राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने बिहार सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कर एवं दर शुल्क नियमावली-2026 को स्वीकृति देकर ग्रामीण क्षेत्रों में 50 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक होल्डिंग टैक्स लगाने के निर्णय की कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि हर मोर्चे पर असफल एनडीए सरकार अब राजस्व बढ़ाने के लिए गांवों के गरीब लागों की जेब पर डाका डाल रही है। पहले बिजली, फिर सड़क, फिर परिवहन, फिर विभिन्न सेवाओं पर शुल्क और अब अर्द्ध पक्का मकान, पक्का मकान, जलापूर्ति, सफाई, पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी, ईंट चिमनी और सिनेमा हॉल पर टैक्स लगाकर जनता के साथ एनडीए सरकार अन्याय कर रही है। एनडीए सरकार की नीति टैक्स के नाम पर केवल जनता से पैसे वसूलने की बन गई है।
निर्णय को तत्काल वापस ले सरकरार
राजद प्रवक्ता ने कहा कि बिहार की जनता पहले से ही महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, गरीबी और बढ़ते अपराध से त्रस्त है, अब एनडीए सरकार गांवों में रहने वाले गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवारों पर भी टैक्स का नया बोझ डाल कर अन्यायपूर्ण और जनविरोधी काम कर रही है।
राजद की मांग है कि बिहार सरकार इस जनविरोधी निर्णय को तत्काल वापस ले तथा ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय उन्हें बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए।
कल बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया था जिसमे मंत्रिमंडल ने ग्राम पंचायतों को विभिन्न प्रकार के कर (टैक्स) लगाने का अधिकार देने संबंधी संशोधन को मंजूरी दे दी थी .
मकान, होर्डिंग और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगेगा टैक्स : सरकार के फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के और अर्ध पक्के मकानों के साथ साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी वार्षिक टैक्स लगाया जाएगा. पंचायतें होर्डिंग, सिनेमा हॉल, पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी और ईंट भट्ठों से भी निर्धारित दर के अनुसार शुल्क वसूलेंगी.
इन सुविधाओं के लिए भी देना होगा टैक्स : सफाई और जलापूर्ति जैसी नागरिक सुविधाओं के लिए भी अलग से शुल्क लिया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पंचायतों की अपनी आय बढ़ेगी और स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे.
किस पर कितना लगेगा वार्षिक टैक्स : कैबिनेट के फैसले के अनुसार पक्के मकान पर ₹100, अर्ध पक्के मकान पर ₹50 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों पर ₹25 वार्षिक टैक्स लिया जाएगा. सफाई शुल्क ₹30 और जलापूर्ति शुल्क ₹30 निर्धारित किया गया है. वहीं पेट्रोल पंप, रसोई गैस एजेंसी, ईंट भट्ठा (चिमनी) और सिनेमा हॉल पर ₹5,000 वार्षिक शुल्क लगाया जाएगा. होर्डिंग और अन्य विज्ञापन माध्यमों पर भी पंचायतें निर्धारित नियमों के तहत टैक्स वसूल सकेंगी.
‘पंचायतों की बढ़ेगी आर्थिक ताकत’ : अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने कहा कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है. अभी पंचायतें अधिकांश विकास कार्यों के लिए सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती हैं, लेकिन अब उनके पास स्वयं राजस्व जुटाने का अधिकार होगा. इससे सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और अन्य स्थानीय विकास योजनाओं पर खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी.







