बिहार के 8 IAS अधिकारियों को देश के टॉप- 100 डीएम की लिस्ट में जगह मिली है। इनमें गया के डीएम शशांक शुभंकर और रोहतास की डीएम उदिता सिंह शामिल हैं। दोनों पति-पत्नी हैं।
इन अधिकारियों को आम लोगों की समस्याओं के समाधान कराने, सरकारी योजनाओं का लाभ हर योग्य लाभार्थी तक पहुंचाने और गुड गवर्नेंस के लिए यह सम्मान मिला है।
दरअसल, फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट ने 2025-26 के दौरान देश के 800 जिलों के कलेक्टरों का सर्वे किया। काम करने के तरीके, सत्ता व विपक्ष के स्थानीय नेताओं-सीनियर IAS के फीडबैक, गुड गवर्नेंस सहित 10 पॉइंट्स के आधार पर इनकी रैंकिंग की।
1- आनंद शर्मा: जर्मनी में इंजीनियर थे, पिता का सपना पूरा करने को बने IAS
मधुबनी जिला के डीएम आनंद शर्मा 2013 बैच के IAS अधिकारी हैं। इनका जन्म 7 जून 1987 को हुआ था। आनंद की पहचान जमीन पर उतरकर जनता की परेशानी समझने और उसका हल कराने वाले अधिकारी की है। पिछले दिनों वह एक सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच बैठकर पढ़ाई की व्यवस्था जांचते नजर आए थे।
- IAS अधिकारी बनने से पहले आनंद जर्मनी में इंजीनियर के रूप में जॉब कर रहे थे। उनके पिता का सपना था कि बेटा बड़ा ऑफिसर बने।
- पिता के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने UPSC की तैयारी की और सफल हुए।
- डीएम बनने के बाद आनंद शर्मा ने मधुबनी में विकास और सुशासन पर खास ध्यान दिया। वह सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
- बाढ़ पीड़ितों के राहत के लिए काम किया है। आम लोगों से मिलकर उनकी परेशानी सुनते हैं। उसका समाधान कराते हैं।
- आनंद ने कानपुर के हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए किया।
क्या खास किया: मधुबनी जिले में जन-कल्याणकारी योजनाओं (जैसे जल जीवन हरियाली, मनरेगा और ग्रामीण आवास योजना) को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू करवाया। जिले में विकास कार्यों की मॉनिटरिंग की। प्रशासनिक कार्यों को पारदर्शी और जनता के अनुकूल बनाया।
2- उदिता सिंह, IIT-दिल्ली से इंजीनियरिंग के बाद बनीं आईएएस अधिकारी
रोहतास की डीएम उदिता सिंह 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। इनका जन्म 12 अप्रैल 1989 को हुआ था। वह मूल रूप से बिहार के बांका जिले के रजाौन थाना क्षेत्र के गोराडीह गांव से हैं। मिडिल क्लास फैमिली से आती हैं। उदिता बचपन से ही काफी मेधावी रही हैं। गणित और साइंस विषय उन्हें पसंद थे।
- उदिता ने 2004 में DPS, पटना से 94% अंकों के साथ मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए कोटा (राजस्थान) गईं।
- 2006 में 88% अंकों के साथ इंटरमीडिएट किया। इसके बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्ट्रीम में IIT-दिल्ली में दाखिला लिया।
- 2011 में B.Tech की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। 2012 में अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाईं। दूसरे प्रयास में 46वीं रैंक हासिल की।
- उदिता सिंह आम लोगों से मिलती हैं। जमीन पर उतरकर लोगों की परेशानियां दूर करती हैं।
- उन्होंने रोहतास डीएम रहते हुए गरीबों तक सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए काम किया है। इनके पति शशांक शुभंकर भी IAS अधिकारी हैं। वह गया के डीएम हैं।
क्या खास किया: रोहतास जिले में महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम किया। आम जनता की शिकायतों को सुना और जल्द समाधान कराया। सरकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
3- दीपेश कुमार, इंजीनियरिंग में किया है मास्टर
सहरसा के DM दीपेश कुमार 2017 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। इन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री ली है। सहरसा डीएम बनने से पहले उन्होंने DDC (District Development Commissioner) के रूप में काम किया था।
- सहरसा में दीपेश कुमार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बाढ़ प्रबंधन को लेकर काम किया है। वह नियमित रूप से जनता दरबार का आयोजन करते हैं। इसमें आम लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनका समाधान कराते हैं।
- दीपेश की छवि जमीन पर उतर कर काम कराने वाले अधिकारी की है। सरकारी योजनाओं से हो रहे विकास के काम की निगरानी के लिए मौके पर जाते हैं। असली स्थिति जानने के लिए औचक निरीक्षण करते हैं। उनके नेतृत्व में जिले में विकास योजनाओं को गति मिली है।
क्या खास किया: सहरसा में बुनियादी ढांचा विकास और बाढ़ प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहतरीन काम किया। सरकारी सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी बढ़ाने में भी अहम योगदान दिया।
4- डॉ. त्यागराजन, एमबीबीएस करने के बाद बने अधिकारी
पटना के डीएम त्यागराजन एस.एम. 2011 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था। वह मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं।
- त्यागराजन ने 2008 में कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री ली थी। डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने IAS अधिकारी बनने का फैसला किया और यूपीएससी की तैयारी की। 2010 में उन्हें सफलता मिली।
- इनकी पहचान बिना डरे ऑन स्पॉट फैसला लेने वाले अधिकारी की है। त्यागराजन 2010 में IPS अधिकारी बने थे। उन्होंने एएसपी ओड़ीसा के रूप में सेवा दी थी। 2011 में IAS अफसर चुने गए।
