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दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद क्यों हुआ बवाल……….

UB India News by UB India News
July 11, 2026
in खास खबर, मध्यप्रदेश
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दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद क्यों हुआ बवाल……….
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नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दिग्गज नेताओं में गिने जाते रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री रहे. उनका रुतबा ऐसा था कि फिल्मों को लेकर दिए गए उनके बयान अक्सर उन्हें चलता-फिरता सेंसर बोर्ड बना देते थे. लेकिन कहते हैं, राजनीति में किस्मत कभी भी पलट सकती है. नरोत्तम मिश्रा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. पिछले विधानसभा चुनाव में वे दतिया से चुनाव हार गए. कभी अपने प्रभाव से टिकट तय कराने वाले नेता का इस बार खुद टिकट कट गया. अब उनके समर्थक दतिया की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. टिकट कटने की खबर के बाद से समर्थकों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा. विरोधी भी इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी ले रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टिकट आपकी पार्टी ने काटा है और लड़ाई भी आपकी अपनी पार्टी से है, तो फिर दतिया की जनता को 20 किलोमीटर लंबे जाम की सजा क्यों दी जा रही है?
दरअसल 30 जुलाई को दतिया विधानसभा उपचुनाव होना है. इसके लिए भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है. इसके बाद पार्टी के भीतर विरोध खुलकर सामने आ गया. शुक्रवार रात से नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए. हंगामा इतना बढ़ गया कि भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने चक्काजाम कर दिया. सुबह तक पत्थरबाजी की भी खबर सामने आई. दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि करीब 11 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही और लगभग 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई. इस दौरान महिलाओं और बच्चों से भरी कई बसें भी जाम में फंसी रहीं. प्रशासन ने सुबह करीब चार बजे तक समर्थकों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.

समर्थकों का आरोप: पुलिस ने चलाया लाठीचार्ज

  • नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के प्रदर्शन में कलेक्टर से लेकर एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इस हंगामे में आठ पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. वहीं, समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया. हालांकि कलेक्टर ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया.
  • लेकिन सवाल फिर वही है. जब लड़ाई पार्टी से है तो आम जनता को क्यों परेशान किया जा रहा है? चुनाव के समय यही जनता नेताओं के लिए सबसे बड़ी ताकत होती है. उसी जनता को घंटों जाम में फंसाना किस राजनीति का हिस्सा है? 20 किलोमीटर लंबे जाम का मतलब है हजारों लोगों को परेशानी. कोई बच्चा स्कूल जाने के लिए निकला होगा, कोई मरीज अस्पताल पहुंचने की कोशिश कर रहा होगा, कोई कर्मचारी दफ्तर जा रहा होगा. आखिर इन लोगों की गलती क्या थी? टिकट नहीं मिला तो उसकी कीमत आम नागरिक क्यों चुकाए?

आपसी कलह, लेकिन भोपाल पार्टी दफ्तर में कोई हलचल नहीं

दतिया में समर्थक सड़क पर हैं, लेकिन भोपाल स्थित भाजपा मुख्यालय में इस विरोध का कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा. टिकट कटने के विरोध में भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण समेत कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है. नगर मंत्री और भाजपा कोषाध्यक्ष ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं. समर्थकों का दावा है कि कई भाजपा पार्षदों ने भी सामूहिक इस्तीफे सौंप दिए हैं.

