तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल में शामिल हुईं वीणा मानवी को इस सीट से टिकट दिया है। वीणा मानवी एक सामाजिक कार्यकर्ता रही हैं, वे मुख्य रूप से पटना और बिहार में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने के लिए पहचानी जाती हैं।
‘समृद्ध महिला विकास मंच’ (महिला विकास मंच) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काम करती रही हैं। इसके जरिए वे पारिवारिक विवादों, घरेलू हिंसा और पीड़ितों की कानूनी, सामाजिक मदद के लिए पटना के इलाकों में काफी सक्रिय रही हैं।
जुलाई 2026 में तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) में शामिल होकर वे सक्रिय चुनावी राजनीति में मुख्य भूमिका में आई हैं।
वे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) महानगर (पटना) की महिला विंग में कोषाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।

BJP से ये हो सकते हैं उम्मीदवार
1. अजय आलोक
नेशनल मीडिया में भाजपा के मजबूत चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले अजय आलोक को भी बांकीपुर में नितिन नवीन के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है।
कायस्थ जाति से आने वाले डॉ. आलोक के पिता पद्म श्री गोपाल प्रसाद सिन्हा बड़े डॉक्टर हैं। पटना में इनकी एक अलग छवि है। 2003 में अपना पॉलिटिकल करियर शुरू करने वाले आलोक ने 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा सीट से LJP के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
2010 के चुनाव में भी इन्होंने इसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद 2012 में जदयू जॉइन किया। पार्टी के प्रवक्ता और महासचिव बने। 2023 में जदयू से इस्तीफा देकर BJP का दामन थामा। फिलहाल BJP के राष्ट्रीय मीडिया का मुखर चेहरा हैं।
चुनाव लड़ने पर क्या कहा?
‘फिलहाल मेरा पहला फोकस बंगाल चुनाव है। पटना चुनाव के बारे में फिलहाल मैं कुछ नहीं बोल सकता। ये पार्टी का निर्णय है। हम फिलहाल रेस में कहीं नहीं है।’
2. रणवीर नंदन
भाजपा नेता रणवीर नंदन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इनके नाम की भी चर्चा बांकीपुर सीट के लिए है। रणवीर शिक्षित और सौम्य क्षवि के नेता माने जाते हैं। कायस्थ जाति से आते हैं। पटना के ही रहने वाले हैं।
प्रो. रणवीर नंदन कभी नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते थे। 2014 में नीतीश ने इन्हें पहली बार अपनी पार्टी के कोटे से विधान परिषद भेजा था। 2020 में कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी की तरफ से इन्हें रिपीट नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने सितंबर 2023 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था।
चुनाव लड़ने पर क्या कहा?
‘मैं चुनाव लड़ने का इच्छुक हूं। चुनाव लड़ना चाहता हूं। पार्टी अगर टिकट देगी तो मैं चुनाव लड़ने के तैयार हूं। लेकिन, ये निर्णय पार्टी नेतृत्व की तरफ से लिया जाएगा।’
पूर्व विधायक के बेटे भी टिकट के लिए लगा रहे चक्कर
बांकीपुर से अपनी दावेदारी के लिए कई नेता पुत्र के भी नाम आ रहे हैं, जो टिकट के लिए नेतृत्व का चक्कर लगा रहे हैं। इनमें दो नाम सबसे प्रमुख है। कुम्हरार के पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा टिकट की जुगत में जुटे हुए हैं।
2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान अरुण सिन्हा को कुम्हरार सीट से बेटकिट कर दिया गया था। तब इस बात का भारी विरोध हुआ था। आशीष सिन्हा पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता भी उनकी पैरवी में लगे हुए हैं।
PK ने कहा था- BJP को बांकीपुर से हराना है, तभी मोदी तक आवाज जाएगी
21 दिन पहले प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में सभा के दौरान कहा था कि कुछ लोग कह रहे हैं कि बहुत गलत आदमी को मुख्यमंत्री बना दिया गया है और लोग काफी नाराज हैं।
जब मैं पूछता हूं कि क्या मोदी जी आपको फोन करेंगे, तो लोग कहते हैं कि सम्राट चौधरी को मोदी और अमित शाह ने बनाया है, हमने थोड़ी वोट दिया था।
मोदी जी न पहले फोन किए थे, न आगे कभी करेंगे, लेकिन आपके पास वह ताकत है। जब आप मतदान करने जाएं, तो ईवीएम पर वह बटन दबाइए और भाजपा को हराइए।
बांकीपुर की जनता जब हराएगी, तो मोदी जी के कान में एकदम सुनाई देगा कि यहां की जनता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय से सहमत नहीं है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई जरूरी नहीं है कि आप प्रशांत किशोर को ही जिताएं या बताएं, लेकिन अगर आप भाजपा को हराएंगे तो आपको बेहतर मुख्यमंत्री मिल जाएगा। अगर नहीं हराइएगा, तो अपने वोट से आप खुद मुहर लगा देंगे कि जिसे मोदी-शाह ने कुर्सी पर बिठाया, वह सही आदमी है।
EVM और VVPAT से होगा मतदान
निर्वाचन आयोग ने बताया कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT का उपयोग किया जाएगा। आयोग ने पर्याप्त संख्या में मशीनें उपलब्ध करा दी हैं और शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
1995 से नवीन परिवार बांकीपुर में नहीं हारा है
1995 से इस सीट पर नितिन नवीन परिवार का कब्जा था। 2008 से पहले ये सीट पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र कही जाती थी। 1995 में इस सीट पर पहली बार नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा चुनाव जीते थे। 1995-2005 तक हुए चार चुनाव में यहां से जीतते रहे।
2006 में उनके आकस्मिक निधन के बाद नितिन नवीन इस पर उपचुनाव लड़े और इसके बाद 2006 तक हुए हर चुनाव में वे जीतते रहे। आज तक एक भी चुनाव वे यहां से नहीं हारे।
बांकीपुर में कायस्थ की आबादी ज्यादा, दूसरी जाति के नेता को टिकट मिलना मुश्किल
पटना के शहरी इलाकों को कायस्थों का गढ़ माना जाता है। यही कारण है कि पिछले 6 चुनाव से ज्यादा समय से पटना साहिब लोकसभा सीट से कायस्थ नेता जीतते आ रहे हैं। पहले शुत्रुघ्न सिन्हा अब रविशंकर प्रसाद यहां से चुनाव जीत रहे हैं।
यहां की दो विधानसभा सीटों कुम्हरार और बांकीपुर में ये निर्णायक भूमिका में हैं। चुनाव की स्टडी करने वाली संस्था चाणक्या के मुताबिक बांकीपुर में कायस्थ वोटर्स की आबादी 13 प्रतिशत से भी ज्यादा है।
बीजेपी पहले ही विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से कायस्थ का टिकट काट कर गुप्ता का प्रयोग कर चुकी है। भले बीजेपी यहां से चुनाव जीतने में सफल रही, लेकिन चुनाव के दौरान खूब नाराजगी जाहिर की गई थी। अब पटना जिले में कुम्हरार एकमात्र सीट है, जहां कायस्थ जाति के विधायक हैं।







