ADVERTISEMENT
UB India News
Saturday, June 13, 2026
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

राहुल गांधी के ‘देशद्रोही’ बयान पर उठते गंभीर सवाल……………….

UB India News by UB India News
June 2, 2026
in खास खबर, विपक्ष, संपादकीय
0
मेरे हाइड्रोजन बम पर EC और मोदी चुप क्यों………….

RELATED POSTS

मीनाक्षी नटराजन एपिसोड की इनसाइड स्टोरी………

भारत ने अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है…………………

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीते दिनों जब प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ‘देशद्रोही’ कहा, तो यह साधारण राजनीतिक आरोप नहीं था। देशद्रोह का यह आरोप इतना संगीन है कि सीधे प्रतिपक्ष की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि देश के शीर्ष कार्यकारी पदों और एक बड़े सामाजिक संगठन पर लगाए गए इस गंभीर आरोप का प्रामाणिक आधार क्या है? यदि देशद्रोह का आरोप लगाया गया है, तो उसके समर्थन में तथ्य भी सामने आने चाहिए। अन्यथा यह राजनीतिक असहमति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श के स्तर को गिराने वाली बयानबाजी मानी जाएगी। संवैधानिक मर्यादा के इसी क्षरण के संदर्भ में 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में दिया गया बाबासाहेब आंबेडकर का अंतिम भाषण याद आता है।

उन्होंने सचेत किया था कि जब अपनी बात रखने और सरकार बदलने के शांतिपूर्ण मार्ग उपलब्ध हों, तब अमर्यादित भाषा और असंवैधानिक तौर-तरीकों का आश्रय लेना ‘अराजकता का व्याकरण’ बन जाता है। दुर्भाग्य से, विपक्ष का एक वर्ग ऐसी भाषा और शैली को अपनी राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा बनाता दिखाई देता है। लोकतंत्र में तीखी आलोचना सत्ता को निरंकुश होने से रोकती है, परंतु जब आलोचना का स्थान व्यक्तिगत घृणा ले ले, तो संवाद का रास्ता बंद हो जाता है। देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के लिए ऐसी शब्दावली का प्रयोग न केवल उस विशाल जनादेश का अवमूल्यन है जिसने उन्हें चुना है, बल्कि यह हमारी समूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की वैधता को ही कठघरे में खड़ा करता है।

विपक्ष द्वारा लगातार यह विमर्श गढ़ा जा रहा है कि वर्तमान सत्ता ‘संविधान को खत्म’ कर रही है। संविधान पर आघात की पड़ताल करने से तथ्य स्वयं अपनी कहानी कह देंगे। याद कीजिए जून 1975 का वह दौर जब बिना किसी विधिवत कैबिनेट बैठक के देश पर आपातकाल थोपा गया था। विपक्षी नेताओं को जेलों में डालना, प्रेस पर सेंसरशिप लगाना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित करना संवैधानिक ढांचे का विध्वंस था। बिना विपक्ष की मौजूदगी के संसद के भीतर 42वां संविधान संशोधन पारित कर संविधान की मूल प्रस्तावना को बदला गया था।

वर्तमान में संसद के भीतर हर विधेयक पर बहस होती है, मत विभाजन की लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई जाती है और सर्वोच्च अदालत कानूनों की न्यायिक समीक्षा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। जहां तक संविधान के सम्मान और जन-जागरूकता का प्रश्न है, वर्तमान सरकार ने संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उसके मूल्यों को समाज तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक चेतना को सशक्त करने के लिए निरंतर संस्थागत प्रयास किए गए हैं। संविधान शिल्पी बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के जीवन से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थानों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में भी इसी सरकार ने विकसित किया। राजा सुहेलदेव से लेकर वीरा पासी तक, वंचित समाज के नायकों को जो सांस्कृतिक सम्मान आज मिल रहा है, उससे समाज के अनेक वंचित वर्गों में आत्मगौरव और सांस्कृतिक पहचान की भावना को बल मिला है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और महात्मा गांधी के अंतर्संबंधों को लेकर भी विपक्ष का विमर्श हमेशा एकांगी और ऐतिहासिक तथ्यों से परे दिखाई देता है। गांधीजी मानते थे कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्राम विकास, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वच्छता और अस्पृश्यता उन्मूलन जैसे बुनियादी सामाजिक कार्यों को जीवनशैली बनाना होगा। आजादी के बाद सत्ता संभालने वाले तंत्र ने गांधी के इस रचनात्मक माडल को पीछे छोड़ दिया, जबकि संघ ने राजनीति से अलग रहकर गांधी के इन सेवापरक कार्यों को अपने संगठन का मूल आधार बनाया। आज वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार और सुदूर गांवों में चल रहे ‘एकल विद्यालय’ महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा के विचार के ही व्यावहारिक रूप हैं। महात्मा गांधी ने 1934 में वर्धा के पास संघ के एक शिविर का प्रत्यक्ष दौरा किया था और वहां जातिगत भेदभाव की पूर्ण अनुपस्थिति की सराहना की थी। अतः संघ को गांधी के विचारों का विरोधी बताना व्यावहारिक यथार्थ की कसौटी पर निराधार सिद्ध होता है।