पूरी तैयारी में थे नरोत्तम, लेकिन आखिरी समय में बदल गया फैसला

उपचुनाव की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा पूरी तैयारी में जुटे थे. उन्हें भरोसा था कि पार्टी उन्हें ही टिकट देगी. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने नामांकन फॉर्म तक खरीद लिया था. क्षेत्र में लगातार जनसभाएं भी कर रहे थे. लेकिन अंतिम समय में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया. फिलहाल उपचुनाव के लिए 13 लोगों ने नामांकन पत्र खरीदे हैं, जिनमें से चार उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं.
विपक्ष ने भी साधा निशाना
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर विपक्ष ने भी भाजपा पर निशाना साधा. कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, ‘यह सिलसिला बलराज मधोक के समय से ही चला आ रहा है. भाजपा में किसी को भी बहुत ताकतवर नहीं बनने दिया जाता, ताकि वह नेतृत्व के लिए चुनौती न बन जाए. नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश में एक मजबूत नेता हैं, इसलिए उन्हें कमजोर किया जा रहा है. छोटे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया जाता है. यह भाजपा की परंपरा रही है कि पार्टी में कोई ब्राह्मण नेता बहुत ताकतवर न बन पाए.’
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, ‘बीजेपी में आगे बढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति को नीचे गिराने का कल्चर है. उदाहरण के लिए, शिवराज सिंह चौहान लगभग नौ लाख वोटों से जीते थे, लेकिन उनका कद कम कर दिया गया और उन्हें केंद्र में भेज दिया गया. मोहन यादव से पहले नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित नेताओं में थे. हालांकि वे विवादास्पद सांप्रदायिक बयानों के लिए भी जाने जाते थे. बीजेपी में जो भी बड़ा दिखता है, उसे उसकी जगह दिखा दी जाती है. वहां कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं है. नरोत्तम मिश्रा की स्थिति यही दिखाती है.’
अब अहम सवाल
टिकट काटना किसी भी राजनीतिक दल का अपना मामला है. असहमति जताना भी लोकतंत्र का हिस्सा है. लेकिन क्या लोकतांत्रिक विरोध का मतलब आम जनता को घंटों जाम में फंसाना, बच्चों, मरीजों और यात्रियों को परेशान करना है? अगर पार्टी के फैसले से नाराजगी है तो विरोध भाजपा कार्यालय के बाहर होना चाहिए या फिर उन लोगों के खिलाफ, जिन्होंने फैसला लिया. आखिर सड़क पर चलने वाला आम आदमी किस बात की सजा भुगते? क्या जनता सिर्फ वोट देने के दिन ही याद आती है और बाकी समय उसे ऐसे बंधक बनाना राजनीति का नया तरीका बन गया है? अगर हर नेता टिकट कटने पर शहर बंद कराने लगे तो लोकतंत्र और अराजकता के बीच फर्क आखिर बचेगा क्या?

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बदले जाने के फैसले के बाद जिले की सियासत गरमा गई है। पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार शाम दतिया-झांसी हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन पूरी रात जारी रहा। शनिवार तड़के पुलिस ने जाम हटाने की कार्रवाई की, जिसके दौरान आंसू गैस के गोले छोड़े गए। वहीं, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तथा पथराव भी हुआ। टिकट घोषित होने के बाद से ही सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता दतिया-झांसी हाईवे पर जुट गए थे। वे रातभर ‘नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद’ और ‘टिकट वापस लो’ के नारे लगाते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक पार्टी अपना फैसला वापस नहीं लेगी, वे सड़क से नहीं हटेंगे।

शनिवार सुबह भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और जाम समाप्त कराने का प्रयास किया। प्रशासन के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने हटने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने इससे इनकार किया। इस बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। मौके पर कुछ देर तक अफरातफरी का माहौल बना रहा।

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एसपी क्या बोले?
एसपी ने कहा कि पुलिस ने किसी प्रकार का लाठीचार्ज नहीं किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने हाईवे से जाम हटवा दिया। इसके बाद दतिया-झांसी मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया।

हालांकि, आंदोलनकारी कार्यकर्ता अब भी अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही दतिया की पहचान हैं और वे भाजपा प्रत्याशी बनाए गए आशुतोष तिवारी को स्वीकार नहीं करेंगे। एक कार्यकर्ता ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर टिकट नहीं बदला गया तो दोबारा हाईवे जाम किया जाएगा। बढ़ते विरोध को देखते हुए दतिया भाजपा जिला कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग भी की गई है।

भाजपा ने आशुतोष तिवारी को संगठन का मजबूत और संघनिष्ठ चेहरा बताते हुए उम्मीदवार बनाया है, लेकिन नरोत्तम समर्थकों का विरोध पार्टी के लिए चुनाव से पहले बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे शुरू हुआ चक्का जाम शनिवार सुबह लगभग 5 बजे तक चला। इसके कारण दतिया-झांसी हाईवे पर 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें कई बसें और एंबुलेंस भी फंस गईं।

कलेक्टर क्या बोले?
कलेक्टर के मुताबिक, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारी पथराव किया, जिसमें आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। एसपी और भांडेर के एसडीओपी को भी चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया। जवानों ने केवल सड़क पर लाठियां पटककर भीड़ को पीछे हटाया। कलेक्टर के अनुसार उपद्रवियों ने 5 से 6 ट्रकों के शीशे तोड़ दिए, कुछ वाहनों को पलट दिया, आग लगाने का प्रयास किया, एसडीओपी की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और एक पुलिस वाहन को भी पलट दिया।

कलेक्टर ने बताया कि उपचुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। मुरैना से दो अतिरिक्त कंपनियां, एक क्यूआरएफ कंपनी और सीआरपीएफ की 17 कंपनियां बुलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे भी कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया गया तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। दतिया उपचुनाव नजदीक होने के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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