- नालंदा में नगर आयुक्त और डीएम रहने के दौरान अच्छी हिंदी बोलना और पढ़ना सीख गए।
क्या खास किया: पटना में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने और अतिक्रमण मुक्त अभियानों को सुचारू रूप से चलाने के लिए काम किया। सरकारी जमीन पर किए गए कब्जा को हटाने के लिए बुलडोजर चलवाया।
5- वैभव श्रीवास्तव, सारण में विकास योजनाओं को दी गति
वैभव श्रीवास्तव 2018 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 16 दिसंबर 1989 को हुआ था। वैभव ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और कर्नाटक यूनिवर्सिटी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की है।
- वैभव उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के गोला नगर के रहने वाले हैं। उन्हें तेज-तर्रार और सक्रिय अधिकारियों में गिना जाता है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में निदेशक के पद पर भी सेवा दे चुके हैं। सारण उनका बतौर जिलाधिकारी पहला जिला है।
- वैभव लोगों से मिलने, उनके काम कराने, जल्द फैसला लेने और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण के लिए सराहे जाते हैं। उनके नेतृत्व में सारण जिले में कई विकास योजनाओं और प्रशासनिक पहलों को गति मिली है।
क्या खास किया: छपरा (सारण) जिले में विकास योजनाओं की कछुआ चाल को गति दी। राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी लाने और जन-सुनवाई के जरिए जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करने के शानदार काम किया है।
6- विवेक रंजन मैत्रेय, सीवान में लेकर आए सुशासन
सीवान के DM विवेक रंजन मैत्रेय 2017 बैच के बिहार कैडर के IAS अधिकारी हैं। इनका जन्म 5 जुलाई, 1993 को हुआ था। विवेक ने इंजीनियरिंग में स्नातक किया है।
- विवेक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिला के हिनौता गांव के निवासी हैं। उनके पिता विश्व भान नागेश लखनऊ सचिवालय में क्लर्क और मां प्राथमिक विद्यालय में टीचर हैं।
- विवेक बचपन से ही पढ़ने-लिखने में होशियार थे। ग्रेजुएशन के बाद UPSC की तैयारी में जुट गए थे।
- 2016 में व्यापार कर में अफसर की नौकरी मिली। इसके बाद भी IAS बनने के लिए तैयारी जारी रखी। डीएम बनने का उनका सपना 2017 में पूरा हुआ।
क्या खास किया: सीवान में सुशासन को बढ़ावा दिया। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था सुधारी। युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू कराया।
7- शशांक शुभंकर, दादा भी थे अधिकारी
गया के डीएम शशांक शुभंकर 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं। बिहार कैडर में सेवा दे रहे हैं। उनका जन्म 11 सितंबर 1991 को हुआ था। इनकी पत्नी उदिता सिंह रोहतास की डीएम हैं।
- शशांक शुभंकर मूल रूप से झारखंड से हैं। डीएवी पब्लिक स्कूल, रांची से पढ़ाई की है। छठी कक्षा में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के साइंस ओलंपियाड में दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
- 10वीं और 12वीं में वे बैच टॉपर रहे। वीआईटी, वेल्लोर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल हासिल किया था। बीटेक करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की।
- शशांक ने आरा में डीडीसी रहते हुए सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया और सुर्खियां बटोरी। उन्हें सहज स्वभाव और समस्याओं के जल्द समाधान कराने के लिए जाना जाता है। उनके दादा और पिता भी अधिकारी रहे हैं।
क्या खास किया: धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी गया में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार कराया। ‘हर घर गंगाजल’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कराया। इससे घर-घर तक गंगा का पानी पहुंचा। महाबोधि कॉरिडोर व जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को सफलता से जमीन पर उतारा।
8- सुब्रत कुमार सेन, बैंक में करते थे काम
सुब्रत कुमार सेन मुजफ्फरपुर के डीएम हैं। 2013 बैच के IAS अधिकारी सुब्रत का जन्म 25 अक्टूबर 1988 को हुआ था।
- सुब्रत सुपौल जिला के रहने वाले हैं। 8वीं क्लास में पढ़ते समय ही उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला कर लिया था।
- छठी से 12वीं क्लास तक जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाई की। इनके पिता छोटी सी हार्डवेयर की दुकान चलाते थे।
- सुब्रत ने इंजीनियरिंग की जगह आर्ट्स से ग्रेजुएशन का फैसला किया तो इनकी मां नाराज हुईं थीं। वह चाहती थीं कि बेटा इंजीनियरिंग पढ़कर अच्छी नौकरी करे।
- सुब्रत ने 2010 में पहली बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी, प्रीलिम्स एग्जाम से ठीक पहले बीमार पड़ गए।
- 2011 में प्रीलिम्स और मेन्स पास की। मेन्स और इंटरव्यू के बीच के समय में उन्होंने कई बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर के पदों के लिए आवेदन किया।
- 5 बैंकों से नौकरी के प्रस्ताव मिले। उन्होंने बैंक ऑफ के मध्य प्रदेश के खंडवा ब्रांच में काम शुरू कर दिया था।
- 2011 में सीट नहीं मिल पाई। वह बैंक की जॉब के साथ UPSC की तैयारी करते रहे। 2012 में 93वीं रैंक हासिल की और बिहार कैडर के IAS अधिकारी बने।
क्या खास किया: मुजफ्फरपुर जैसे उत्तर बिहार के प्रमुख व्यापारिक केंद्र में औद्योगिक विकास को गति दी। चमकी बुखार (AES) जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए। स्मार्ट सिटी से जुड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कराया।







