बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं। मंत्री दीपक प्रकाश के एमएलसी बनने के बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने एमएलसी के तौर पर मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति करने को लेकर बिहार सरकार से नियुक्ति और नामांकन का रिकॉर्ड मांगा है। दीपक प्रकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान शुक्रवार को बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश को अब बिहार विधान परिषद का सदस्य नामित किया जा चुका है। उन्होंने एमएलसी के रूप में शपथ भी ले ली है। इससे मंत्री दीपक प्रकाश की अयोग्यता का मुद्दा अब बचता नहीं है।
बिहार सरकार के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मंत्री दीपक प्रकाश की एमएलसी पद पर नियुक्ति और नामांकन का सरकार से रिकॉर्ड मांगा है।
अब दीपक प्रकाश की अयोग्यता का मुद्दा नहीं बचता: तुषार मेहता
बिहार सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दीपक प्रकाश के खिलाफ कथित अयोग्यता का मुद्दा अब नहीं बचता, क्योंकि उन्हें विधान परिषद का सदस्य नामित किया जा चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से विधान परिषद में उनकी नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना पेश करने को कहा। इसके बाद अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिकाकर्ता ने दीपक प्रकाश के MLC चयन पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि दीपक प्रकाश का एमएलसी के तौर पर गलत तरीके से मनोयन हुआ है। इस वजह से मामले को बंद न किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि कथित संवैधानिक उल्लंघन पहले ही हो चुका है। दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया गलत है। दीपक प्रकाश साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा से जुड़े नहीं है। ऐसे में राज्यपाल ने उनका गलत मनोयन किया है।