डा. आंबेडकर का मानना था कि वास्तविक सशक्तीकरण वित्तीय समावेशन से आता है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से बिचौलियों की पुरानी संस्कृति को खत्म करके सीधे निर्धन नागरिकों के बैंक खातों में मदद पहुंचाना, यूपीआइ तकनीक द्वारा छोटे व्यापारियों को मुख्यधारा से जोड़ना और मुद्रा ऋणों के जरिये करोड़ों वंचित युवाओं को उद्यमी बनाना इसी दौर में संभव हुआ है। इन आर्थिक वास्तविकताओं को समझे बिना केवल सतही नारा गढ़ने से कोई रचनात्मक आर्थिक बहस संभव नहीं है। विपक्ष अपनी राजनीतिक हताशा में जिस आक्रामक शैली को अपना रहा है, उसका सबसे बड़ा नुकसान देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को हो रहा है। जब न्यायपालिका, चुनाव आयोग, सरकार और संसद की पूरी प्रक्रिया पर लगातार आधारहीन सवाल उठाए जाते हैं, तो इससे भारतीय राज्य की साख ही कमजोर होती है।

लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने या हारने का नाम नहीं है, यह उन संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास पर टिका होता है, जो इस व्यवस्था का संचालन करती हैं। यदि देश का नागरिक यह मानने लगेगा कि उसकी हर संस्था बिकी हुई या पक्षपाती है, तो वह व्यवस्था के प्रति उदासीन हो जाएगा। इसके दुष्परिणाम विपक्ष को भी भोगने पड़ेंगे और देश एक स्थायी राजनीतिक अस्थिरता में फंस जाएगा। विपक्ष को यह समझना होगा कि उसका कार्य सत्ता की नीतियों का ठोस विकल्पों के साथ विरोध करना है, न कि पूरे तंत्र की वैधता को ही खारिज कर देना। पूरी व्यवस्था को ही अवैध ठहराने का यह विमर्श लोकतंत्र के हित में नहीं है। व्यवस्था की साख बनी रहेगी, तभी देश का जनतंत्र सुरक्षित रह सकेगा।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

मीनाक्षी नटराजन एपिसोड की इनसाइड स्टोरी………

मीनाक्षी नटराजन एपिसोड की इनसाइड स्टोरी………

by UB India News
June 12, 2026
0

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होना केवल एक तकनीकी कार्रवाई नहीं, बल्कि दो...

भारत ने अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है…………………

भारत ने अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है…………………

by UB India News
June 10, 2026
0

भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट...

जीएसटी सुधारों के एलान के बाद शेयर बाजार गुलजार; सेंसेक्स ने लगाई लंबी छलांग, निफ्टी में भी तेजी

बाजार में बढ़त; सेंसेक्स 300 से अधिक अंक चढ़ा, निफ्टी 23330 के पार पहुंचा

by UB India News
June 12, 2026
0

आज के शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 303.73 अंक चढ़कर 74,222.49 पर पहुंचा गया।...

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर क्यों ठप हुआ आम का बिजनेस?

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर क्यों ठप हुआ आम का बिजनेस?

by UB India News
June 10, 2026
0

भारत-नेपाल सीमा पर सालों से चले आ रहे पारंपरिक व्यापार के बीच अब नए नियमों और प्रतिबंधों का असर साफ...

PoK में कत्लेआम के बाद भी पाकिस्तान बेरहम!

PoK में कत्लेआम के बाद भी पाकिस्तान बेरहम!

by UB India News
June 12, 2026
0

पाकिस्तान की सेना ने कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में दहशत फैला दी है, अपने हक की आवाज उठाने वाले...

Next Post
मुफ्त की रेवड़ी मामला फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट……….

रेवड़ी संस्कृति से विषमता बढ़ती, सरकारी खजाने पर दबाव............

बर्फबारी घट रही और मक्खियां बढ़ी रही………….

बर्फबारी घट रही और मक्खियां बढ़ी रही.............

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend