बिहार के भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। भरत तिवारी एनकाउंटर में शामिल पुलिसवालों पर एफआईआर दर्ज हो गई है। इस बीच बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच को लेकर सवाल उठाए और कहा कि इस जांच से कुछ हासिल नहीं होगा। ये मानवाधिकारी का मामला है। इस मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना होगा। ये लोग तो लीपापोती करेंगे।
कुंदन कृष्णन के आदेश पर पटना से गए STF के जवान: सुधाकर सिंह
इस दौरान सुधाकर सिंह ने पटना एसटीएफ पर भरत तिवारी की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि STF हेड कुंदन कृष्णन के आदेश पर पटना से STF के जवान एनकाउंटर के लिए बुलौटी गांव गए थे। अभी जो पुलिसवालों पर कार्रवाई हुई है, सस्पेंशन हुआ है वो वहां के स्थानीय पुलिसकर्मियों पर हुई है। तो असल गुनहगार अभी बच रहे हैं और बेगुनाह को फंसाया जा रहा है।
पिस्तौल या कट्टा रखना ही भरत तिवारी का गुनाह: राजद सांसद
एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि भरत तिवारी की इतना गुनाह था कि उसने पिस्तौल या कट्टा जो लिया है वो। बस उसका इतना ही गुनाह है। इसके लिए उसे गिरफ्तार करते और 2 साल की सजा करते है। अवैध पिस्तौल या कट्टा रखने पर दो साल की ही सजा है। उसे अवैध पिस्तौल लेकर नहीं घूमना चाहिए था, लेकिन हर गुनाह का दंड मृत्यदंड नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि हम किसी को थप्पड़ मारेंगे, उसका भी मृत्यदंड और किसी को गोली मारेंगे उसके लिए भी मृत्यदंड, कानून में तो ऐसा कहीं नहीं लिखा है। जितना हमारा गुनाह है, उसी के हिसाब से दंड मिलेगा। भरत तिवारी को दो साल की सजा मिलनी थी, लेकिन पुलिसवालों ने उन्हें मृत्युदंड दे दिया।
ऐसे लोगों को जेल में होना चाहिए: सुधाकर सिंह
कुंदन कृष्णन पर निशाना साधते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि पटना में बैठकर वर्दी में जो लोग अपराध कर रहे हैं, उन्हें पकड़ने की जरूरत है। कुंदन कृष्णन को किसी की हत्या करवाने का अधिकार किसने दे दिया। कानून से ऊपर कोई नहीं है। ऐसे लोगों को तो जेल में होना चाहिए। संविधान ने जो अधिकार सरकार को नहीं दिया, उस अधिकार का इस्तेमाल करना ही गुनाह है।







