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राम मंदिर दान विवाद: चढ़ावे की चोरी का विवाद सिर्फ शर्मनाक नहीं, भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है………………

UB India News by UB India News
June 17, 2026
in अध्यात्म
0
अयोध्या में भव्य राम मंदिर परिसर का निर्माण तेजी से जारी……
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जिस श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को देश के करोड़ों लोग सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना और भरोसे के प्रतीक के रूप में देखते हैं, उसके चढ़ावे की चोरी को लेकर उठा विवाद शर्मनाक तो खैर है ही, यह पूरे राष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है। इस मामले में सवाल तो उठ ही रहे थे, लेकिन जांच के दौरान मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल एक कर्मचारी के घर से दस लाख रुपये नकद गोबर के ढेर के नीचे से बरामद होने से एक तरह से संदेह की पुष्टि ही हुई है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और ट्रस्टियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हैरत की बात है कि इतने गंभीर मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की तरफ से जो शुरुआती प्रतिक्रियाएं मिलीं, वे बेहद अगंभीर किस्म की थीं। यहां तक कि एफआईआर दर्ज कराने की भी जरूरत नहीं समझी गई। जिस मंदिर में रोज लाखों का चढ़ावा चढ़ता हो, वहां धन के संग्रह, गिनती और लेखे-जोखे में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता की गुंजाइश होनी ही नहीं चाहिए। श्रद्धालुओं का चढ़ावा सिर्फ धनराशि नहीं होती, बल्कि वह उनके विश्वास, समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक होता है। चाहे मन में चोरी हो या मन भर चोरी हो, सबसे बड़ा सवाल यह है कि आस्था के ऐसे केंद्रों में लोगों को निजी लाभ के लिए नैतिक सीमाएं लांघने में आखिर संकोच क्यों नहीं होता। दुर्भाग्य से, देश के कई बड़े धार्मिक संस्थानों में समय-समय पर चढ़ावे और संपत्ति प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हर बार विवाद सामने आने के बाद कुछ समय के लिए सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन व्यवस्थागत सुधारों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। अब समय आ गया है कि इस पूरे तंत्र की व्यापक समीक्षा की जाए। दान राशि की गिनती, भंडारण और उपयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अच्छी बात है कि प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष, समयबद्ध और पूरी पारदर्शिता से हो। इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो, ताकि एक संदेश दिया जा सके। आस्था के केंद्रों से जुड़े मामलों में जवाबदेही का पैमाना कठोर होना ही चाहिए, क्योंकि यहां सवाल केवल धन के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे का भी है।

अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि को लेकर सामने आ रही कथित अनियमितताओं के बीच अब पुजारी समाज भी खुलकर सामने आ गया है. अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट को भंग करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. महासंघ का कहना है कि करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में यदि दान राशि के उपयोग में गड़बड़ी हुई है तो यह बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है.

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पुजारी महासंघ ने उठाए सवाल

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण देशवासियों की आस्था, त्याग और वर्षों के संघर्ष का परिणाम है. उन्होंने कहा कि देशभर से श्रद्धालुओं ने सोना-चांदी, नगद राशि और अन्य सामग्री मंदिर को समर्पित की है, ऐसे में उसके उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है.

सीबीआई जांच की मांग

महासंघ ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दान राशि से संबंधित कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. महासंघ का कहना है कि केंद्रीय एजेंसी से जांच होने पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी.

ट्रस्ट भंग कर नए प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग

महासंघ के राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर दिया जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर आंदोलन से जुड़े परिवारों और योग्य धार्मिक व्यक्तियों को ट्रस्ट में शामिल किया जाए, ताकि व्यवस्थाएं श्रद्धा और जवाबदेही के साथ संचालित हो सकें.

