28 मीटर है। नदी अभी 61.33 मीटर पर बह रही है, जो खतरे के निशान से 5 सेंटीमीटर अधिक है। बताया जा रहा है कि इस मौसम में यह अब तक का सबसे अधिक जलस्तर है और बहाव लगातार तेज हो रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पानी तटबंधों के भीतर तेजी से फैल रहा है और कई निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी डुब्बाघाट स्थित एनडीआरएफ कैंप में भी घुस गया है। डुब्बाघाट, पिपराही घाट, अडौरी घाट और मोटनाजे सहित कई जगहों पर भारी कटाव की सूचना मिली है। खेती की जमीन और खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं क्योंकि कृषि भूमि के हिस्से धीरे-धीरे बह रहे हैं।
गर्दन तक भरा बाढ़ का पानी:
बगहा के लक्ष्मीपुर रामपुरा पंचायत के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है. चकदवा, झंडू टोला, बीन टोली समेत आसपास के कई गांवों में पानी फैल जाने से लोग घर से बाहर निकलने में भी मुश्किल महसूस कर रहे हैं. कई जगहों पर कमर से ऊपर और कुछ स्थानों पर गर्दन तक पानी भर गया है. गर्दन तक पानी में ग्रामीण आवागमन करते नजर आ रहे हैं. संपर्क मार्ग जलमग्न हो जाने से आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है.
नेपाल में बारिश, बिहार में तबाही
जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण तटबंधों के पास रहने वाले गांवों के लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालात बिगड़ने के साथ ही बाढ़ का खतरा भी बढ़ रहा है। पिपराही में बागमती पुल के पिलर नंबर 1 के पास भी लगातार कटाव हो रहा है और प्रभावित क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ रहा है। नदी के दोनों किनारों पर कटाव की सूचना मिली है, जिससे आसपास के बुनियादी ढांचे और बस्तियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मधुबनी प्रखंड में दूसरी बार बाढ़: बगहा अनुमंडल के मधुबनी प्रखंड स्थित चिउरही और सिसई पंचायत के लोगों को एक महीने के भीतर दूसरी बार बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है. वाल्मीकिनगर गंडक बराज से गुरुवार रात करीब दो लाख 30 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी का जलस्तर और बढ़ गया. इसके बाद बाढ़ का पानी कई गांवों में फैल गया. चिउरही पंचायत के रेवहिया और चिउरही गांव के करीब 300 घरों में पानी घुस गया है. गांव की सड़कों पर पानी भर जाने के कारण लोग नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंच रहे हैं. कई परिवार अपना सामान निकालकर ऊंचे स्थानों पर ले जा रहे हैं. मुख्य मार्ग के पूर्वी हिस्से में स्थित रेवहिया के शेष भाग और नैनाहा गांव में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है.
शिवहर की जिला मजिस्ट्रेट प्रतिभा रानी के निर्देशों पर जिला प्रशासन और बागमती डिवीजन की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बाढ़ को रोकने और तटबंधों को मजबूत करने का काम लगातार चल रहा है। कटाव को रोकने के लिए कमजोर जगहों पर बड़े पत्थर और रेत की बोरियां लगाई जा रही हैं।
पिपराही और डुब्बा पुल के पास कटाव
बागमती डिवीजन की टीमें नदी पर चौबीसों घंटे नजर रख रही हैं और पानी के स्तर में होने वाले बदलावों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। इस बीच, बेलवा डैम की मदद से बागमती नदी का पानी बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल से तेजी से बह रहा है, जिससे आस-पास के इलाकों में चिंता बढ़ गई है। जिला मजिस्ट्रेट प्रतिभा रानी ने पुष्टि की है कि पिपराही और डुब्बा पुल, दोनों जगहों के पास कटाव हो रहा है। दोनों जगहों पर मरम्मत और कटाव रोकने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं और टीमें किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।
बिहार के 5 जिलों में आज बारिश की संभावना
बिहार में मानसून एक्टिव है। इस कारण पूरे प्रदेश में बादल छाए रह रहे हैं, लेकिन कम बारिश होने की वजह से उमस बरकरार है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, आज 5 जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है। वहीं बाकी 33 जिलों में मौसम सामान्य रह सकता है। इस दौरान कुछ जगहों पर बूंदाबांदी और धूप-छांव का सिलसिला जारी रहेगा।
मौसम विज्ञान केंद्र की मानें तो ज्यादातर जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना कम है। इससे बारिश के इंतजार के साथ लोगों को उमस का सामना करना पड़ सकता है। बीते 24 घंटे में मधेपुरा और समस्तीपुर में बारिश हुई। पटना में हल्के बादल छाए रहे, लेकिन धूप निकलने से उमस की स्थिति बनी रही।
मानसून में बारिश के बावजूद है उमस
मानसून के दौरान वातावरण में नमी की मात्रा काफी बढ़ जाती है। समुद्र और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाएं बिहार में पहुंचती हैं। बारिश के बाद भी वातावरण में नमी बनी रहती है। जब तापमान बढ़ता है और हवा में मौजूद नमी आसानी से बाहर नहीं निकल पाती, तो पसीना जल्दी नहीं सूखता। इसी वजह से शरीर को वास्तविक तापमान से अधिक गर्मी महसूस होती है और मौसम उमस भरा लगता है। खासकर तब जब बादल तो मौजूद हो, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही हो। ऐसे मौसम में धूप और नमी दोनों के कारण लोगों को चिपचिपी गर्मी का अहसास होता है।
पटना में बादल छाए रहेंगे, बारिश के आसार कम
राजधानी में आज मौसम मुख्य रूप से उमस भरा रहने का अनुमान है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। हवा में नमी अधिक रहने के कारण लोगों को तापमान सामान्य होने के बावजूद गर्मी अधिक महसूस हो सकती है। पटना में तेज या लगातार बारिश की संभावना फिलहाल कम है। दिन में धूप निकलने और बादलों की आवाजाही के बीच उमस बढ़ सकती है। शाम के समय स्थानीय स्तर पर बादल बनने पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है।







