उन्होंने कहा कि पिछले छह-सात महीनों से वह लगातार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. उन्होंने कई सीनियर नेताओं से अपनी बात भी रखी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. उनके मुताबिक पार्टी में कुछ ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है, जिनके सामने बड़े नेता भी कुछ नहीं बोल पा रहे हैं.
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्होंने अपनी नाराजगी की जानकारी कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को भी दी थी. उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव उनकी बात समझते हैं, लेकिन उनकी क्या मजबूरी है, यह वह नहीं जानते. हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेने से इनकार किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा किसी खास नेता की ओर है, तो उन्होंने कहा कि समय आने पर सारी बातें सामने आएंगी. फिलहाल वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते. उन्होंने कहा कि पार्टी के बड़े नेता और पत्रकार भी जानते हैं कि उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा.
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक बार उन्हें पार्टी से हटाया गया था, लेकिन उसी दिन लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप दी थी. इस बार स्थिति अलग है और अब उनके लिए पार्टी में बने रहना संभव नहीं था.
तेजस्वी यादव से आखिरी मुलाकात के सवाल पर उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले तेजस्वी यादव के बेटे के जन्मदिन पर उनकी मुलाकात हुई थी. इस्तीफा देने के बाद उनकी तेजस्वी यादव से कोई बात नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक तेजस्वी यादव का फोन भी नहीं आया है. भविष्य की राजनीति को लेकर मृत्युंजय तिवारी ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान इस्तीफे पर है. आगे क्या फैसला होगा, यह समय आने पर बताया जाएगा. उन्होंने किसी दूसरी पार्टी में जाने की संभावना पर भी कोई टिप्पणी नहीं की.
मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “मैं जनता का सेवक हूं और आखिरी सांस तक जनता की सेवा करता रहूंगा.” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी से कभी कोई निजी लाभ नहीं लिया. सबसे कठिन समय में भी वह आरजेडी के साथ खड़े रहे और संगठन को मजबूत करने का काम किया.
कौन हैं मृत्युंजय तिवारी?
मृत्युंजय तिवारी को तेजस्वी यादव का करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता रहा है। युवाओं को राजद से जोड़ने में भी उनकी अहम भूमिका रही। वे राजद प्रमुख लालू यादव के भी बेहद करीबी माने जाते थे।
2014 में लालू यादव ने उन्हें पार्टी का मीडिया प्रभारी और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया था। मृत्युंजय तिवारी का राजनीति से जुड़ाव छात्र जीवन से ही रहा है। छात्र राजनीति के दौरान उन्होंने सामाजिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
इसके बाद वे राजद में शामिल हुए। अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व क्षमता और संगठनात्मक कौशल के दम पर वे पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हो गए। अब उनका इस्तीफा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।