दान राशि में हेराफेरी के आरोप

महासंघ ने आरोप लगाया है कि पिछले कुछ समय से चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी और गबन की शिकायतें सामने आ रही हैं. इन खबरों से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और मंदिर प्रबंधन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

महेश शर्मा ने कहा कि भगवान के नाम पर मिले दान का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

राम मंदिर के कर्मचारी टिन्नू के घर सोना मिला

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से दो दिन पहले यानी शनिवार को सोना मिला। ट्रस्ट की टीम पुलिस के साथ उनके घर पहुंची थी। ट्रस्ट की जांच टीम ने गोपनीय तरीके से यह कार्रवाई की। इस मामले में ट्रस्ट और पुलिस का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।

हालांकि, सोना कितना है, यह अभी कन्फर्म नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इसकी कीमत करोड़ों में है। टिन्नू को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी माना जाता है। ट्रस्ट में वह काफी पावरफुल हैं। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में जमा कराना हो, वही सब कुछ मैनेज करते हैं।

इधर, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के रिश्ते में भतीजे लगने वाले सोमेश आनंद भी शक के घेरे में हैं। सूत्रों के मुताबिक, सोमेश आनंद ने एक साल में 50 से ज्यादा यात्राएं की हैं। इनमें कर्नाटक समेत कई राज्य शामिल हैं।

खास बात यह है कि सोमेश बोरे में लगेज लेकर अयोध्या से ट्रेन से जाते थे और वापसी फ्लाइट से खाली हाथ करते थे। बोरे में क्या होता था, इसे अलग-अलग चर्चाएं हैं। यह भी दावा है कि वह पैसा और सामान लेकर ट्रेन से जाते थे, क्योंकि ट्रेन में चेकिंग कम होती है।

गोपाल राव कर्नाटक के रहने वाले हैं। सोमेश आनंद भी वहीं के हैं। 2023 में मंदिर निर्माण प्रभारी बनने के बाद गोपाल राव ने सोमेश की नौकरी मंदिर में लगवाई थी।

6 लोगों की टीम टिन्नू के घर पहुंची, सोना मिला

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां सामने आई हैं। उसका पुश्तैनी मकान राम मंदिर से 1.5 किमी दूर स्वर्गद्वार इलाके में है। वहां इस वक्त उनके भाई रहते हैं। इसी घर में 13 जून को ट्रस्ट और मंदिर सुरक्षा से जुड़े 6 लोगों की टीम पहुंची। टिन्नू के घर से सोना बरामद कर टीम अपने साथ ले गई।

टिन्नू 1992 में अयोध्या में ऑटो चलाता था। खुद एक बाइक से चलता था। उसके पड़ोसियों ने बताया कि टिन्नू का अयोध्या एयरपोर्ट के पास एक मकान है, जिसमें हॉस्टल चलता है। इसमें करीब 70 कमरे हैं। माना जा रहा कि जल्द ही ट्रस्ट और सुरक्षा से जुड़े लोग हॉस्टल में भी सर्च कर सकते हैं। टिन्नू अभी राम मंदिर परिसर के ही PCF यात्री सुविधा केंद्र में है। यहीं उससे पूछताछ चल रही है।

मंदिर कर्मचारी केडी तिवारी के घर भी छापेमारी हुई

मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों को संभालने की जिम्मेदारी केडी तिवारी की है। वह भी संदेह के घेरे में हैं। PCF यात्री सुविधा केंद्र में ट्रस्ट की जांच टीम ने उनसे भी पूछताछ की थी। 2 दिन पहले इनके घर भी ट्रस्ट और सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने छापेमारी की। हालांकि, इनके घर से टीम को क्या मिला, यह अभी साफ नहीं है।

केडी तिवारी ने 1.5 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है, जो जांच के दायरे में है। केडी तिवारी ने भास्कर से कहा था- मेरी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दान किए गए सोने-चांदी के गहनों को तौलकर दानदाता को रसीद देने की थी। फिर उन गहनों को ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों तक सुरक्षित पहुंचा देता था। इसके आगे गहनों के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह मुझे नहीं पता है।

