राज्य के 29 बड़े जलाशय और 247 तालाब इको टूरिज्म के रूप में विकसित होंगे। सोमवार को राजधानी के स्थानीय होटल में इकोटूरिज्म पर आयोजित निवेशक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार में इकोटूरिज्म की भरपूर संभावना है।
सम्मेलन का शुभारंभ माननीय मंत्री, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार डॉ. रामचंद्र प्रसाद दद्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्री अरविंदर सिंह सहित विभाग के वरीय पदाधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य के 29 जलाशयों तथा 247 तालाबों, पोखरों, झीलों एवं आर्द्रभूमियों पर इकोटूरिज्म आधारित परियोजनाओं के विकास हेतु उपलब्ध निवेश अवसरों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। सम्मेलन में राज्य एवं राज्य के बाहर से आए 50 से अधिक निवेशकों ने विभागीय अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की तथा निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने इकोटूरिज्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके परिणामस्वरूप राजगीर नेचर सफारी, जू सफारी, ग्लास ब्रिज एवं घोड़ाकटोरा, नवादा का ककोलत जलप्रपात, मुंगेर का भीमबांध, बांका का मंदार हिल तथा कैमूर का करमचट डैम सहित विभिन्न इकोटूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य के पर्यटन स्थलों का समग्र विकास तथा निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। बिहार में उपलब्ध जलाशयों एवं आर्दभूमियों की प्रचुरता को देखते हुए एडवेंचर टूरिज्म एवं वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) श्री अरविंदर सिंह ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि बिहार की प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता एवं जल संसाधन राज्य को इकोटूरिज्म के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विभाग इकोटूरिज्म विकास के माध्यम से संरक्षण एवं विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा निजी क्षेत्र की सहभागिता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सम्मेलन के दौरान निवेशकों को वर्तमान में जारी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी भी दी गई। भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में इकोटूरिज्म परियोजना के विकास हेतु जारी Request for Proposal (RFP) की अंतिम तिथि 28 जुलाई, 2026 निर्धारित है। इसके अतिरिक्त राज्य के चयनित इकोटूरिज्म स्थलों पर एडवेंचर टूरिज्म गतिविधियों एवं वाटर स्पोर्ट्स सुविधाओं के विकास, संचालन एवं अनुरक्षण के लिए अनुभवी एवं योग्य एजेंसियों से Expression of Interest (EOI) आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि 6 अगस्त, 2026 निर्धारित है। साथ ही अन्य इकोटूरिज्म परियोजनाओं के लिए भी इच्छुक निवेशकों से सुझाव एवं प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।
सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 50 निवेशक और निजी सहायक शामिल हुए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि निवेशकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग उनके साथ पूर्ण रूप से खड़ा रहेगा। निवेशकों को 30 साल की लीज पर जमीन मिलेगी।
दो श्रेणियों में बांटी गईं परियोजनाएं : विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि विभाग ने इको टूरिज्म स्थलों को दो श्रेणियों में बांटा है। ग्रुप-ए में 29 बड़े जलाशय शामिल हैं, जहां बड़े स्तर का इकोटूरिज्म का विकास होगा। ग्रुप बी में 247 तालाब, पोखर, झील एवं आर्द्रभूमि हैं। इसमें मध्यम और छोटे निवेशक भी भाग ले सकते हैं। ग्रुप ए के लिए 10 से 50 करोड़ और ग्रुप बी के लिए 2 से 10 करोड़ तक निवेश करने वाले शामिल हो सकते हैं।
एडवेंचर और वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा : उच्च पर्यटक संख्या वाले स्थलों पर एडवेंचर स्पोर्ट्स और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को बढ़ावा दिया जायेगा। राजगीर, करमचंड समेत कई महत्वपूर्ण स्थलों को प्राइवेट पार्टनर्स के माध्यम से विकसित किया जाएगा। भीमबांध वाइल्डलाइफ सेंचुरी के लिए आरएफपी (प्रपोजल का अनुरोध) जारी किया जा चुका है।
विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह ने कहा कि बिहार में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। रोहतास, करमचंड, मुंडेश्वरी, धुआकुंड, नालंदा (जू सफारी, नेचर सफारी, रोपवे), नवादा (ककोलत जलप्रपात), वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व, मुंगेर (भीमबांध), कुशेश्वर स्थान और ढोल पहाड़ी जैसे कई स्थलों पर आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जा चुका है। अब इन परियोजनाओं को पीपीपी मॉडल के तहत आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) अभय कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) सुरेंद्र कुमार सिंह, मुख्य वन संरक्षक (आईटी) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक अमित कुमार, बिहार इकोटूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के परियोजना निदेशक के. नेशामणी, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) के अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल, सीआईआई बिहार के अध्यक्ष गौरव साह, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीआईए) के अध्यक्ष रामलाल खेतान सहित विभाग के अन्य अधिकारी, विभिन्न राज्यों के निवेशक शामिल हुए।






