मई 2026 में छात्रों ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर आवाज उठाई, जिसके बाद देश के युवाओं में सरकार के रवैये के प्रति गुस्सा उमड़ पड़ा। सरकार करीब 3 जून 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के मुद्दे को सुलझा सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। 20 जून से जंतर मंतर पर सीजेपी का आंदोलन शुरू हुआ। 28 जून से सोनम वांगचुक भी जुड़ गए। अब ये आंदोलन देश के कई राज्यों के अलावा विदेशी सरजमीं तक भी पहुंच गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मुहिम से जुड़े युवा एकजुट होकर भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। धर्म, जाति, दल और विचारधारा के मुद्दे पीछे हट गए और लगभग पूरा देश सीजेपी की मुहिम से जुड़ता दिख रहा है।
25 दिन से अनशन कर रहे लद्दाख के शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अगर आंदोलन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो वे प्रदर्शनकारियों से अपील करेंगे कि अपने आंदोलन को अभी के लिए टाल दें। सरकार से बात शुरू करें। सोनम वांगचुक के बयान में नरमी सी दिखती है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा तभी आंदोलन वापस लेंगे। नीट पेपर लीक के बाद जिन छात्रों ने अपनी जिंदगी समाप्त की है उन्हें एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे। सीजेपी और वांगचुक की इस मुहिम को दिल्ली से बाहर भी समर्थन मिलने लगा है। कई राज्यों में प्रदर्शन के अलावा वांगचुक के समर्थन में अमेरिका के न्यूयॉर्क और सेन जोस में भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर दिखे।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिकी मानवाधिकार संगठन, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने सोमवार को न्यूयॉर्क और सैन जोन में एकजुटता का प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने वांगचुक के समर्थन में तख्तियां लेकर भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। वांगचुक, पिछले 25 दिनों से नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। संगठन ने एक बयान में कहा कि लंदन में भारतीय उच्चायोग और डब्लिन में भारतीय दूतावास के बाहर भी ऐसे ही प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा अगर किसान आंदोलन एक साल तक चल सकता है तो उनका आंदोलन भी बिना जीत हासिल किए समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस हिंसा में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को सजा दी जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे। दूसरी ओर सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो आंदोलन खत्म कर बातचीत का रास्ता अपनाया जाएगा। मगर सीजेपी का कहना है धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। उसके साथ-साथ तीन और मांगों पर फैसला होगा। मांगे मानी जाएंगी तब जाकर आंदोलन वापस लिया जाएगा।
ऐसे में दो केंद्रीय मंत्रियों के मेदांता अस्पताल जाकर वांगचुक से मिलने के आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आंदोलन को मैनेज करने की कवायद कर रही है। दरअसल, सीजेपी ने इस मुलाकात के बाद कहा कि मंत्रियों को जंतर-मंतर पर आकर बात करनी होगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या मंत्री जंतर-मंतर जाएंगे?