सोमेश और टिन्नू के कामों में कोई हस्तक्षेप नहीं करता था

सूत्रों के अनुसार, रामलला के दान से चोरी की रकम का बंटवारा अयोध्या में निर्मला हॉस्पिटल के पास एक मकान में होता था। पिछले करीब 3 साल से रामलला के दान के लेखा प्रभारी हरीश श्रीवास्तव भी ट्रस्ट और सुरक्षा अधिकारियों के रडार पर है।

चंपत राय का सहयोगी टिन्नू और गोपाल राव के करीबी सोमेश आनंद इतने प्रभावशाली थे कि इनके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं कर पाता था। इनके लिए बाकायदा निर्देश दिए गए थे। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करीब 50 रिटायर शिक्षकों को अपनी सेवा में ले रखा है। इन पर भी नजर रखी जा रही है।

दो साल पहले रामलला और तीनों भाइयों के सोने के मुकुट गायब हुए थे

हर साल सावन के झूला मेले के समय भगवान राम का उनके तीनों भाइयों- भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ विशेष श्रृंगार कराया जाता है। परंपरा के अनुसार, झूलन उत्सव पर चारों भाइयों को सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं। फिर उन्हें झूले पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। 2 साल पहले की बात है, रामलला और उनके तीनों भाइयों के सोने के मुकुट गायब हो गए।

कई महीनों तक मुकुट का पता नहीं चला। सावन मेले के दौरान जब रामलला के पुजारियों ने बार-बार मुकुट की मांग की तो खोजबीन शुरू हुई। तलाशी में मंदिर परिसर में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की अलमारी से मुकुट मिले थे। सूत्रों के अनुसार, ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु ने अपनी मां के जेवर बेचकर रामलला को भेंट किए थे।

पहले दान पात्र के सोने-चांदी के आभूषण चुराए, फिर कैश चोरी

बहुत से श्रद्धालु सोने-चांदी के जेवर दानपात्र में ही डाल देते थे। सूत्रों के अनुसार, इसका लोखा-जोखा भी ठीक से तैयार नहीं होता। दानपात्र से केवल कैश की गिनती होती रही। सोने-चांदी जैसी धातुओं का उल्लेख न के बराबर ही किया जाता रहा।

रामलला को चढ़ावे में आने वाले सोने-चांदी में उन्हीं का लेखा-जोखा तैयार होता रहा, जो ट्रस्ट कार्यालय में ही जमा किए जाते रहे। जबकि, भीड़ के दौरान आम श्रद्धालुओं की पहुंच इस कार्यालय तक नहीं हो पाती थी।

सूत्रों के अनुसार, रामलला के दानपात्र से कैश से ज्यादा सोने, चांदी आदि धातुओं की चोरी की जाती रही। पहले धातुओं को चुराया गया, फिर कैश पर भी हाथ साफ किया जाने लगा।

ये 4 लोग जांच के दायरे में

  • श्रीराम जन्मभूमि परिसर के अंदर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर टिन्नू यादव ने अपने भतीजे मनीष यादव की नियुक्ति करवा दी। मनीष को भी मंदिर परिसर स्थित PCF यात्री सुविधा केंद्र में रखा गया है। चर्चा है कि उसकी बताई जगह से 36 लाख रुपए कैश मिला है।
  • अयोध्या के खाले पुरवा में रहने वाले राजेश पाठक पर भी संदेह है। राजेश नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। जांच में जुटे ट्रस्ट कर्मचारियों ने उनसे सवाल पूछे हैं। राजेश की पिछले 5-6 सालों में बदली जीवनशैली जांच के घेरे में हैं।
  • अयोध्या के रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरान फगौली गांव का रहने वाला लवकुश और उसका जीजा अनुकल्प मिश्रा भी शक के घेरे में हैं। दोनों मंदिर में नोटों की गिनती करते थे। दोनों की आर्थिक स्थिति भी तेजी से बदली है।
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